भाभी और माँ की चुदाई एक साथ 2

By | July 4, 2023

Bhabhi ki chudai ki Story: हैलो दोस्तो, मैं आपका दोस्त रमेश एक बार फिर आया हु पिछली कहानी का 2 भाग लेके, और जिसने भाग 1 नहीं पढ़ा अभी तक वो प्लीज भाग 1 पढे तभी कहानी समझ मे आएगी।

अब आगे।

मैं जल्दी से उठके अपने कमरे में आ गया. और रेशमा जाते ही माँ के पैर पकड़ने लगी. रेशमा की आँखों में आंसू थे. मुझे उनकी बाते सुनाई नहीं दे रही थी.मगर रेशमा को देखकर ये पता चल रहा था की वह माफ़ी मांग रही है.

माँ ने रेशमा के कंधे पर हाथ रखा. और उसे कुछ कहने लगी.माँ और रेशमा की बाते कुछ देर तक चली. फिर रेशमा सबके लिए चाय बनाने लगी.
मैं भी दुकान खोल के बैठ गया. और कुछ देर बाद रेशमा चाय लेके आयी.

रेशमा – भाई साहब चाय पे लीजिये.

मैं – अरे चाय को मारो गोली. ये बताओ माँ ने क्या कहा?

रेशमा – भाई साहब अगर मैंने आपको बता दिया तो आप यकीं नहीं करोगे की मम्मी जी ने मुझसे क्या कहा.

मैं – रेशमा जल्दी बताऊ यार. मुझसे रहा नहीं जा रहा है.

रेशमा – जब मैं मम्मी के पास गयी तो मैं बहुत डरी हुई थी. और मैंने जाते ही उनसे माफ़ी मांगी.

माँ – बहु ये जो भी तुम और तुम्हारे जेठ के बीच है. वह सब ठीक नहीं है. तुम जानती हो न अगर विकास को पता चल गया तो क्या हो सकता है?

रेशमा – मैं जानती हु मम्मी जी. और इस घर को बचाने के लिए ही मैंने ये सब किया है.

माँ – ये तुम क्या कह रही हो बहु?

Devar bhabhi ki chudai ki kahani

रेशमा – हा मम्मी जी जेठ जी मेरे साथ बहुत टाइम पहले से ये सब हरकते कर रहे है. वह मुझे घूरते रहते थे. और कभी कभी मुझे छूते भी थे. मगर मैंने कभी अपने पति को नहीं बताया.क्युकी मैं इस घर को तोडना नहीं चाहती थी.अगर मैं उन्हें ये सब कह देती तो वह जेठ जी से लड़ते. और ये घर टूट जाता.

माँ – बहु अगर मेरा बड़ा बेटा ऐसा कुछ कर रहा था तो तूने मुझे क्यों नहीं बताया?

रेशमा – मम्मी जी अगर मैं आपसे ऐसा कहती तो क्या आप इस बात पर यकीं नहीं करती. आप पहले अपने बेटे का साथ देती न की मेरा.

माँ – बहु हम दोनों ही औरते है. और ये बात अच्छे से जानते है की अकेला मर्द ऐसा ही करता है. मैंने कितनी बार उसकी शादी करवानी चाही. मगर वह ही मना कर देता है. क्या मैं तुमसे कुछ पूछ सकती हु?

रेशमा – हा मम्मी जी पूछ लीजिये.

माँ – क्या तुम भी मेरे बड़े बेटे को पसंद करती हो? मम्मी जी की बाते सुनके मैं सन्न हो गयी. मुझे समझ नहीं आ रहा था की मैं क्या कहु.

माँ – बताओ बहु मेरा ये जानना जरुरी है. या कही वह तुम्हारे साथ जबरदस्ती तो नहीं कर रहा है.

रेशमा – नहीं मम्मी जी भाई साहब ने ऐसा कुछ नहीं किया है.

माँ – इसका मतलब जो कुछ भी हो रहा है. तुम दोनों अपनी मर्ज़ी से कर रहे थे.मैंने अपना सर नीचे कर लिया. और मैं कुछ नहीं बोल रही थी. मगर मम्मी समझ गयी.

