Sasur bahu ki chudai ki kahani:- जुनैद को अपने बिजनेस टूर पर गए हुए दूसरा दिन था। हस्बे मामूल वह दूसरे शहर में गया हुआ था। अलीना की सुबह ही उससे बातचीत हुई थी और अब दोपहर का टाइम हो रहा था, करीब 3 बजे का। अलीना अपने ससुर जी नाजीर मलिक साहब के साथ खाना खाने के बाद अपने रूम में आकर लेट चुकी हुई थी और नाजीर साहब भी अपने कमरे में आराम करने चले गए हुए थे।
जैसे ही अलीना अपने बिस्तर पर लेटी तो उसे अपने शौहर की याद आने लगी। सुबह ही अलीना की जुनैद से बात हुई थी। उसने उम्मीद जताई थी कि वह अगले दिन तक वापस आ जाएगा। मगर अकेला कमरा और अपने शौहर से दूरी तो जैसे उसे काट रही थी, उसके जिस्म को जला रही थी। जुनैद के टूर पर जाने से पहले की उसके साथ गुजारी हुई रात अलीना को याद आने लगी। उसका जिस्म जैसे जलने सा लगा। कमरे में चल रहे एसी के बावजूद भी उसका जिस्म गरम होने लगा।
Sasur bahu ki chudai ki kahani
अलीना को पता भी नहीं चला कि कब उसकी आँखें बंद हुईं और उसका हाथ अपने ही जिस्म पर फिसलता हुआ नीचे को जाने लगा। धीरे-धीरे अपनी चूत पर पहुँच गया। उसने अपनी कमीज को अपनी जाँघों पर से हटाया और अपनी टाइट लेग्गी और पैंटी के ऊपर से ही धीरे-धीरे अपनी चूत को सहलाने लगी। अलीना के चेहरे के तास्सुरात बदल रहे थे। वह धीरे-धीरे लज्जत में खोती जा रही थी। उसकी आँखें बंद हो रही थीं। उसका हाथ अपनी लेग्गी के ऊपर से ही अपनी चूत को सहला रहा था। उसे अपनी चूत गीली होती हुई महसूस हो रही थी।
कमीज ऊपर उठाने से अलीना का गोरा-गोरा पेट नंगा हो रहा था। अलीना ने अपना हाथ अपनी लेग्गी के अंदर खिसका दिया। उसका हाथ उसकी चिकनी जिल्द पर से फिसलता हुआ उसकी चूत की तरफ बढ़ने लगा और फिर उसका हाथ उसकी पैंटी के अंदर दाखिल हो गया।
अलीना ने आज ही अपनी चूत के बालों को साफ किया था, जिससे उसकी चूत के ऊपर का हिस्सा और भी मुलायम और चिकना हो चुका था। चूत के ऊपर के चिकने हिस्से से जैसे ही उसका हाथ फिसलता हुआ उसकी चूत तक पहुँचा तो उसके मुँह से खुद ही सिसकारी निकल गई। उसे अपनी चूत जलती हुई महसूस हुई। उसकी साँसें तेज होने लगीं।
उसकी उँगली ने अपनी चूत के दाने को ढूँढ लिया और अपनी उँगली की पोर से वह अपनी चूत के दाने को सहलाने लगी। कभी उसकी उँगली नीचे तक जाती उसकी चूत के सुराख तक और कभी फिर ऊपर के हिस्से पर वापस आ जाती। चूत के सुराख से रिसता हुआ गाढ़ा पानी उसकी उँगली को भिगो रहा था, चिकना कर रहा था। उसकी चूत पानी छोड़ रही थी जो उसकी व्हाइट लेग्गी को भी गीला कर रहा था। तेज साँसों के साथ उसके बूब्स भी ऊपर-नीचे हो रहे थे जो उसकी टाइट शर्ट में और ब्रा में कैद थे।
जैसे-जैसे बेचैनी बढ़ने लगी वैसे-वैसे ही उसे जुनैद की याद और भी सताने लगी। अलीना ने अपनी नशे से भरी हुई आँखें खोलीं और अपने करीब ही बेड पर पड़ा हुआ अपना मोबाइल उठाया और अपने हस्बैंड को कॉल करने लगी। मगर यह क्या… उसका मोबाइल तो बंद जा रहा था। अलीना ने दो बार ट्राई की मगर सेल फोन बंद था। आखिर अलीना ने अपना मोबाइल बेड पर पटक दिया और बेचैनी में इधर-उधर सिर मारने लगी सिरहाने पर।
अचानक उसे कुछ ख्याल आया। वह अपने बेड से उठी और फिर अपने कमरे से बाहर निकल गई।
