कैसे बना मै बेटी चोद

By | September 2, 2026

Kaise meri beti ki chudai ki:- हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम जगत है, और मैं राजस्थान के जयपुर से हूँ। मेरी उम्र 55 साल है, और इस उम्र में भी मैं तंदुरुस्त और हट्टा-कट्टा हूँ। मेरे परिवार में मेरी बीवी, बेटा, और बेटी है।

मेरी एक राशन की दुकान है, जो काफी अच्छी चलती है। तो हमें पैसों की कोई दिक्कत नहीं है। मेरा बेटा अमर 22 साल का है, और बेटी मधु 24 साल की है। ये कहानी मेरे और मेरी बेटी के बीच हुए सेक्स की है। तो चलिए शुरू करते हैं।

Kaise meri beti ki chudai ki

आम दुकानदार की तरह मैं भी सुबह से शाम तक अपनी दुकान पर रहता हूँ। मेरा बेटा भी दुकान का काम ही देखता है। बेटी अभी कॉलेज में मास्टर्स कर रही है। बीच में मैं दोपहर में घर आता हूँ, और लंच करके वापस चला जाता हूँ।

बेटा मेरा दुकान पर सुबह ही लंच लेकर जाता है, क्योंकि उसको घर बार-बार आने में दिक्कत होती है। अगर वो कभी खाना सुबह नहीं लेकर जाता, तो मुझसे दोपहर में मँगवा लेता है।

ये 6 महीने पहले की बात है। एक दिन मेरी बीवी के मायके से फोन आया कि उसका भाई काफी बीमार था। तो मैंने उसको उसके मायके भेज दिया। उस दिन दोपहर में घर पे तो खाना मिलना नहीं था, क्योंकि बीवी मायके गई थी और बेटी कॉलेज। तो मैं बाहर से कुछ लेने के लिए दोपहर में मार्केट गया।

मैं पूरी-छोले पैक करवा ही रहा था, कि मेरी नजर स्कूटर पर बैठे एक लड़के-लड़की पर गई। जब मैंने उन्हें ध्यान से देखा, तो वो लड़की और कोई नहीं मेरी बेटी मधु थी।

लेकिन जिस लड़के के पीछे वो बैठी थी, मैं उसको नहीं जानता था। मैंने जल्दी से अपनी बाइक स्टार्ट की, और उनके पीछे जाने लगा। वो दोनों हमारे घर के ही रास्ते पर जा रहे थे। हम सब लोग अपने पास घर की एक चाबी रखते हैं। तो मधु के पास भी एक चाबी थी।

वो लोग घर के बाहर रुके। फिर मधु ने दरवाजा खोला, और उस लड़के के साथ अंदर चली गई। मैंने गेट से थोड़ी दूर बाइक लगाई, और चुपके से पीछे के दरवाजे से घर के अंदर चला गया।

अंदर जाके जब मैंने मधु के रूम में देखा, तो वो दोनों चुम्मा-चाटी कर रहे थे। मेरी बेटी उस वक्त पजामा सूट में थी, और वो लड़का पैंट-शर्ट में। मुझे उन दोनों को देखकर गुस्सा तो बहुत आया, लेकिन वो दोनों जिस जोश में लगे हुए थे, मेरा और देखने का मन करने लगा।

फिर मैं वहीं साइड में बिना आवाज किए खड़ा रहा। चुम्मा-चाटी करते हुए उस लड़के ने मेरी बेटी की पजामा और शर्ट दोनों उतार दिए, और अब नीले रंग की पैंटी, और काले रंग की ब्रा में थी।

अपनी बेटी को इस हाल में मैंने पहली बार देखा था। मुझे पता ही नहीं था कि मेरी बेटी इतनी जवान और खूबसूरत हो चुकी थी। रंग उसका गोरा था, और शरीर भरा हुआ था। फिर वो लड़का उसकी क्लीवेज में मुँह डालकर चूमने लगा, और उसकी गाँड दबाने लगा।

उन दोनों को ऐसे देखकर मेरा भी लंड खड़ा हो गया। मेरा दिल कर रहा था, कि मैं भी मधु के साथ वैसा ही करूँ जैसा वो लड़का कर रहा था। फिर मेरी बेटी ने उस लड़के को धक्का देके बेड पर गिराया, और बिल्ली की तरह उछलकर उस पर चढ़ गई।

उसने लड़के की जिप खोलकर लंड बाहर निकाला, और उसको चूसने लग गई। बस अब मेरी बरदाश्त से बाहर हो चुका था। मेरी बेटी ऐसे किसी भी लफंगे का लंड नहीं चूस सकती थी। तभी मैंने जोर से उसका नाम लिया, और उसके रूम में चला गया।

वो दोनों डर गए, और वो लड़का भागने की कोशिश करने लगा। मैंने उसको पकड़ा, और दो थप्पड़ लगाकर वार्निंग दी कि दोबारा कभी मधु के आस-पास भी ना दिखाई दे। फिर मैंने उसको जाने दिया।