माँ – बहु शायद मैं समझ गयी हु की तुम भी ऐसे रिश्ते में क्यों आयी हो? मैं जानती हु मेरा छोटा बेटा जयादा काम करता है. और शायद तुम्हे पूरी तरह से टाइम नहीं देता है. इसीलिए तुम आपने जेठ के साथ बहक गयी. मैंने मम्मी की तरफ देखा. वैसे ये बात पूरी तरह सही तो नहीं थी. मगर है सच तो यही था.

माँ – बहु अब मैं तुमसे जो कहने जा रही हु. वह है तो गलत. मगर एक औरत को ऐसे कई राज़ दबा के रखने पड़ते है. और कई बार उसे दोहरी ज़िंदगी भी जीनी पड़ती है. बहु मैं चाहती हु. तुम मेरे बड़े बेटे के साथ ऐसे ही रहो.मम्मी जी की बात सुनके मेरा दिमाग घूम गया. वह मुझे आपके साथ ये सब करने के लिए कह रही थी.

रेशमा – मम्मी जी आप ये क्या कह रही है?आप सब जान चुकी है. और उसके बाद आप मुझे उनसे रिश्ता रखने को कह रही है.

माँ – बहु रिश्ता तो तुम्हारा बन ही चूका है. और वह नालायक शादी नहीं करना चाहता है कितनी लड़किया दिखा चुकी हु उसको सब के लिए मना कर देता है. और अगर तुम ही मेरे दोनों बेटो का ख्याल रखो तो मुझे कोई परेशानी नहीं है.
मैं मम्मी की बाते धयान से सुन रही थी.

देवर भाभी की चुदाई की कहानी

माँ – बहु तुम सोच लो. वैसे भी तुम सब कुछ तो कर ही चुकी हो. इस रिश्ते को राज़ रखना. और घर की बात घर में ही रहेगी. अकेलापन बहुत बुरा होता है. और मुझसे अच्छे से ये बात और कोई नहीं समझ सकता.मम्मी की बाते सुनके मैं वापस आ गयी.

मैं – सच में रेशमा माँ ने ऐसे कहा.

रेशमा – हा भाई साहब मम्मी जी को हमारे इस रिश्ते से कोई परेशानी नहीं है. मैं रेशमा को रैक के पीछे ले गया. और हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे. रेशमा और मुझे अब किसी का डर नहीं था. हम दोनों काफी देर तक किश करते रहे. फिर एक ग्राहक आ गया और रेशमा फिर अंदर चली गयी. शाम को मेरा भाई भी आ गया. और सब कुछ नार्मल था.

मैंने भी दुकान बंद कर दी. और अपने कमरे में आ गया. मैंने अभी तक माँ से कोई बात नहीं की थी.और शायद माँ इस बात को समझ गयी. माँ मेरे कमरे में आयी. और सीधा मेरे पास आ गयी. मुझे तो समझ नहीं आया की मैं क्या बोलू.

माँ – क्या बात है बेटा? मैं देख रही हु. तू मुझसे बात नहीं कर रहा है.

मैं – कैसे बात करू माँ. मुझे तो आपसे आँखे मिलाने में भी शर्म आ रही है.

माँ – देख बेटा काम तो तूने सही नहीं किया है. मगर सच कहु तो बुरा भी नहीं किया है.

मैं – माँ आपने मुझे और रेशमा को ये सब करने की इज़ाज़त दे दी है. मगर क्या आपको छोटे के लिए बुरा नहीं लगता है.

माँ – बेटा ये इज़ाज़त मुझे सिर्फ तेरी वजह से देनी पड़ी है. और अगर तेरी जगह कोई और होता तो मैंने कब का तेरे छोटे भाई को सब बता देती. और तुझे भी पूरी दुनिया में आपने छोटे भाई की बीवी ही मिली गर्मी निकालने के लिए.