अलीना 24 साल की एक जवान और खूबसूरत लड़की है। बेहद गोरी और खूबसूरत। अच्छी पढ़ी-लिखी। उसने यूनिवर्सिटी से एमबीए किया हुआ था। उसकी शादी एक साल पहले ही जुनैद से हुई है जो उसका यूनिवर्सिटी क्लास फेलो भी रह चुका है और उसका प्यार भी। दोनों ने अपनी मर्जी से अपने पैरेंट्स को राजी करके शादी की थी और दोनों ही बहुत खुश थे। अब अलीना जुनैद और उसके वालिद नाजीर के साथ रहती थी। नाजीर साहब एक 60-65 साल के आदमी थे जो कि अभी भी काफी हद तक फिट हैं। लेकिन अब ज्यादातर बिजनेस उन्होंने अपने बेटे के हवाले ही कर दिया हुआ है जो कि बहुत ही अच्छे से बिजनेस चला रहा है। नाजीर साहब की एक और औलाद उनकी बेटी थी जो कि जुनैद से छोटी थी, 2 साल। मगर उसकी शादी भी उन्होंने जुनैद की शादी के साथ ही कर दी थी। फिजा अपने हस्बैंड के साथ उसी शहर में रहती थी। उनका भी अच्छा बिजनेस था और अच्छा घर था। दोनों फैमिलीज अपर मिडिल क्लास टाइप की थीं जो कि बहुत ज्यादा अमीर ना सही मगर अच्छे-खासे खाते-पीते लोग थे।
अलीना अपने कमरे से बाहर आई और अपने ससुर जी के कमरे की तरफ बढ़ने लगी। ससुर जी के कमरे के दरवाजे पर जाकर अलीना ने धीरे से दरवाजा खोला तो देखा कि उसके ससुर जी कोई किताब पढ़ते-पढ़ते सो चुके हुए हैं। किताब उनके सीने पर ही पड़ी हुई थी। अलीना ने मुस्कुरा कर उन पर एक नज़र डाली और धीरे से दरवाजा बंद करके पीछे हट गई और किचन की तरफ बढ़ी।
किचन में जाकर अलीना ने फ्रिज खोला और उसमें से कुछ तलाश करने लगी। और फिर उसकी नज़र अपनी मनपसंद चीज पर पड़ गई। वह धीरे से मुस्कुराई और अपना हाथ बास्केट की तरफ बढ़ा दिया। और दो-चार देखने के बाद एक मुनासिब साइज का खीरा उठा लिया जो कि यकीनन जुनैद के लंड से मोटा और लंबा था। खीरा सिलेक्ट करने के बाद अलीना के चेहरे पर एक मुस्कान फैल गई। उसने आहिस्ता से खीरे पर अपने होंठ रखकर उसे चूम लिया और फिर फ्रिज बंद करके किचन से निकल आई। अपने कमरे की तरफ जाते हुए एक नज़र अपने ससुर जी के दरवाजे पर डाली और मुस्कुराती हुई अपने कमरे में दाखिल हुई और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।
अपने बेड के करीब जाकर अलीना ने जल्दी से अपनी लेग्गी को उतार कर अपने जिस्म से अलग कर दिया। उसकी गोरी-गोरी टाँगें नंगी हो गईं। अलीना ने हाथ बढ़ाकर अपनी पैंटी के ऊपर से अपनी चूत पर फेर तो देखा कि उसकी पैंटी भी उसकी चूत के पानी से पूरी गीली हो रही है। अलीना ने अपनी गीली पैंटी भी उतार दी। उसे देखा तो वह चूत के पानी से पूरी भीगी हुई थी। अलीना ने अपनी पैंटी को अपनी नाक के करीब ले जाकर सूँघा तो उसकी अपनी चूत की महक उसकी नाक से होती हुई दिमाग तक पहुँच गई। अपनी चूत की महक को महसूस करके उसे याद आया कि उसका हस्बैंड उसकी चूत की इसी महक का कितना दीवाना है। वह मुस्कुराई और अपनी पैंटी को बेड पर फेंक कर अपनी चूत को सहलाने लगी जो पूरी की पूरी गीली हो रही थी और गर्मी से दहक रही थी।
