Bahar Wali Bhabhi Ki Chudai ki kahani:-हैलो दोस्तो, कैसे हो आप सब , तो दोस्तो जो भी ये भाग पहली बार पढ़ रहे हो उनसे कहूंगा की वह भाग 1 से पढे ताकि कहानी का पूरा मज़ा ले सके. आप अपनी ओपिनियन मुझे कमेंट कर दे सकते दे सकते है, मैं फिर अपने दोस्त के यहा से चल दिया फिर मेरे दोस्त ने बताया की बस स्टैंड से आप काही की भी बस ले सकते हो
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कुछ 5 मिनट और वेट किया और फिर लो आ गयी मेरी बस. देख के खुश भी हुआ की अब घर जल्दी जाऊंगा स्वाति के पास.और साथ ही उदास भी क्यों की बस में कोई भी सीट खाली नहीं दिख रही थी. पर कुछ ज़्यादा सोचा नहीं और चढ़ गया उसमे. भीड़ इतनी ज़्यादा भी नहीं थी बस में. बैठने को भले जगह नहीं थी पर खड़े रहने को आराम से थी. सफर कुछ भी नहीं तो आधे घंटे का था.शाम के ट्रैफिक में शायद ज़्यादा भी लगता.

कुछ दस मिनट बाद बस अगले स्टॉप पहुंची जहा कुछ लोग चढ़े खड़े खड़े करता क्या यूं ही बस के सामने खड़ी लड़कियों को पीछे से कभी कभार घूर लेता. उनमे से एक पीछे से मस्त लग रही थी.पर कंधे की चौड़ाई से साफ़ लग रहा था की वह कोई जवान नहीं कुछ नहीं तो 28-30 की तो होगी ही.. मुझसे 3 या 4 इंच लम्बी थी. बदन सुडोल था लेकिन अच्छे से मेंटेन की हुई थी. काला रंग की फुल टाइट पैंट में अच्छी लग रही थी.हाथो के रंग से पता चला की अच्छी खासी गोरी भी है खुले बाल लम्बा कद बिलकुल पाटका मैडम लग रही थी.
पीछे से उसके टाइट पैंट में कसी हुई सुडोल गांड बस में मौजूद हर मर्द की आँखों को आकर्षित कर रही थी मन तो हो रहा था की उसके पास जाकर पीछे खड़ा हो जाओ और उसकी गांड पर हाथ फेरु.पर नहीं अपना शहर नहीं था कही पिट न जॉन पागलपन में. कुछ 10 मिनट के बाद एक और स्टॉप आया जहा कुछ लोग उतर गए. साथ ही सीट में बैठी कुछ महिलाये भी तो अब जाकर उसे भी सीट मिल गयी. और तब जाकर मुझे मौका मिला उसके हसीं चेहरे को देखने की.क्यों की वह उस फ्रंट वाले सीट पर थी जो बस में पीछे के तरफ फेस करती है. कितनी गोरी और खूबसूरत थी. भले उसकी गांड देख के मारने का मन किया पर शकल देखते ही प्यार करने का मन हो गया.इसी बीच में उसे देखता रहा बार बार और भूल गया की मैं एक पब्लिक बस में हूँ. और तब होश में आया जब उसने मुझे उसे देखते हुए देखा. Bahar Wali Bhabhi Ki Chudai ki kahani:
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उसने मुझे देखा और गुस्से से खिड़की के बहार देखने लगी. मानो मन ही मन कह रही हो ‘ना जाने कहा से ये ताड़ने वाले कुत्ते बस में घुस जाते हो’.ये देख मैंने भी नज़र हटा दी. पर दिल तो बच्चा है जी. बार बार किसी न किसी बहाने उसे देखने लगा और अनजाने में कभी कभार वह भी देख लेती मुझे उसे देखते हुए. फिर उसने अपनी मोबाइल निकाली और उसमे कुछ कुछ करने लगी. साथ ही वह भी बार बार इधर उधर देखते हुए कभी कभी मुझे उसे देखते हुए देख लेती.