मैं – मैं क्या करता माँ? वह मुझे ऐसे घूर के देखती थी की मैं भी उसकी तरफ खींचता चला गया.

माँ – वैसे तूने ठीक ही किया बेटा? वरना वह कही बहार मुँह मारने लगती तो हमारे परिवार की कितनी बदनामी होती. बस अब जो तुम दोनों कर रहे हो. थोड़ा संभल के करना. चल अब चल के खाना खा ले.

फिर हम सबने खाना खाया. और मैं प्लेट रखने किचन में चला गया. वह रेशमा पहले से थी. और मैंने भी जाते ही उसे पकड़ लिया. मैं रेशमा की चूचिया दबाने लगा.

रेशमा – ये क्या कर रहे है भाई साहब? सब लोग घर में है. आपको बिलकुल भी डर नहीं लगता है क्या?

मैं – अब डर किस का रेशमा. अब तो माँ भी अपने साथ है. और मेरा छोटा भाई कहा किचन में आता है.रेशमा मुझे ममना करती रही. और मैं उसकी चूचिया दबाता रहा. मगर तभी एक दम से माँ आ गयी. और उन्होंने मुझे रेशमा की चूचिया मसलते हुए देख लिया.मैंने भी अपने हाथ हटा लिया.

Sexy bhabhi ki chudai

माँ – तुम दोनों को बिलकुल भी शर्म नहीं है क्या? सब लोग घर पर है. और तुम दोनों रास लीला मना रहे हो.

रेशमा – मम्मी जी मैं तो भाई साहब से मना ही कर रही थी. मगर यही नहीं मान रहे थे.तभी मैं छत पर चला गया. और वही थोड़ी देर टहल के साइड में बैठ गया. और मैं माँ के बारे में सोचने लगा. क्या माँ भी हमें देखकर गरम हो रही होगी.

माँ के बारे में सोचते सोचते मेरा लंड खड़ा हो गया. और तभी मुझे किसी के ऊपर आने की आहट हुई. मैंने झाक कर देखा तो माँ आ रही थी. उनको देखते ही मेरे मन एक आईडिया आया.माँ जैसे ही ऊपर आयी. उससे पहले मैं साइड में छुप गया. और उनके ऊपर आते ही मैंने उन्हें पीछे से पकड़ लिया. माँ इससे पहले कुछ समझ पाती.

मैंने एक हाथ से उनका मुँह बंद कर दिया.और फिर मैं एक हाथ से उनकी बड़ी बड़ी चूचिया दबाने लगा. माँ ने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी. और उनकी मुलायम चूचिया बहुत मज़ा दे रही थी.

मैं – क्या बात है रेशमा बड़ी देर लगा दी? देख मेरा लंड कितना टाइट हो गया है.मेरा लंड माँ की गांड में घुसा जा रहा था. और माँ मेरा हाथ हटा रही थी. ये सब 40 सेकंड तक चला. और उसके बाद मैंने खुद अपना हाथ हटा लिया. और माँ मेरी तरफ पलट गयी.

मैं – अरे माँ आप यहाँ क्या कर रही हो? मैंने तो रेशमा को बुलाया था. वह यहाँ आने वाली थी.

माँ – बेटा कम से कम देख तो लेता की रेशमा आयी है. या तेरी माँ है. और तू मेरे साथ ही शुरू हो गया.

मैं – माफ़ करना माँ मुझे लगा रेशमा ही होगी. इसीलिए बस ये सब हो गया. मुझे क्या पता था. मेरी माँ मेरे सामने है.

माँ – बेटा जो हो गया सो हो गया. ये बात रेशमा से कहना मत. वरना खमा खा बात बिगड़ जाएगी. पता नहीं वह क्या सोचने लगे?

मैं – माँ मैं जनता हु. कोनसी बात किस्से कहने वाली होती है मैंने फिर से माँ को सामने से गले लगा लिया. और मेरा खड़ा लंड माँ के पेट में लगने लगा. और उनकी चूचिया मेरी छाती में दबी हुई थी. माँ भी अंदर से थोड़ी गरम तो जरूर हुई होगी.