अलीना बेड पर लेट गई और अपने हाथ में पकड़ा हुआ खीरा अपने होंठों के पास ले जाकर उसे चूमने लगी। आहिस्ता-आहिस्ता उस पर जुबान फेरने लगी, जुनैद के लौड़े को इमेजिन करती हुई। दूसरा हाथ उसका अपनी चूत को सहला रहा था। वह दोबारा से गरम होने लगी थी। खीरे को अपने थूक से गीला करने के बाद अलीना ने उसे अपनी चूत के दाने पर रखा और उससे अपनी चूत के दाने को रगड़ने लगी। जैसे ही खीरे ने उसकी चूत को रगड़ा तो अलीना के मुँह से सिसकारी निकल गई और उसकी आँखें बंद हो गईं।
अलीना ने वापस उसे चूमा। फिर अपने हाथ में पकड़ कर उसे बेड पर सीधा खड़ा किया और करवट लेकर उस पर झुक गई और अपना मुँह नीचे ले जाकर उसके सिरे को चूमा और फिर नीचे से ऊपर तक उसे चाटने लगी जैसे वह जुनैद के लंड को चाट रही हो। फिर अलीना ने मुँह खोला और धीरे-धीरे उस खीरे को अपने मुँह के अंदर लेने लगी। अलीना अपने मुँह को आहिस्ता-आहिस्ता ऊपर-नीचे को करती हुई उस खीरे को चूसने लगी। वह हरा मोटा खीरा धीरे-धीरे उसके मुँह में अंदर-बाहर हो रहा था। जिसके कभी अपने मुँह से निकाल कर अपनी जुबान से चाटने लग जाती। दूसरा हाथ उसका नीचे को गया और खुद की चूत को आहिस्ता-आहिस्ता सहलाने लगा। अलीना की चूत पूरी तरह से गीली हो रही थी बल्कि उसे तो टपकती हुई महसूस हो रही थी।
अलीना अब दोबारा अपनी कमर के बल लेट गई और अपनी जुबान और मुँह से गीले किए हुए खीरे को अपनी चूत पर ले गई और आहिस्ता-आहिस्ता उसे अपनी चूत पर रगड़ने लगी। आहिस्ता-आहिस्ता वह मोटा खीरा उसकी चूत के सुराख पर पहुँच गया। जैसे ही उसकी चूत के दाने पर टच हुआ तो अलीना के मुँह से सिसकारी निकल गई। अपनी चूत के सुराख पर उस खीरे को रखकर अलीना ने आहिस्ता से जोर डाला तो उसकी चूत के पानी से चिकनी हो रही हुई चूत के अंदर वह खीरा फिसल कर अंदर चला गया और साथ ही अलीना के मुँह से सिसकारी निकल गई और उसकी आँखें बंद हो गईं।
थोड़ा सा खीरा चूत के अंदर जाने के बाद तो जैसे अब अलीना से कंट्रोल करना ही मुश्किल हो रहा था। उसने आहिस्ता-आहिस्ता उसे पूरा अंदर करना शुरू कर दिया। मगर वह उस मोटे और लंबे खीरे को पूरा अपनी छोटी सी नाजुक सी चूत के अंदर ना ले सकी और उसे अपनी चूत के अंदर-बाहर करने लगी। उसकी चूत पहले ही गीली हो रही थी और धीरे-धीरे उसके हाथ में पकड़ा हुआ खीरा उसकी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था।
इतने में घर की बेल बजी। अलीना चौंकी। उसका हाथ रुक गया। वह सोचने लगी यह इस वक्त दोपहर में कौन आ गया है। मगर उसे यह तसल्ली थी कि वह तो उसके ससुर जी… मलिक साहब ने ही जाकर देखना है कि दरवाजे पर कौन है। अलीना ने दोबारा से अपनी आँखें बंद कीं और उस खीरे को अपनी चूत में अंदर-बाहर करने लगी। उसे हमेशा की तरह ऐसी ही फीलिंग आ रही थी जैसे कि वह जुनैद के लंड से ही चुदवा रही हो।
उधर मलिक साहब ने नींद से उठकर जाकर दरवाजा खोला तो सामने दो आदमी खड़े थे जो थोड़े अजीब से लग रहे थे। आगे वाला बंदा थोड़ी बड़ी-बड़ी मूँछों वाला, थोड़ा भारी जिस्म के साथ था। उसने जींस की मैली सी पैंट और काले रंग की टी-शर्ट पहनी हुई थी। गले में एक मोटी सी जंजीर डाली हुई थी। रंग भी उसका साँवला सा था। उसका नाम बाबू था। उसके पीछे का आदमी थोड़े पतले जिस्म का था। वह भी जींस और शर्ट में था।
मलिक साहब ने हैरत से उन दोनों को देखा और बोले,
मलिक: जी भाई साहब, मैं आपकी क्या खिदमत कर सकता हूँ?