उसके नोखिली नाक पे जब गुस्सा उमड़ता था तो भी वह कितनी खूबसूरत लगती थी. पर अब वह मेरे तरफ देख ही नहीं रही थी. तभी उसने अपने मोबाइल पे कुछ देखा और झट से मेरी तरफ देखने लगी. मैंने झट से नज़र हटा दी. फिर देखा तो वह किसी को शायद टेक्स्ट कर रही थी और फिर उसके चेहरे पे मुस्कान आ गयी.शायद उसके बॉय फ्रेंड या भगवान् न करे उसके हस्बैंड हो जिसका का मैसेज था या कुछ और.
उसके चेहरे की मुस्कान पर तो में जान देने को तैयार था. फिर वह खिड़की के बहार देखि और अपने बालो के साथ उंगलियों से खेलने लगी. मैं तो बस उसे अपनी दुनिया में खोई हुई देख खुश था.पता नहीं शायद ऐसा लग रहा था की उसके चेहरे से प्यार हो गया हो.तभी उसने अचानक से मुझे देखा और एक छोटी सी मुस्कान देती हुई फिर से खिड़की से बहार देखने लगी. मैं तो जैसे दंग रह गया की भला वह मुझे देख मुस्कुरायी क्या?
मैं अपने पीछे देखने लगा की कही वह किसी और को देख तो नहीं मुस्कुरायी.पर मेरे पीछे कोई भी ऐसा नहीं था और फिर मैंने उसे देखा. मुझे पीछे मूड कर देखते हुए उसने देख लिया. वह हस्स पड़ी अपने मुँह को अपने हाथ से छुपाते हुए और अपने मोबाइल को देखने लगी. शर्मिदगी भी हुई साथ ही ख़ुशी भी की शायद मेरे कारन उसके चेहरे पर हसी तो आयी.अब मुझमे थोड़ी हिम्मत आने लगी. मैं उसे देखने लगा ये सोचते हुए की अगर अब वह मुझे देखे तो में उसे एक मुस्कराहट ज़रूर दूंगा. इतने में उसने मुझे देखा और मैंने मुस्कुरा दिया.
और भगवान् कसम मनो दुनिया मिल गयी जब उसने भी वापस एक मुस्कराहट दे डाली.वह अब मुझे कभी कभार ऐसे देखती मानो चाह कर नहीं देख रही हो. और साथ ही कभी कभी अपने होठो को काट देती. क्या वह जान बच कर मुझे पागल कर रही थी या क्या. समझ ही नहीं आ रहा था. ये सिलसिला कुछ 10 से 15 मिनट चलता रहा और तब देखा तो लो मेरा स्टॉप आने लगा.मन तो था की उतरु नहीं और चलते जाओ और मन में ठान भी लिया था की नहीं उतरूंगा. चाहे देर ही क्यों न हो वापस स्वाति को देखने जाने के लिए. पर मैं उसे और उसकी मुस्कराहट भरे खेल को छोड़ कर जाना नहीं चाहता था.
तभी देखा की वह सीट से उठ गयी और बस से निकलने के रह पर दूसरी महिलाओ के साथ खड़ी हो गयी.है भगवान् क्या ये भी यही उतरने वाली थी? यानि के ये मेरे स्टॉप के पास ही कही रहती है? ये सोच में तो बस ख़ुशी से पागल ही हो गया. जल्द ही बस रुका और मैं उतर गया और साथ ही साथ वह भी. बस स्टॉप से अपार्टमेंट एक 10 मिनट चलने के रस्ते पर था.पता नहीं क्यों आज शायद मेरा किस्मत रंग ला रही थी जो उसने भी वही रास्ता लिया जहा से मुझे अपार्टमेंट को जाना था. कुछ 4-5 मिनट आगे चलने के बाद रस्ते पर सिर्फ हम दोनों ही थे. Bahar Wali Bhabhi Ki Chudai ki kahani:
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वह मेरे आगे और मैं उसके पीछे. उसकी चालक्या क़यामत भरी थी.दीपिका पादुकोण के तरह उसके लम्बे सुडोल पैर क्या कैट वाक दे रही थी. इतने में थोड़ी सी मुड़ी और मुझे देखि. ये देख झट से मैं घबरा कर रुक गया. उसने मुझे एक नखरे भरे गुस्से से देखा और पूछी: क्या तुम मुझे फॉलो कर रहे हो?मैं: क्या?वह: हाँ तुम मुझे! क्या तुम मुझे फॉलो कर रहे हो?”मैं: नहीं! नहीं मैं तो बस अपने रस्ते…वह मुझे टोकते हुए बोली: शट उप सब पता चल रहा है देखा था बस में तब से घूर रहे हो और अब पीछा कर रहे हो.मैं तो बस खड़ा था की भला कैसे समझों की मैं उसका पीछा नहीं और वह मेरे रस्ते में आगे जा रही है.मैं: नहीं ऐसा कुछ नहीं है आपको गलत लग रहा है मेरे घर को जाने का रास्ता ही यही है.