Hot Bhabhi ki chudai

माँ – चल नीचे चल यहाँ खुले में बहु के साथ ये सब करना ठीक नहीं है. जो भी करना है. कमरे में कर. मैं तेरे भाई के पास बैठ के बात करुँगी. तब तक तू अपने काम निकल लेना.

हम लोग नीचे आ गए. और माँ छोटे भाई के साथ बात करने लगी. और मैंने भी देर किये बिना रेशमा को अपने कमरे में ले गया. मेरा लंड पहले से ही तैयार था.

रेशमा – भाई साहब आप फिर से शुरू ही गए।

मैं – अरे यार जल्दी से मेरा पानी निकाल दे. वरना ये पूरी रात परेसान करेगा. तब तक माँ छोटे का ख्याल रख रही है.

मैंने जल्दी से अपना कच्छा नीचे कर लिया. और रेशमा ने भी अपनी साड़ी ऊपर कर ली. वह पहले से अंदर से नंगी थी. मैंने अपना लंड पर थूक लगा के अंदर डाल दिया. और आपने भाई के रहते हुए. मैं उसकी बीवी की चुदाई कर रहा था. ये सब सोच के और भी जयादा जोश आ रहा था.

मैं तेज तेज धक्के लगा रहा था. और रेशमा अपनी खुद की आवाज रोक रही थी.

रेशमा – भाई साहब मन तो मेरा भी बहुत हो रहा था. अच्छा हुआ आप खुद शुरू हो गए. वैसे सच कहु मम्मी जी को सब पता है. ये जान के बड़ा अजीब लगता है.

मैं – अरे अब अजीब क्या है? अब तो तुम और मैं जब चाहे चुदाई कर सकते है. अब तो माँ भी अपना ही साथ देगी. मैं जल्दी जल्दी चुदाई करने लगा. और फिर हम दोनों का पानी निकल गया. फिर मैं अपने कमरे के बहार आ गया. और माँ को आवाज देने लगा. माँ भी समझ की मेरा काम हो गया है.

रेशमा बाथरूम जाके सफाई करने लगी. और फिर वह आपने कमरे में चली गयी. मैं भी कमरे में आके सो गया. फिर सुबह जल्दी उठ के दूकान खोल दी. क्युकी ग्राहक जल्दी आने लगते है.

फिर सब काम में लग गए. और सुबह 9 बजे मेरा भाई भी नास्ता करके चला गया. फिर माँ दुकान सँभालने आ गयी. और मैं अंदर आ गया. रेशमा नीचे पोछा लगा रही थी.

मैंने रेशमा को उठाया और उसे माँ वाले दीवान पर लिटा दिया. रेशमा ने कुछ नहीं कहा. उल्टा वह खुद मुझे किश करने लगी. कुछ देर हम दोनों किश करते रहे.फिर मैं भी नाहा धोके तैयार हो गया. और फिर से दुकान पर बैठ गया. रेशमा मेरे लिए नास्ता ले आयी. दोपहर के टाइम में दूकान बंद करके सीधा रेशमा के पास गया.

रेशमा किचन में खाना बना रही थी. रेशमा ने सिर्फ मैक्सी पहनी हुई थी. मैं तुरंत उसके पीछे गया. और उसकी मैक्सी ऊपर करके रेशमा की चुत सहलाने लगा.रेशमा ने पीछे देखा और वह मुस्कुराने लगी. रेशमा खुद आगे झुक गयी. और मैंने अपना मुँह रेशमा की चुत में लगा दिया.

मैं कुत्ते की तरह रेशमा की चुत चाट रहा था.रेशमा भी आँखे बंद किये. चुत चटवाने का मज़ा ले रही थी. मगर तभी मेरी नज़र रसोई के बहार गयी. मैंने देखा. माँ मुझे रेशमा की चुत चाट ते हुए देख रही थी.वह हम दोनों को चुप के देख रही थी. शायद वह कुछ लेने आयी थी. मगर हम दोनों को देखकर वह वही रुक गयी. माँ वह से चली गयी. और मैंने भी रेशमा का पानी चाट चाट के निकाल दिया.