बाबू: अंकल जी, माफी चाहते हैं आपको थोड़ी तकलीफ दी। वो असल में ऐसा है कि आपके बेटे के बारे में आपसे कुछ बात करनी थी।
मलिक साहब थोड़ा घबरा गए। उनके चेहरे से परेशानी झाँकने लगी।
मलिक: क्या हुआ मेरे बेटे को? खैरियत तो है ना?
बाबू: जी जी अंकल, तुम परेशान ना हो। सब ठीक-ठाक है। बेहतर होगा कि हम अंदर चल के बात कर लें।
मलिक साहब थोड़ा परेशान हो गए। एक नज़र उन दोनों पर डाली और फिर उनको अंदर आने के लिए बोल दिया। दोनों अंदर आए और टीवी लाउंज में बैठ गए। वहीं पर सोफे लगे हुए थे। वह दोनों मलिक साहब के दोनों तरफ बैठ गए थे। अब मलिक साहब थोड़ा घबरा रहे थे कि कहीं उन्होंने उन दोनों को अंदर बुलाकर गलती तो नहीं कर ली।
मलिक: बेटा मुझे जल्दी से बताओ क्या बात है। मेरा तो दिल डूब रहा है।
बाबू: अंकल असल में बात यह है कि आपके बेटे ने अपने कारोबार के लिए हमसे कुछ पैसा लिया था उधार, जो उसने 6 महीने में चुकाना था। मगर अब पूरा साल हो चुका है और वह हमको चक्कर देता जा रहा है।
मलिक साहब: वो… वो बेटा थोड़ा उसका काम ठीक नहीं चल रहा ना तो इसलिए देरी हो रही होगी। जरूर वापस कर देगा वह आप लोगों के पैसे। वह भागने वाला नहीं है कहीं। आप फिकर नहीं करो।
बाबू अपने मोबाइल पर कुछ उँगलियाँ चलाता हुआ बोला,
बाबू: अरे अंकल… वह कहीं अब भाग ही नहीं सकता। क्योंकि उसको हमने अपने पास ही रख लिया हुआ है।
मलिक साहब: क्या मतलब है तुम्हारा इस बात का?
बाबू: अरे अंकल जी… यह देखो अपनी आँखों से खुद ही देख लो।
बाबू ने व्हाट्सएप से किसी नंबर पर वीडियो कॉल मिला ली थी और अब उसके मोबाइल पर जुनैद एक कुर्सी पर बँधा हुआ नजर आ रहा था। कुछ ऐसा लग रहा था जैसे उसे मारा भी गया हो। मलिक साहब ने घबरा कर अपनी नजरें उन दोनों पर डालीं तो अब उन दोनों के हाथों में गन थीं। मलिक साहब तो परेशान हो गए।
मलिक साहब: बेटा प्लीज मेरे बेटे को छोड़ दो।
बाबू: अरे अंकल अपने बेटे से बात तो करो ना।
फिर बाबू बोला,
बाबू: अरे काल्या जरा इस लौंडे से बात तो करवा ना इसके बुड्ढे की।
मोबाइल पर जैसे ही जुनैद की नजर अपने बाप पर पड़ी तो वह रोने लगा।
जुनैद: बाबा… जो कुछ भी घर में है इसको दे दो आप… वरना यह मुझे मार डालेंगे।
बाबू मोबाइल मलिक साहब को दिखाता हुआ अपनी गन पर हाथ फेर रहा था।
बाबू: फिर क्या सोचा आपने अंकल जी?