मधु अभी भी ब्रा-पैंटी में ही थी, और अपने कपड़ों से खुद को ढकने की कोशिश कर रही थी। वो मेरे सामने बेड के पास ही खड़ी थी। जब मैंने उसको देखा, तो वो बोली—

मधु: पापा गलती हो गई। मुझे माफ कर दो।

जगत: बेटी इसमें गलती वाली क्या बात है। जवानी में ऐसा ही होता है। जब चूत में आग लगी हो, तो लड़कियों को ये सब करना पड़ता है। लेकिन ऐसा कुछ करने के लिए बंदा सही होना चाहिए।

ये बोलकर मैंने उसके दोनों कंधों पर हाथ रखा, और नीचे की तरफ दबाया। इससे वो बेड पर बैठ गई। फिर मैंने अपनी पैंट की जिप खोली, और अपना खड़ा लंड बाहर निकाल लिया।

मेरा लंड देखकर मधु हैरान हो गई, और मुझे अजीब सी नजरों से देखने लगी। फिर मैंने अपना लंड उसके मुँह के आगे किया, और उसको मुँह में लेने का इशारा किया।

जब उसकी तरफ से कोई रिएक्शन नहीं हुआ, तो मैंने उसके सर पर हाथ रखकर अपने लंड की तरफ धकेला, और कहा—

जगत: चूसो बेटी इसको, जैसे उस लड़के का चूस रही थी।

मधु मेरी तरफ देखती रही, और उसने मेरा लंड मुँह में ले लिया। वाह क्या गरमी थी उसके मुँह की। फिर मैं लंड अंदर-बाहर करने लगा, और उसका मुँह चोदने लगा।

कुछ ही देर में मैंने मधु के मुँह को जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। इस बीच मैंने उसकी ब्रा उतार दी, और उसके गोरे चूचों को दबाने लग गया। अब मधु को भी मजा आने लगा था, और वो आँखें बंद करके लंड चूस रही थी।

जब मेरा लंड उसकी थूक से पूरा गीला हो गया, तो मैंने लंड बाहर निकाला, और उसको खड़ा करके उसके होंठ चूसने लगा, और गाँड मसलने लगा।

वो किस में मेरा पूरा साथ देने लगी, और आहें भरने लगी। कुछ देर उसके होंठ चूसने के बाद मैंने उसको बेड पर लिटाया, और उसकी पैंटी उतार दी। फिर मैंने उसकी चूत पर मुँह लगाया, और उसको चाटना शुरू किया।

वो कामुक आहें भर रही थी, और मेरा सर अपनी जाँघों में दबा रही थी। मेरी बेटी की सील अभी टूटी नहीं थी। कुछ देर चूत चूसने के बाद मैं ऊपर आया, और उसके चूचे चूसते हुए उसकी चूत पर लंड रगड़ने लगा।

वो सिसकारियाँ भर रही थी, और उसकी साँसें तेज थीं। फिर मैंने उसकी चूत के मुँह पर लंड टिकाकर एक जोर का धक्का मारा, और मेरा लंड मेरी बेटी की सील तोड़ता हुआ थोड़ा अंदर चला गया।

उसकी चीखें मैंने अपने मुँह से बंद कर दीं, और कुछ और धक्कों के साथ पूरा लंड अंदर घुसा दिया। मेरी बेटी तड़प रही थी, लेकिन मैंने उस पर वजन डालकर उसको कंट्रोल कर रखा था।

फिर मैं धीरे-धीरे उसको चोदने लगा। कुछ टाइम बाद उसकी चूत थोड़ी खुल गई, और उसको मजा आने लगा। फिर मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई, और उसके बूब्स चूसते हुए उसकी ताबड़तोड़ चुदाई करने लगा।

अब वो भी पूरे मजे में थी। हम दोनों कुछ बोल नहीं रहे थे, लेकिन चुदाई पूरे मजे से कर रहे थे। कुछ देर उसी पोजीशन में चोदने के बाद मैंने उसको उल्टा लिटाया, और उसकी टाँगें खोलकर पीछे से लंड चूत में डाल दिया।

अगले 10 मिनट मैंने उसकी चूत चोदी। वो आह्ह आह्ह करके चुद रही थी। फिर मुझे उसका माल निकलता हुआ महसूस हुआ, और मैंने भी अपना माल उसकी चूत में झाड़ दिया।

फिर मैं उठा, और कपड़े पहनने लगा। मैंने वापस जाते हुए उसको बोला—

जगत: आगे से जब भी मन करे, पापा को बता देना।

मधु: ओके पापा।

तो इस तरह से दोस्तों मैं बेटीचोद बन गया। कहानी का मजा आया हो तो लाइक और कमेंट जरूर करना।

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