Moti bhabhi ki chudai ki kahani

फिर मैं बहार आ गया. माँ मुझे ही देख रही थी. मैंने उन्हें देखकर एक स्माइल किया. फिर हम सबने खाना खाया. खाना खाके मैं सिर्फ कच्छे में आ गया.और सिर्फ कच्छे पहने पहने मैं मूतने गया.

माँ की नज़र मुझपे ही थी. कुछ देर बाद रेशमा मेरे कमरे में आ गयी. रेशमा ने सिर्फ मैक्सी पहनी हुई थी. इससे पहेले रेशमा दरवाजा बंद करती. मैं उसे उठा के बेड पर ले आया. और अब हम दोनों नंगे हो गए. रेशमा मेरा लंड चूसने लगी.

फिर मैंने उसे घोड़ी बना दिया. और अपना लंड उसकी चुत में डाल दिया.मैं माँ को दिखने के लिए. कुछ जयादा ही तेज धक्के लगा रहा था. और रेशमा के मुँह से निकलती आठ अह्ह्ह उम् ममम की आवाज ने अपना काम कर दिया.

माँ जरूर रेशमा की आवाज सुन रही होगी. और इस आवाज से जरूर उनकी भी चुत गीली हो गयी होगी. रेशमा चुदाई कर वाके अपने कमरे में चली गयी. और मैं नंगा ही लेटा रहा. रेशमा को अभी भी बड़ा अजीब लगता था. कैसे वह माँ के रहते हुए. मुझसे चुदवाती थी. और माँ उससे कुछ नहीं कहती थी.

मेरा और रेशमा का रिश्ता अच्छा चल रहा था.और एक रात में दूकान बंद करके आया ही था. मैंने देखा माँ मेरे कमरे में जा रही है. मैंने सोचा यही मौका है. माँ को पीछे से पकड़ लूंगा. मगर तभी लाइट चली गयी.और मेरे लिए तो ये गोल्डन चांस था.

मैं जल्दी से अपने कमरे में गया. माँ बहार आ ही रही थी की तभी मैंने उन्हें पकड़ लिया. मेरा भाई भी घर आ चूका था.इसीलिए मैंने माँ के मुँह पर हाथ रख दिया. माँ ने इस बार मुझसे हटाने की कोशिस भी नहीं की. और मेरा एक हाथ माँ की चूचिया मसलने लगा.

मैं – बस थोड़ी देर करने दो. उसके बाद चली जाना.मैंने ये बात ऐसे कही की माँ यही समझे की मैं रेशमा से कह रहा हु. मगर असल में मैं ये बात माँ से कह रहा था. माँ की गांड में मेरा लंड घुसा जा रहा था. और मैं उनकी गांड दबा रहा था.

मैंने माँ की साड़ी के अंदर हाथ डाल दिया. और इस बार हाथ सीधा माँ की चुत पर ले गया. माँ की चुत पानी पानी हो रही थी. मैंने अपनी बीच वाली ऊँगली माँ की चुत में डाल दी. माँ वैसे ही खड़ी हुई थी. और फिर रेशमा ने बहार मोमबत्ती चला दी. और फिर मैंने भी माँ को छोड़ दिया. माँ जल्दी से बहार निकल गयी. और मैं अपने कमरे में ही लेट गया.कुछ देर बाद माँ मेरे कमरे में मोमबत्ती लेके आयी. उन्होंने मोमबत्ती टेबल पर रख दी. और फिर वह मुझे देखकर चली गयी.

Devar bhabhi ki chudai hindi mein kahani

कुछ टाइम तक सब ऐसे चल रहा था.और फिर वह टाइम आया. जब मैंने माँ को चोद दिया. बीच बीच माँ को भी गरम कर ही देता था. और वह इस अनजाने में थी की मैं उन्हें रेशमा समझ के ये सब करता हु.

