हैलो दोस्तो, तो जैसा की आपने अभी तक इस hindi sex story पढ़ा के कैसे मैंने टाइटन्स से अपनी चुदाई करवाई थी और अब दोबारा भी चुदना चाहती थी. वही हाल उसका था और वही हाल अब मालकिन का भी हो गया था. क्युकी उनके सामने टाइटन्स का परफॉर्म न करने का ड्रामा नहीं चला. अब पढिए आगे.
अगली सुबह मैं मालकिन को बोलकर निकल गयी के
मैं टाइटन्स को वैद जी के पास लेकर जा रही हु.
तो मालकिन ने भी भेज दिया. मैं उसके साथ उसके घर पर आ गयी.
और आते ही मैं नंगी हो गयी और उसको भी नंगा कर दिया.
मैं उसको ऐसे चुम रही थी के जैसे आगे ये मुझे कभी मिलेगा ही नहीं.
और मेरे निप्पल्स टाइट हो रहे थे और मेरी चुत गीली हो रही थी.
मैं बहुत हॉर्नी फील कर रही थी. किश करते हुए उसका लंड मेरी चुत पर टिक गया.
उसको अपनी दोनों टांगो के बीच में ले लिया और चुत से सटा दिया।
करते करते ही आगे पीछे होने लगी. टाइटन्स का लंड पत्थर जैसा हार्ड हो रखा था.
मैं उसको महसूस कर रही थी. फिर मैं घुटनो पर बैठ गयी और उसके लंड को निहारने लगी. और फिर उसके लंड के सुपडे को लोल्लिपोप की तरह चूसने लगी.
मैंने आज से पहले उसका लंड नहीं चूसा था तो उसके लिए ये बिलकुल नया एहसास था.
मैं एक हाथ से पीछे से उसका लंड हिलाती और आगे से उसका सूपड़ा मुँह में लेकर उस पर जुबां फेरती.
टाइटन्स को पूरी तरह से जोश चढ़ गया था. उसने मेरा सर पकड़ लिया और अपने लंड को मेरे हलक में उतारने लगा. मैंने
ओरगा के लंड से प्रैक्टिस कर ली थी तो मैं टाइटन्स को पूरा मज़ा दे रही थी.
जबकि मेरा गला दुःख रहा था उसके लंड लगने से लेकिन उस समय मेरे दिमाग में “बस टाइटन्स को मज़े देने ही ही चल रहा था. tight chut ki chudai
टाइटन्स कभी एकदम बहार निकलकर फिर अंदर डाल देता.
तो कभी वह मेरे मुँह में ही डाले डाले मेरा मुख चोदन करता. उसको बहुत मज़ा आ रहा था. फिर उसने मुझे ऊपर उठाया और मेरा मुँह साफ़ किया जो की थूक से साद गया था.
फिर उसने मुझे दोबारा किश करना स्टार्ट कर दिया.
और किश करते करते ही बेड पर लिटा दिया.
फिर किश करता करता ही निचे मेरे चुचो पर आ गया और उनको खूब मसला.
फिर निप्पल्स नोचे और फिर चूसने लगा.
मेरी चुत नदिया बहा रही थी और वह एक हाथ से मेरी चुत पर भी अपनी उंगलिया मसल रहा था. मैं बहुत गरम हो राखी थी.
हम दोनों पसीने में लत्त पत् हो रखे थे.
फिर वह आखिर में मेरी चुत पर आ गया और उसको चाटने लगा.
मैं तो सातवे आसमान पर पहुंच गयी थी. जब पहली बार टाइटन्स ने मेरी चुत चाटी थी
तब मुझे थोड़ी गुदगुदी हो रही थी. लेकिन अब तो असीम आनंद की प्राप्ति हो रही थी.
मैं उसके बालो को पकड़कर उसके मुँह को अपनी चुत पर लगा रही थी.
मुझसे कण्ट्रोल नहीं हुआ और मैं थोड़ी ही देर में झड़ गयी.
अब टाइटन्स उठा और उसने अपने लंड पर थूक लगाया.
देर न करते हुए सीधा मेरी चुत के पास ले आया. मुझे अपनी पहली चुदाई याद आने लगी.
मुझे लगा अभी भी वैसा ही दर्द होगा मुझे लेकिन जैसे ही उसने अंदर डाला.
मुझे दर्द तो हुआ लेकिन साथ के साथ मज़ा भी आया.
ऐसा फील होने लगा के जैसे मैं उस दर्द को फील करती रहू .
उसने हलके हलके करके अपना पूरा लंड मेरी चुत में घुसा दिया.
उसके थोड़ी देर तक मेरा दर्द पूरी तरह से ख़तम हो गया और मैं चुदाई के मज़े लेने लगी. मुझे ऐसा लग रहा था के अगर मैं आज मर भी जाऊ तो मुझे अब कोई ग़म नहीं.
इतना मज़ा मुझे पहले कभी किसी भी चीज़ में नहीं आया था. उसका लंड जैसे ही बहार जाता तो उसको अंदर डालने के लिए मैं भी अपने आप को हिलाने लगती.