मलिक साहब घबरा के बोले,
मलिक: बेटा घर पर तो कुछ भी ऐसा नहीं है।
बाबू: अरे यह बताओ घर पर और कौन है?
मलिक: वो मेरी बहू है और मैं बस…
बाबू: कहाँ है वह?
मलिक: अपने कमरे में।
बाबू: चलो उसको भी बुलाओ बाहर। अरे हाँ उसका जेवर तो होगा ना… और कुछ ना कुछ रकम भी होगी घर में… उसके कमरे में।
मलिक साहब को उन्होंने उठाया और अलीना के कमरे की तरफ चल पड़े। जहाँ अंदर अलीना अपने बिस्तर पर तन्हा लेटी हुई मचल रही थी और अपनी गरम चूत की आग को खीरे से मिटाने की कोशिश कर रही थी। उसकी चूत ने अभी तक पानी नहीं छोड़ा था लेकिन गीली बहुत हो रही थी। उसकी बेचैनी अपने चरम पर थी। उसका आधा नंगा जिस्म बिस्तर पर मचल रहा था और उसका हाथ खीरे को तेजी से उसकी चूत में अंदर-बाहर कर रहा था। अब वह अपनी ऑर्गैज्म के करीब थी कि उसका दरवाजा नॉक हुआ।
अलीना को इस मौके पर बहुत गुस्सा आया। उसका हाथ रुक गया। वह आहिस्ता से बोली,
अलीना: कौन?
बाबू ने गन मलिक साहब के सिर पर रखी और धीरे से बोला,
बाबू: कोई चालाकी मत दिखाना। उसे आराम से दरवाजा खोलने को बोलो।
मलिक साहब ने आवाज दी,
मलिक: अलीना बेटी दरवाजा खोलो जरा।
अलीना की हालत इस वक्त खराब हो रही थी। वह चिढ़ कर अपने बिस्तर से उठी। जल्दी से अपनी टाइट लेग्गी उठा कर जल्दी-जल्दी पहनने लगी और फिर बिस्तर से वह खीरा उठा कर अपने बेड की साइड टेबल ड्रॉअर में रख दिया और अपनी गीली पैंटी को अपने सिरहाने के नीचे रख दिया। अपने बालों में हाथ फेरती हुई दरवाजा खोलने के लिए बढ़ी। दरवाजे की तरफ जाते हुए उसकी नजर आईने में पड़ी तो उसे खुद की हालत देखकर अजीब सा लगा क्योंकि साफ दिख रहा था कि जैसे कोई बहुत ही प्यासी औरत हो या बहुत ही बुरी तरह से चुदवा कर आ रही हो।
बहरहाल अलीना ने दरवाजा खोला और जैसे ही बाहर झाँका तो उसके तो होश ही उड़ गए। मगर इससे पहले कि वह कुछ समझ सके या कोई और हरकत करती, बाबू ने दरवाजे को धक्का मारा और वह सब लोग अंदर दाखिल हो गए।
अलीना घबरा कर बोली,
अलीना: क्…कौन हो आप लोग… और क्या चाहते हो?