रेशमा को कुछ दिनों के लिए आपने मायके जाना था. वह उसके किसी रिश्तेदार की शादी थी. बुलावा तो पुरे परिवार के लिए था. मगर घर छोड़ के और दुकान छोड़ के कोन जाता.

इसीलिए रेशमा और मेरा भाई निकल गए. मैंने तो माँ से भी जाने को कहा. मगर वह नहीं गयी. रेशमा के जाते ही मुझे उसकी याद आ रहा थी. और मैं दुकान में बैठा लंड मसल रहा था.तभी माँ मेरे लिए चाय लेके आयी. माँ ने साड़ी पहनी हुई थी. और उसका निकल हुआ पेट साफ़ दिख रहा था. मोठे पेट पर गहरी नाभि साफ़ दिख रही थी. और मैंने भी देर किये बिना अपनी ऊँगली नाभि में डाल दी.

माँ एक दम से चौक गयी और मुझे देखकर हसने लगी.

मैं – माँ आप बिलकुल रेशमा की तरह दिख रही हो. वह भी जब चाय देने आती है. तब मैं उसकी नाभि में ऊँगली डाल देता हु.

माँ – अच्छा अब अपनी माँ में भी तुझे वह रेशमा दिख रही

मैं – अरे नहीं माँ वह तो बस ऐसे ही हो गया. आपको बुरा तो नहीं लगा.

माँ – नहीं बेटा बुरा तो नहीं लगा. मगर अब बहु कुछ दिनों तक नहीं है तो थोड़ा सबर कर ले.

माँ की नज़र मेरे खड़े लंड पर गयी. शायद इसीलिए उन्होंने सबर वाली बात बोली. माँ चाय देके चली गयी. और फिर दोपहर को जब मैं दुकान बंद करके अंदर आया तो माँ किचन में खड़ी थी.

माँ बर्तन धो रही थी. और उनका धयान बिलकुल भी मेरी तरफ नहीं था. मैं हलके हलके पीछे गया. और फिर से उन्हें पकड़ लिया. जब भी मैं माँ को पकड़ता था.मेरे दोनों हाथ उनकी चूचियों को मसल देते थे. और इस बार भी मैंने उनकी चूचियों को मसल दिया. वह तुरंत पीछे मूड गयी. और मैं उन्हें देखकर हसने लगा.

मगर इस बार मैंने उनसे माफ़ी नहीं मांगी. और न ही उन्होंने मुझे कुछ कहा. रेशमा को गए 2 दिन हो चुके थे. और इस बीच कई बार में माँ की चूचिया मसल चूका था. और वह भी अब मुझे कुछ नहीं कह रही थी.

ऐसे एक दोपहर खाना खाने के बाद में अपने कमरे में लेटा हुआ था. तभी मैंने रेशमा को कॉल किया. रेशमा ने कॉल उठा लिया. और मैंने देखा तो वह बाथरूम में से बात कर रही थी।

रेश्मा – कैसे है भाई साहब? मेरी याद तो नहीं आ रही है.

मैं – क्या बताऊ रेशमा तेरी कितनी याद आ रही है? ये देख कैसे टांके खड़ा हुआ है.

Deshi bhabhi ki chudai kahani

मैंने रेशमा को अपना लंड दिखा दिया. मैं उससे तेज तेज बात कर रहा था. ताकि माँ मेरी बाते सुन ले. मैं बेड पर बैठा हुआ था. और मेरे कमरे का दरवाजा खुला हुआ था.

रेशमा बाथरूम में मुझे अपनी चुत दिखा रही थी. और मैं उसे अपना लंड दिखा रही था तभी मुझे लगा की मेरे दरवाजे के पास कोई खड़ा है. और वह कोई नहीं बल्कि माँ ही थी. अब मैं और भी जानकार लंड दिखा रहा था.

रेशमा – काश भाई साहब आप यहाँ होते तो मैं और आप इसी बाथरूम में मज़े करते होते.

मैं – अरे थोड़ा टाइम मेरे भाई को भी दिया कर.