अब मैं उसके ऊपर चढ़ गयी और उसके लंड की सवारी करने लगी. टाइटन्स को लग रहा था मैं उसको मज़ा दे रही हु लेकिन मुझे खुद भी हद्द से ज़्यादा मज़ा आरहा था.
मैं ये चाह रही थी के बस वह मुझे चोदता ही रहे और मैं फिरसे झड़ने वाली होने लगी.
तो मैंने जैसे ही उसको बोला के “मैं झड़ने वाली हु.”
तो उसने भी निचे से तेज़ झटके मारने शुरू कर दिए और हम दोनों एक साथ झड़ गए.
मुझे ये ध्यान ही नहीं रहा उस समय के मुझे ज़िन्दगी भर के लिए वर्जिन रहना है.
अब जब टाइटन्स के लंड का माल मेरी चुत के अंदर था तो मेरी वर्जिन रहने की पॉसिब्लिटी दुसरो के सामने कम ही थी.
मैं परेशान होने लगी तो टाइटन्स ने बोला के “मैं वैद जी से तेरी दवाई ले आता हु तू महल जा और परेशान मत हो.”तो
मैं महल वापस आ गयी और मालकिन को बता दिया के मैंने टाइटन्स को दवाई दिला दी है.
फिर रात में टाइटन्स से मिलने मैं वापस गयी और उसने मुझे एक बूटी दे दी. उसको खाने से थोड़ा नशा तो होता था लेकिन मैं प्रेग्नेंट नहीं होंगी इसकी भी गॅरंटी थी.
मैं वह खाकर मालकिन के पास वापिस आ गयी. मालकिन उस समय शराब पी रही थी और उन्होंने ओरगा को बुलाया हुआ था. मुझे भी हल्का हल्का बूटी का नशा होने लगा था. और उससे मैं हॉर्नी भी होने लगी थी.
ओरगा भी आ गया और आकर नंगा हो गया. मालकिन ने मुझे आर्डर कर दिया उसका लंड चूसने के लिए. मैं उसके लंड के आगे जाकर बैठ गयी. तब मेरा हल्का हल्का सर घूम रहा था नशे की वजह से.
लेकिन फिर उसने मेरे बालो को पकड़ कर मेरा मुँह चोदने लगा और मेरा सर पूरी तरह से हिलाने लगा. जिससे मुझे बहुत तेज़ नशा चढ़ने लगा.
और मैं मदहोश होने लगी. मैं उसका लंड चूसते चूसते ही अपनी चुत में ऊँगली करने लगी. तभी मालकिन ने ओरगा को अपने पास बुला लिया और उससे पहले अपनी चुत चटवाई और फिर अपनी चुदाई करवाने लगी.
तभी मैं नशे में ही बोल पड़ी. मैं: मुझे भी अपनी चुत में लंड लेना है.मालकिन ने जैसे ही मेरी ये बात सुनी तो चुदाई रोक दी और मुझसे बोली.
टाइटन्स ने मालकिन की चुत का भोसड़ा बनाना स्टार्ट कर दिया.
मालकिन: क्या बोली तू? मैं: कुछ नहीं मालकिन.मालकिन: नहीं बता क्या बोली तू.मैं नशे में थी लेकिन थोड़े बहुत होश थे तो मैं बोल पड़ी.
मैं: काश मैं भी लंड ले सकती अपनी चुत में.
मालकिन: नहीं ले सकती. चूसने दे रही हु काफी समझ ले वरना रंडी की ज़िन्दगी जीनी पड़ती तुझे समझी.
मैं: माफ़ करना मालकिन.
काम कर नेमेरिअ जाकर एक रंडी को बुलाकर ला. मैं रंडी को बुला लायी. मालकिन ने ओरगा को उसको चोदना के लिए बोली . तो ओरगा उसको चोदना लगा.
और मालकिन ने मुझे बोला के मैं उनकी चुत में ऊँगली करू.
मैं उनकी चुत में ऊँगली करने लगी. Ttight chut ki chudai
जैसे जैसे ओरगा उस रंडी को चोदता वैसे वैसे ही मैं उनकी चुत में ऊँगली करती.
मैं भी चुदासी हो राखी थी.
मुझे भी अब लंड चाहिए था. टाइटन्स के लंड ने मुझे चुदाई का चस्का लगा दिया था.
फिर मालकिन झड़ गयी तो
उन्होंने उन्दोनो को यानी ओरगा और रंडी को बहार भेज दिया.
और खुद नहाने आ गयी. मैं भी मालकिन के साथ नाहा ली उनको नहलाते नहलाते ही.
और फिर मालकिन अपने बिस्तर पर सो गयी और मैं अपने कमरे में आकर.
सुबह में मालिक भी वापस आ गए. फिर सबकुछ नार्मल हो गया. मालकिन बस अब अपने पति से ही चुदती थी.
लेकिन मुझे जब भी मौका मिलता था मैं टाइटन्स से चुदवा लेती थी. लेकिन अब मैं हमेशा उसका लंड बहार निकाल देती थी जब वह झड़ने वाला होता था.
आगे कहानी में क्या हुआ ये पता लगेगा अगले भाग 9 में तब तक के लिए.
धन्यवाद!
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