दोनों अंदर आ गए और मलिक साहब को लेकर। मलिक साहब ने अपनी बहू को जल्दी-जल्दी सारी बात बताई। बाबू ने मोबाइल पर उसे जुनैद की मुलाकात करवाई और अलीना भी परेशान हो गई।
अलीना: प्लीज आपको जो चाहिए वह ले लो और मेरे हस्बैंड को छोड़ दो।
बाबू अपनी लाल-लाल आँखों से अलीना को ऊपर से नीचे तक देखता हुआ बोला, अपने गंदे दाँत निकाल कर हँसता हुआ,
बाबू: जो हमको चाहिए वह तो हम लेकर ही जाएँगे। अरे अंकल बहुत मस्त बहू है तुम्हारी तो।
उसने मलिक साहब की तरफ देखते हुए आँख मारी।
मलिक साहब: तमीज से बात करो। वह मेरी बहू है। जो भी लेना है जल्दी से लो और दफा हो जाओ।
अभी ससुर जी की बात उनके मुँह में ही थी कि बाबू ने एक जोर का थप्पड़ उनके मुँह पर मारा।
बाबू: अबे बुड्ढे जरा मुँह सँभाल के बात कर। मैं तुझ बुड्ढे की इज्जत कर रहा हूँ और लौंडा पे चढ़ता जा रहा है।
अलीना: प्लीज प्लीज आप उनको कुछ ना कहो। मैं आपसे माफी माँगती हूँ इनकी।
अलीना ने अपने हाथ जोड़ दिए और मलिक साहब बेड पर गिरे हुए अपना गाल सहला रहे थे।
बाबू: अरे शीदा इस बुड्ढे को कुर्सी से बाँध दे। वरना यह तर-तर करता ही रहेगा।
अलीना: नहीं नहीं… प्लीज…
बाबू ने अपना भारी-भरकम हाथ उठाया अलीना को थप्पड़ मारने के लिए तो वह सहम सी गई। उसे सहमा हुआ देखकर बाबू ने अपना हाथ रोक दिया और हँसने लगा।
बाबू: बहन की लौड़ी मेरे काम में कोई रुकावट ना डालना। वरना तो मेरा हाथ बरदाश्त नहीं कर सकेगी।
अलीना चुप हो गई। शीदा ने ससुर जी को उठाया और उसे कमरे में ही पड़ी हुई कुर्सी पर बिठा दिया। अपनी पॉकेट में से एक नायलॉन की रस्सी निकाली और उनको कुर्सी से बाँध दिया।
बाबू: बुड्ढे अब खामोशी से हमें अपना काम करने दे और तेरी आवाज नहीं निकलनी चाहिए। आई समझ ना?
ससुर जी खामोश रहे। शीदा आगे बढ़ा और अलीना की अलमारी खोल के उसको चेक करने लगा। एक दराज खोला तो उसमें अलीना की ब्रा और पैंटीज पड़ी हुई थीं। उसने वह निकाल-निकाल के नीचे गिरानी शुरू कर दीं। बाबू की नजर पड़ी तो वह हाथ बढ़ा कर उनको कार्पेट से उठा कर बेड पर ले आया।
बाबू उनको सूँघा और फिर उनको फैला कर देखता हुआ बोला,
बाबू: अरे क्या मस्त स्टाइल की ब्रा हैं तेरी तो।
अलीना अपने ससुर जी के सामने अपनी ब्रा की नुमाइश यूँ होती हुई देखकर शर्म से पानी-पानी हो गई और ससुर जी भी अपना चेहरा इधर-उधर घुमा रहे थे।
बाबू ने गन से अलीना के गालों को छुआ।
बाबू: यार वैसे बड़ी मस्त माल है तू सच में। क्या नाम है तेरा? अरे हाँ अलीना… यही बोला था ना बुड्ढे ने?
अलीना ने बेबसी से अपना सिर हिला दिया। बाबू अब आहिस्ता-आहिस्ता अलीना के गाल को अपनी उँगली से सहला रहा था। अलीना को बहुत गुस्सा भी आ रहा था और यह सब बुरा भी लग रहा था।
अलीना: प्लीज ना करो… छोड़ दो मुझे।
अचानक बाबू की नजर बेड पर रखे सिरहाने की तरफ गई जिसके नीचे से कोई चीज झाँक रही थी। बाबू ने आगे बढ़ कर सिरहाना उठाया तो नीचे अलीना की लाल रंग की गीली पैंटी पड़ी हुई थी। उसे बाबू ने उठा लिया।
बाबू: अरे यह तो बिल्कुल गीली पड़ी है तेरी पैंटी। अभी उतारी है क्या?
यह कहकर बाबू उसे सूँघने लगा।
बाबू: मम्मम्म… वाह… क्या मस्त खुशबू आ रही है इसमें से तेरी चूत की… उफ्फ्फ मार डाला रे जालिम।
अलीना शर्म से पानी-पानी हो गई। ससुर जी फिर से गुस्से से बोले,
मलिक: मैंने कहा है ना कि यह हरकतें ना करो मेरी बहू के साथ।
बाबू गुस्से से बोला,
बाबू: बुड्ढे तूने लगता है बाज नहीं आना। तेरा मुँह बंद करना ही पड़ेगा।
वह अलीना की गीली पैंटी हाथ में लिए हुए ससुर जी की तरफ बढ़ा।
बाबू: यह देख मैं कोई झूठ बोल रहा हूँ? देख तेरी बहू की पैंटी उसकी चूत के पानी से कितनी गीली हो रही है। और तू बोलता है कि मैं गलत बात कर रहा हूँ। देख… देख इसे… सूँघ इसको।
बाबू ने अलीना की पैंटी मलिक साहब की नाक से लगाई। ना चाहते हुए भी उनको अपनी साँस के साथ अपनी बहू की चूत की खुशबू को उसकी पैंटी में से अपने अंदर ले जाना पड़ा और अपनी नाक पर उनको गीला-गीला भी महसूस हुआ। वह समझ गए कि बाबू सच ही कह रहा है। जैसे ही पैंटी में से अलीना की चूत की महक उनकी साँस में गई तो उनकी नजर खुद-ब-खुद ही अपनी बहू की तरफ गई। अलीना की नजर अपने ससुर जी की नजर से मिली तो उसने शर्म से अपना सिर झुका दिया।
बाबू अलीना की चूत के पानी से गीली हो रही हुई पैंटी को उसके ससुर जी के पूरे मुँह पर फेरता हुआ बोला,
बाबू: खुद ही देख लो मैं कोई गलत बोल रहा हूँ। देखो तुम्हारी बहू की चूत कितनी गीली हो रही है। वह पहले से ही चुदने के लिए तड़प रही है। शायद उसे तुम्हारे बेटे की याद आ रही होगी ना।
मलिक साहब का पूरा चेहरा अलीना की गीली पैंटी के पानी से गीला हो चुका था। वह अपनी बहू की तरफ देख नहीं पा रहे थे और वह भी अपने ससुर जी से नजरें नहीं मिला पा रही थी।
मलिक साहब फिर बोले,
मलिक: प्लीज बाबू… ऐसी बेहूदा बातें नहीं करो। मेरी बहू बहुत शरीफ लड़की है।
बाबू को फिर गुस्सा आया। उसने ससुर जी का मुँह पकड़ के दबाया जिससे उनका मुँह खुल गया और बाबू ने उनकी बहू की गीली पैंटी ससुर जी के मुँह में ठूँस दी। अलीना की आँखें हैरानी से फैल गईं और वह बहुत ही शर्मिंदगी से अपने ससुर को देख रही थी जिनके मुँह में उसकी चूत के पानी से गीली हो रही हुई पैंटी पूरी की पूरी ठूँस दी गई हुई थी। अब मलिक साहब कुछ नहीं बोल सकते थे। कोई आवाज नहीं निकाल सकते थे और सिर्फ और सिर्फ अपनी बहू की चूत के पानी का जायका ही चख सकते थे, वह भी डायरेक्ट उसकी पैंटी से।
अलीना घबराई हुई सी यह सब कुछ देख रही थी। और फिर इधर-उधर की अलमारियों से सामान ढूँढते हुए शीदा उसकी बेड की साइड टेबल की तरफ बढ़ा और जैसे ही शीदा ने वह ड्रॉअर खोलने के लिए हाथ बढ़ाया तो अलीना का दिल उछल के उसके हलक में आ गया हो जैसे। और फिर वही हुआ जिसका उसे डर था। शीदा ने ड्रॉअर खोला तो पहली नजर ही उसकी सामने अंदर रखे हुए खीरे पर पड़ी जिस पर अलीना की चूत का पानी लगा हुआ था। जो कुछ तो सूख चुका था और कुछ गीला-गीला चमक रहा था। उसने वह खीरा अपने हाथ में उठाया और मुस्कुरा कर अलीना की तरफ देखता हुआ बोला,
शीदा: अरे उस्ताद यह देखो क्या मिला है यहाँ से…
आगे क्या हुआ, पढ़िए अगले पार्ट में।