रेशमा – अरे भाई साहब उन्हें रात में टाइम देती तो हु. मगर जब से यहाँ आये है. तब से बस रिश्तेदारों के बीच रहते है. और बस ड्रिंक करते है.मुझ पे तो धयान ही नहीं देते है. और एक आप है. अगर आप यहाँ होते तो मुझे इन सबके बीच भी चोद देते. आप अपने भाई से बहुत अलग हो.

मैं – अलग हु इसीलिए तो तुझे तबियत से चोदता हु. अपने भाई की सारी कमी पूरी कर देता हु.

रेशमा – बस भाई साहब मैं भी घर आने ही वाली हु. यहाँ फंक्शन ख़तम हुआ. और मैं आपके पास आ जाउंगी आप तैयार रहना.

मैं – मैं तो शुरू से तैयार हु. एक बार आ जा फिर देखना कैसे तुझे जन्नत की सैर करवाता हु.

रेशमा ने कॉल काट दिया. और माँ भी वह से निकल के चली गयी. मैंने बहार आके देखा तो माँ आपने बिस्टेर पर लेटी हुई थी. उनके साड़ी का पल्लू साइड में था.और माँ की चूचिया और उनका खुला हुआ पेट साफ़ दिख रहा था.

मैं माँ के पास जाके बैठ गया. और मैंने तुरंत हाथ माँ के पेट पर रख दिया. माँ ने मेरी तरफ देखा. और बिना कुछ बोले फिर से टीवी देखने लगी, मैं माँ के पेट पर हाथ फेर रहा था. और मेरी ऊँगली उनकी नाभि आस पास घूम रही थी.

मैं – माँ आप मुझसे नाराज हो.

माँ – नहीं बेटा ऐसे क्यों कह रहा है?

मैं – माँ पिछले कुछ दिन से मैंने आपके साथ कुछ हरकत की है. और मुझे लगता है आप उसी वजह से मुझसे नाराज हो.

माँ – बेटा नाराज नहीं हु. अगर नाराज होती तो तुझे पहले ही बता देती. बस जब भी तू मुझे ऐसे छूता है तो बड़ा अजीब सा लगता है.

मैं – माँ वैसे सच कहु. जब मैंने पहली बार छत पर आपकी ये चूचिया पकड़ी थी तो मैं भी सोच में पड़ गया था की रेशमा का साइज इतनी जल्दी बड़ा कैसे हो गया. मगर तभी पता चला वह तो आप थी.

माँ – है है है मतलब तू ये बात जान गया था. मगर फिर भी ये सब करता रहा.

मैं – अरे नहीं माँ बस ये समझ आया था की साइज थोड़ा बड़ा है. मगर ये नहीं मालूम था की वह आप है.

माँ – चल कोई बात नहीं बस इस बात का धयान रखना की ये बात किसी और को पता न चले. वैसे बहु भी आने ही वाली है.

मैं – हा माँ मैं अभी उसी से बात कर रहा था. वह आज शाम तक आ जाएगी. मगर माँ मैंने ये सोचा है की मैं रात में ये सब नहीं करूँगा. छोटा घर पर होता है तो बहुत अजीब लगता है.

देसी भाभी की चुदाई की कहानी हिन्दी मे

माँ – बेटा ये सब सही तो नहीं है. मगर बहु को देखकर लगता है की कमी तेरे भाई के अंदर ही है. अगर तू नहीं करता तो वह किसी और के साथ मुँह काला करती. मगर अब देख उसका काम भी हो रहा है. और तेरा भी.

मैं – है माँ आपने सही कहा. मुझे तो अब पता चला है की अकेला पन क्या होता है. मगर आप तो कब से अकेले हो. आप को कैसा लगता होगा.

माँ मेरी आँखों में देखने लगी. और वह समझ गयी की मैं क्या बात कर रहा हु. फिर मैं उठके अपने कमरे में चला गया.फिर शाम के टाइम माँ चाय बनाने लगी. और मैंने फिर से जाके माँ को पीछे से पकड़ लिया. मगर इस बार मेरे हाथ उनकी कमर पर थे. और मेरा लंड उनकी गांड में घुसा हुआ था.