वह: अच्छा ज़रा बताना यहाँ से इस रस्ते कहा पहुंचोगे?मैं: यहाँ से तो मेरे अंकल का अपार्टमेंट आता है. मैं वही रहता हूँ.वह: अच्छा? तुम्हे बता दूँ की मैं वही रहती हूँ ओके! और आज तक तुम्हे नहीं देखा. मैं यहाँ नयी नहीं हूँ! सोचलो ओके. अभी फ़ोन करू पुलिस को?मैं: अरे पर क्यों? मैंने क्या किया?वह: पता नहीं? तुम मेरा पीछा कर रहे हो.
मैं: वह मैं कल ही आया हूँ. मैं वह मूर्ति अंकल के यहाँ आया हूँ.वह: मूर्ति? हम्म्म्म……..मैं: हाँ मर मूर्ति. ओके स्वाति को तो आप जानते होंगे शायद?वह: स्वाति? हाँ उसे जानती हूँ. तुम उसके घर? मतलब कोन हो उसके?मैं: मैं उसका कजिन भाई हूँ. मूर्ति अंकल मेरे मां है.वह: ओह ओके ओके! ठीक है. पहले बताना था ना.मैं: अरे मैडम आपने मौका ही कब दिया आप तो पुरे गुस्से में भड़क उठी.वह: सॉरी वह तुम बस में भी मुझे घूर रहे थे तो मुझे लगा तुम यहाँ मेरा पीछा करके मेरे घर का पता वगैरा लगाने के लिए उतरे हो. सॉरी.मैं: कोई बात नहीं अच हुआ अपने पुलिस बुलाने से पहले ही मुझसे बात कर ली वरना मैं तो खेमका पुलिस से पिट जाता.ये सुन कर वह हस्स पड़ी क्या खूबसूरत हसी थी.
उसने फिर कहा: ओके मेरा नाम श्रद्धा है. मैं वही रहती हूँ 14 फ्लोर पे.मैं: ओह ओके जान कर ख़ुशी हुई और मिल कर भी. यादगार मुलाकात रहेगी मेरे लिए तो.श्रद्धा: है है है! हाँ वैसे तुम्हारी ही गलती है मैं क्या करू?मैं: बस एक महिला को यहाँ देखना इतना बड़ा क्राइम है मुझे पता नहीं था.इतना कहते हुए हम साथ चलने लगे अपार्टमेंट को.श्रद्धा: देखना क्राइम नहीं है पर घूरना और फिर जो हुआ जैसे मनो तुम पीछा कर रहे हो वह तो क्राइम ही है. मुझे क्या पता था तुम भी अपार्टमेंट से हो.मैं: ओके कोई बात नहीं इसी बहाने आपसे दोस्ती तो हुई.श्रद्धा: दोस्ती? किस्से? Bahar Wali Bhabhi Ki Chudai ki kahani:
मैंने कब तुम्हे दोस्त बनाया?मैं: नहीं मेरा मतलब बात करते करते शायद बन जाये.श्रद्धा: तुम तो बड़े चालू किस्म के हो. अब प्लीज नंबर मत मांगने लग जाना.मैं: अरे नहीं नहीं मैडम मैं उस किस्म का नहीं हूँ.श्रद्धा: तो किश किस्म के हो? देखा मैंने कैसे लड़कियों को घूरते हो बस में.मैं: उफ़ आप तो उसी बात को पकड़ के बैठ गए हो. अगर पता होता की आप इसी अपार्टमेंट की हो तो नहीं घूरता.श्रद्धा: ओहो तो अगर नहीं होती तो घूरते?
मैं: अरे मेरा मतलब मैं सच मे घूर नहीं रहा था बस कभी कभी नज़र मिल जा रही थी.श्रद्धा: हाँ हाँ कभी कभी. देखा मैंने. अच्छे से ताड़ रहे थे मनो आँखों में क्ष-रे विज़न लगा हो. वैसे करते क्या हो तुम?मैं: मत पूछिए बुरा वक़्त चल रहा है.श्रद्धा: क्यों?मैं: मैं यहाँ जॉब खोजने आया हूँ. कल ही एक इंटरव्यू दिया पर लगता नहीं किस्मत साथ देगी. उसी लिए आज एक अपने स्कूल के दोस्त से मिलने गया था. उसने कहा वह कुछ हेल्प कर देगा.श्रद्धा: कोई बात नहीं मिल जायेगा. डॉन’टी वोर्री. बड़े शहर में स्ट्रगल भी उतना ही होता है.
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तभी श्रद्धा का फ़ोन बजा उसने कॉल अटेंड किया और बात करने लगी…श्रद्धा: हेलो?……श्रद्धा: हाँ पहुँचने वाली हूँ.……..श्रद्धा: हाँ ओके ठीक है. बाई.बस इतनी सी बात करने के बाद उसने कॉल कट की और फिर मुझसे बोली: हाँ क्या बोल रहे थे सॉरी.मैं: कुछ नहीं आप ही बोल रहे थे यहाँ स्ट्रगल करना पड़ेगा करके.श्रद्धा: हाँ अमित शहर जितना बड़ा उतना ही वह स्ट्रगल भी होता है.मैं: हाँ वह तो सही कहा आपने गांव में तो एक डिग्री मिल जाये बस काम लग जाती है पर पैसे काफी काम मिलते है… एक! एक मिनट आपको मेरा नाम कैसे पता.
(मुझे तब याद आया की मैंने तो इसे अपना नाम बताया ही नहीं अब तक.)श्रद्धा: क्या? ओह ओके ओके तो तुम्हारा भी नाम अमित है क्या? वह गलती से बोल दी.मैं: गलती से एकदम सही नाम?श्रद्धा: वह मैं एक लड़के को जानती हूँ जो तुम्हारे तरह दीखता है उसका नाम भी अमित ही है. उसका नाम अमित है. ओके!मैं: क्या इत्तिफाक है बिना बताये आप मेरा नाम भी जान गयी.इतने में मेरा फ़ोन बज उठा. देखा तो स्वाति का कॉल आ रहा था.
मैं खुश हो गया की शायद वह मेरा बेसब्री से इंतज़ार कर रही हो. शायद अंकल आंटी घर पर न हो या हुआ तो भी क्या ये सब सोचते हुए मैंने कॉल अटेंड किया.मैं: हेलो!स्वाति: हेलो अमित! कहा हो?मैं: बस यही अपार्टमेंट के पास. अभी आ ही रहा था.स्वाति: तुम्हारे पास घर की चाबी है क्या?मैं: नहीं क्यों?स्वाति: वह मैं अपने फ्रेंड के यहाँ हूँ उसकी बर्थडे पार्टी है मैं लेट आउंगी. माँ डैड भी घर पर नहीं है.मैं: क्या! तो मैं अब क्या करूँगा?स्वाति: मुझे लगा तुम अभी भी अपने फ्रेंड के साथ होंगे तो वही रुकने को बोलने के लिए कॉल की थी. Bahar Wali Bhabhi Ki Chudai ki kahani:
मैं: पर मैं तो यहाँ पहुँच भी गया. अब क्या करू?स्वाति: सॉरी यार वापस आने से पहले एक बार कॉल करते न?मैं: लो बुरे फसे. कब तक वापस आएंगे अंकल आंटी? या तुम?स्वाति: उनका तो पता नहीं वह बोले शायद कल सुबह. मुझे भी लेट होगा शायद 11 या 12 बज जाये.मैं: क्या?? अभी तो 7 ही बज रहे है. तब तक मैं क्या करू?स्वाति: एक काम करो वह अपार्टमेंट में जिम है पार्क के पीछे छोटा सा बार एरिया भी है तुम वह कही वक़्त काट लो. जब मैं आउंगी तो कॉल कर दूँगी .मैं: पर…स्वाति: पर वहा कुछ नहीं जाने से पहले ये सब पूछ के जाना चाहिए न?
मैंने सोचा की उसी के घर आकर अब उस पर गुस्सा क्या करना और इसी लिए मैंने कहा: ओके पर थोड़ी जल्दी हो सके तो आना प्लीज.स्वाति: ओके बाबा. ओके रखती हूँ बाद में बात करते है बाई.इतना कहते हुए उसने फ़ोन काट दी. ऐसा लग रहा था मनो दिल तो टूटा ही साथ ही घबराहट की अब में इस जगह बेघर पड़ा था.
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मेरे उतरे हुए शकल को देख श्रद्धा ने पुछा: क्या हुआ अमित? कुछ प्रॉब्लम है?मैं: ना कुछ ख़ास नहीं.श्रद्धा: तो मुँह क्यों उतर गया तुम्हारा? किसका ऐसा कॉल आया?मैं: कुछ खास नहीं स्वाति का कॉल था.श्रद्धा: तो? उसने ऐसा क्या कह दिया?मैं: यही की अभी घर पर कोई नहीं है और मैंने चाबी भी नहीं लिया.श्रद्धा: अच्छा तो अब क्या करोगे?अब तक हम अपार्टमेंट के गेट तक पहुँच गए थे.
मैं: उसने कहा की यहाँ जिम वगैरा है और कही पार्क के पास कोई बार है वह वेट करने को.श्रद्धा: हाँ वह वह बी ब्लॉक के पीछे पार्क है उसी के पास. अच्छी जगह है. तुम वह वेट कर सकते हो. वैसे कब तक आएगी वह?मैं: हम्म्म क्या बताऊँ उसने कहा अंकल आंटी कल सुबह आएंगे और स्वाति को आने में 11 से 12 बज जायेंगे.श्रद्धा: ओह तुम तो बुरे फसे. एक काम करो वह जाकर दो बियर पीलो टाइम कट जायेगा. सॉरी तुम पीते तो होना?मैं: हाँ पीटा तो हूँ कभी कभार पर जेब में पैसे हो तो न. काश कही नौकरी लग जाती तो कही और आराम से रह लेता.
श्रद्धा: उदास मत हो.मैं: हम्म्म ठीक है मैं पार्क में वेट कर लूँगा. आपसे बात कर के ख़ुशी हुई.श्रद्धा: हाँ मुझे भी स्वाति आये तो उसे मेरा हैलो बोल देना.मेरे मन में था की श्रद्धा से बोलू की प्लीज रुक जाओ प्लीज मुझे छोड़ कर मत जाओ पर वह तो मेरे मन की बात थी ऐसे थोड़ी न बोल सकता था की तभी एक दो कदम आगे जाने के बाद शरदः पलटी और बोली: वैसे तुम खाओगे क्या? स्वाति तो 12 तक आएगी.मैं: पता नहीं. कुछ खा लूंगा.श्रद्धा: अगर तुम चाहो तो मेरे घर चलो.
खाना खा लो और फिर यहाँ आकर वेट कर लेना.उसकी इनविटेशन को सुन दिल ख़ुशी से पागल हो गया पर फिर सोचने लगा की ये क्या मुझे इतना बेबस समझती है और इसी ऐटिटूड में मैंने न कह दिया इसपर उसने कहा: ओफ्फो अब चलो स्वाति मेरी अच्छी फ्रेंड भी है तुम उसके भाई तो तुम मेरे फ्रेंड नहीं पर फ्रेंड जैसे हुए न सो चलो.इतना कहने पर मैंने सोचा की श्रद्धा का मन कितना अच्छा है और बोलै: ओके अगर आपको कोई प्रॉब्लम न हो तो. Bahar Wali Bhabhi Ki Chudai ki kahani:
श्रद्धा: मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं तुम चलो किसी से मिलाऊँगी भी.मैं: कोन?श्रद्धा: चलो तो.इतना कहने के बाद हम चलते रहे और लिफ्ट में घुस कर 14 फ्लोर के लिए बटन दबा दी. कुछ देर में हम 14 फ्लोर पहुंचे और आगे चलने लगी. मैं उसके पीछे पीछे चलते हुए बस उसके मटकती पतली कमर को देख चलता रहा.
उसका – का डोर ओपन करते ही हम अंदर घुसे.तो देखा की एक छोटा बच्चा कुछ उम्र 7 से 8 साल का होगा दौड़ कर आकर श्रद्धा के पैरो से गले लग जाता है. श्रद्धा उसे अपने गोद में उठा लेती है और कहती है: मेला लजा बेटा दीद यू मिस में?ये सुन मैं हैरान हो जाता हूँ की इसका कोई बेटा भी है.
या तो इसकी नाबालिक उम्र में शादी हुई होगी या तो क्या खूब खुद को मेंटेन की हुई है. तभी श्रद्धा मेरे तरफ मुड़ी और बोली: अक्षुण ही बोलो अमित अंकल को आक्षुण: ही अंकल.मैं: ही बेटा कैसे हो?अक्षुण शरमाते हुए श्रद्धा के कंधे में अपना मुँह छुपा लेता है. इसके बाद हम तीनो घर के अंदर जाते है घर को काफी अछि तरह से मेंटेन किया हुआ था.
मैं घर को इधर उधर देखने लगा तभी श्रद्धा ने कहा: तो अमित ये है अक्षुण मेरा बेटा. इसी से मिलाने की बात कह रही थी.मैं: काफी क्यूट है. किस क्लास में है ये?श्रद्धा: अभी 1 क्लास को जाने वाला है बहुत बदमाश है. इसे सीधा साधा मत समझना. एक बार गले पढ़ जाये तो फिर खैर नहीं. बहुत शरारती है.
मैं: क्या बात कर रहे है आप बच्चे तो प्यारे होते है भला क्यू न चाहे की ये गले पड़े.मेरे ऐसे कहने पे श्रद्धा काफी खुश हो गयी थी और फिर अक्षुण से बोलने लगी: तो अक्षम होमवर्क किया?अक्षुण: यस मम श्रद्धा: वैरी गुड बेबी. चलो अंकल के साथ टीवी देखो तब तक में तुम्हारी फेवरेट मग्गी बना देती हूँ ओके.अक्षुण: येअहहह!! मग्गी.अक्षुण दौड़ कर जाकर सोफे पर बैठ जाता है और टीवी में कार्टून देखने लगता है.श्रद्धा: तुम चाहो तो उसके साथ बैठ कर थोड़ी बाते कर लो.
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मैं जल्द से कुछ बना देती हूँ अभी के लिए बाद में डिनर बना दूंगी.मैं: अरे नहीं अभी वैसे भूख नहीं लगी है. कुछ बनाने की उतनी ज़रुरत नहीं. बस टाइम कट जाये वही काफी है.श्रद्धा: अरे नहीं अक्षुण को इस वक़्त भूख लगती है तो कुछ न कुछ खाने को ज़रूर बनाती हूँ.इतना कहते हुए वह अपने रूम को गयी और फिर किचन को. में थोड़ी देर के लिए सोफे पे बैठा रहा और फिर सोचा की श्रद्धा अकेले किचन में काम कर रही है तो थोड़ा हाथ बटा दूँ और फिर मैं उठ कर किचन को चला गया.वह मझु देखि और बोली: अरे तुम यहाँ क्या करने आये? वही बैठो मैं मग्गी बना रही हूँ. अभी लाती हूँ. Bahar Wali Bhabhi Ki Chudai ki kahani:
मैं: नहीं बस सोचा आपकी थोड़ी हेल्प कर दूँ.श्रद्धा: है है है!!भला मग्गी बनाने में क्या हेल्प करोगे. इसे पानी में ही तो उबालना है बस. सब समझती हूँ.मैं: क्या मतलब क्या समझते हो आप.श्रद्धा: यही की बस में घूर कर जी नहीं भरा है है है!!मैं: अरे ऐसा कुछ नहीं है. लो नेकी का तो ज़माना ही नहीं रहा इस शहर में.श्रद्धा: है है है!! बड़े आये नेकी वाले.
जल्दी से मैं ये बनाके तुम दोनों को दे देती हूँ फिर मुझे थोड़ा काम है.मैं: क्या काम है बोलिये मैं हाथ बटाने को तैयार हूँ.श्रद्धा: है है है!! नहीं नहीं तुम नहीं कर सकते हेल्प उसमे. कही भी कुछ भी बोल देते हो.मैं: क्यों क्या काम है. मुझे खाना बनाना आता है एक मौका तो दो. फिर देखना क्या मस्त खाना खिलता हूँ.
श्रद्धा: अरे मैं नहाने की बात कर रही हूँ है है है!! बोलो हाथ बतऔगे? है है है!!मैं: ओह सॉरी वैरी सॉरी.ये बोल बस चुप हो गया.फिर वह उबले पानी में मग्गी डालने लगी और इस बीच में चुप खड़ा रहा कोई बेवकूफी न बोलने से अच्छा सोच कर. पर फिर मन में सोचने लगा की जब उसने पुछा की हाथ बताओगे नहाने में तो हाँ बोल देना चाहिए था. तभी उसने मुझसे पुछा.श्रद्धा: और बताओ कितने कम्पनीज में तरय किया?
मैं: अभी तो कल एक ही कंपनी गया इंटरव्यू के लिए. आज दोस्त से मिला तो उसने रिफरेन्स देने की बात की है.श्रद्धा: ओके तब तो मिल जाएगी.मैं: हाँ पर रिफरेन्स मिले तो न. पता नहीं कब तक इंतज़ार करना पड़े. यहाँ तो हर चीज़ इतना महंगा है. ज़्यादा दिन नहीं चल पाउँगा.श्रद्धा: हम्म्म! ओके अगर तुम्हे ऐतराज़ नहीं तो मैं थोड़ी हेल्प कर दूँगी.
मैं: वह कैसे? क्या आप किसी कंपनी में रिफरेन्स दे सकते हो?श्रद्धा: नहीं रिफरेन्स नहीं फिलहाल के लिए पैसे उधार दे सकती हूँ. स्वाति को जानती हूँ इसी लिए बोली.मैं: अरे नहीं नहीं ये ठीक नहीं होगा. उधार लेना सही नहीं.श्रद्धा: ओके तुम्हारी मर्ज़ी पर उधार नहीं तो.. ओके बताओ तुमने क्या पढ़ा है?मैं: मैंने बी-टेक किया है.श्रद्धा: हम्म ओके तो 6 क्लास की मैथ्स और हिंदी का ट्यूशन ले सकते हो?मैं: क्या? अक्षुण के लिए? Bahar Wali Bhabhi Ki Chudai ki kahani:
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श्रद्धा: हाँ. उसकी फाइनल एग्जाम आ रही है.मैं: आज तक किसी को पढ़ाया नहीं है. पर कोसिस कर सकता हूँ.श्रद्धा: ओके तो दिन अक्षुण को पड़ने आ जाओ मैं पैसे एडवांस में दे दूँगी.मैं: अरे चलेगा. अभी के लिए है.श्रद्धा: नो नो यहाँ इस शहर में पैसे कब निकल जाते है पता भी नहीं चलेगा. वैसे कब से आओगे?मैं: जब भी आप बोलो.श्रद्धा: जब भी?मैं: हाँ जब भी.श्रद्धा: रात को 12 बजे आने बोलूंगी तब भी?इस बार मौका नहीं खोना चाहता था और मैंने बोल दिया मज़ाकिया रूप से मुस्कुराते हुए: हाँ आप जब भी बुलाओ आ जाऊंगा.
रात के 12 हो या सुबह के 4.श्रद्धा: है है है!! थॉट्स थे स्पिरिट. लिखे आईटी.इतने में मग्गी तैयार हो गया और उसे श्रद्धा दो प्लेट में डालने लगी.श्रद्धा: लो एक प्लेट तुम्हारी और एक अक्षुण को दे देना.मैं: और आप के लिए?श्रद्धा: नहीं नहीं मैं बेवक़्त नहीं खाती. थोड़ी हेल्थ कौन्सियस हूँ.मैं: हाँ वह तो सही कहा. आपको देख कर लगता भी है.
श्रद्धा: क्या लगता है.मैं: यही की आप अपने आपको कितना वेल मेन्टेनेड रखती हो.श्रद्धा: है है है!! क्या करू करना पड़ता है जब 34 साल के हो जाये तो.मैं: हो ही नहीं सकता की आप 34 साल की हो.श्रद्धा मुस्कुराते हुए बोली: क्यों? तुम्हे क्या लगा तो फिर?मैं: मुझे लगा आप कुछ 24-25 की ही होगी.श्रद्धा: ओहो!
अब इतना भी ज़्यादा मत फेको. वह थोड़ा ज़्यादा हो गया.मैं: ओके ज़्यादा से ज़्यादा 26-27 पर 34 की तो आप बिलकुल नहीं लगती.श्रद्धा के चेहरे पे एक ख़ुशी भरी मुस्कान उमड़ पड़ी और बोली: ओके जाओ अब मग्गी ठंडा हो जायेगा इन बातो में. तुम और अक्षुण खाओ मैं नहाकर आती हूँ.मेरे अंदर अब एक जोश आ गया था उससे बात करने में और मैं जाते वक़्त उससे पुछा: जैसा की आपने पुछा हाथ बटाने की. ज़रुरत पड़े तो याद कर लीजियेगा.Bahar Wali Bhabhi Ki Chudai ki kahani:
श्रद्धा: किस मैं हाथ बाटाने की?मैं: वही आप जो काम करने जा रहे हो.श्रद्धा: चल भाग नॉटी. ज़रुरत पड़े तो बुलाऊंगी. अब जाओ.इतना सुनकर मैं लीविंग रूम को आया और अक्षुण को मग्गी दे दिया जिसपर उसने थैंक यू अंकल कहा और खाने लगा पलट कर मैंने श्रद्धा को अपने रूम जाते हुए देखा जाते हुए उसने पलट कर मुझे एक मुस्कराहट दी जिसपर मैं ख़ुशी से पागल हो गया.फिर अंदर से उसके रूम के बाथरूम का दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आयी अब करता क्या तो मैंने सोचा चलो अक्षुण से थोड़ी बात कर लू.
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मैं: अक्षुण तुम्हारे पापा कहा है?अक्षुण: वह तो अमेरिका में है.मैं: ओह अमेरिका में?अक्षुण: हाँ उसे.मैं: ओके ओके!अक्षुण: आप गए हो वाह?मैं: नहीं अभी तक तो नहीं. और आप?अक्षुण: नो. पापा आते है यहाँ.मैं: कब आये थे लास्ट टाइम?अक्षुण: मेरे बर्थडे पर.मैं: ओके.. आपका जन्मदिन कब है?अक्षुण: क्या?मैं: जन्मदिन?
अक्षुण: वह क्या है?तब याद आया की क्यों श्रद्धा इसकी हिंदी की भी ट्यूशन की बात कह रही थी.मैं: जन्मदिन मतलब बर्थडे हिंदी में.अक्षुण: ओह ओके. जुलाई 18 मे तब सोचने लगा की अभी तो काफी महीने हो गए जुलाई को बेचारा अपने पापा से और श्रद्धा अपने पति से कितनी दूर रहती है.
फिर मैंने टीवी यूनिट पे रखी एक फोटो देखि श्रद्धा और उसके हस्बैंड की. फिर हम दोनों मग्गी खाने लगे और साथ ही डोरीमोन नाम की कार्टून देखने लगे जो शायद उसे बहुत पसंद था.
दोस्तो आज बस इतना ही इस कहानी मे आगे क्या हुआ ये मे अगले भाग मे बतऔगा.
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