मैं – अरे माँ डरो मत. मुझे पता ये आप हो.

माँ – बेटा तुझसे क्या डरना? जब तूने मुझे पकड़ा था. मैं तब नहीं डरी थी तो अब क्या डरूंगी? माँ को अब बिलकुल भी फरक नहीं पड़ रहा था. रेशमा और मेरे रिश्ते की वजह से माँ अब बिलकुल खुल चुकी थी.यहाँ तक की मेरा लंड माँ की गांड में घुसा हुआ था. तब भी उन्हें कोई फरक नहीं पड़ रहा था. मैंने काफी देर तक माँ की गांड में लंड घुसाए रखा. और फिर मैं जाके दुकान पर बैठ गया. माँ चाय लेके आयी तो मैंने फिर से उनकी नाभि में ऊँगली डाल दी. माँ हस के चली गयी.और शाम को रेशमा भी वापस आ गयी. अभी भी दुकान में बैठा था. रेशमा सब कुछ छोड़ के सीधे मेरे पास आयी. और मुझे बड़े रैक के पीछे ले गयी. हम दोनों किश करने लगे.रेशमा ने मेरा लंड पकड़ लिया. और उसके हाथ लगते ही वह खड़ा हो गया.

रेशमा – क्या बात है भाई साहब? लगता है आप भी मेरे लिए उतना ही तड़पे हो. जितना मैं आपके लिए .

मैं – हा रेशमा तड़पा तो बहुत हु. मगर ये टाइम सही नहीं है. और आज से रात में भी हम ये सब नहीं करेंगे. बस अब हम ये सब दिन में करेंगे.

रेशमा – ये क्या कह रहे है भाई साहब? अब तो माँ भी साथ है तो डरने की क्या बात है?

मैं – रेशमा उन्होंने ही मुझसे ये बात बोली है. ताकि हमारा रिश्ता अच्छे से चलता रहे.

तो दोस्तो कैसी लगी आपको ये कहनी आगे माँ को कैसे छोड़ा ये मैं आपको अगले भाग मे बतौयाग तब तक के लिए धन्यवाद ।

तो दोस्तो कैसी लगी ये लगी ये घर की कहानी आगे क्या हुआ ये मैं आपको अगले भाग 3 मे।

और इस कहानी का भाग 1 पढ़ने के लिए यहा क्लिक कर : भाभी और माँ की चुदाई एक साथ

हमारी वैबसाइट से चुदाई की मस्त कहानिया पढ़ने के लिए यहा क्लिक करे->www.antarvasnastory.in

Read More Sex Stories…

10 thoughts on “भाभी और माँ की चुदाई एक साथ 2

  1. Aadia K Aadia K

    Your stories are so nice.
    Kahani padty huye choot bhi gili ho jati . Mostly in bhabhi ki chudai.

    Reply
  2. Shshikant

    Such me yar muajhe to tumahare hi hai Kash meri maa hot hota to kitna mjha आता chod ke tumahare ma saez Mast hai yar kya gand hogi bhai ek bar dila do na plz bhai 3part kab ayega bhai mere watsapp par bhi bhej sakte ho kya plz bhai

    Reply
  3. Shshikant

    Such me yar muajhe to tumahare hi hai Kash meri maa hot hota to kitna mjha आता chod ke tumahare ma saez Mast hai yar kya gand hogi bhai ek bar dila do na plz bhai 3part kab ayega bhai mere watsapp par bhi bhej sakte ho kya plz bhai

    Reply
  4. ngentot

    I think the admin of this website is really working hard for his
    web site, for the reason that here every stuff is quality based material.

    Reply
  5. Jany

    This is my first time go to see at here and i am genuinely impressed to read all at one place.

    Reply
  6. Data Keluaran Sdy

    Wonderful web site. Plenty of helpful info here. I am sending
    it to a few pals ans also sharing in delicious.

    And of course, thank you on your sweat!

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *