Jawan biwi ki chudai ki kahani:- सेठ करमचंद, जिनकी उम्र 35-36 साल थी, शाम के लगभग 8 बजे अपने घर पहुँचे। उनका घर शहर से थोड़ा दूर बहुत लंबी-चौड़ी ज़मीन पर बना हुआ था। घर क्या, वह रईसों का बंगला था, करोड़ों का घर। घर के दरवाज़े के पास गाड़ियों के रखने की जगह थी और उसके सामने बड़ा सा गार्डन। उनका ऐसा कारोबार तो गहने-जेवर का था, मगर इसके अलावा भी साइड से धंधा था जिसके बारे में केवल उनकी बीवी और कुछ खास लोग ही जानते थे जो उस धंधे से उनके साथ जुड़े हुए थे।
जब वह घर पहुँचे तो घर के सामने एक फॉर्च्यूनर दिखाई दिया। उसके सामने घर के दरवाज़े के पास एक जैग्वार और उसके आगे एक BMW था जो उनका खुद का था। खुद का बोले तो खरीदा तो उन्हीं का हुआ था, मगर चलाती थी उनकी बीवी। कभी BMW तो कभी जैग्वार, उनकी बीवी ऐसे ही जो दिल में आता उसी में घूमती थी।
Jawan biwi ki chudai ki kahani
फॉर्च्यूनर का नंबर देखकर वह समझ गए कि वह किसकी गाड़ी है। खैर उनके घर के सामने जो रोड बना हुआ था वह इतना चौड़ा था कि दो गाड़ी आ जा सकें और साथ ही इस हिसाब से बना हुआ था कि गाड़ी घुमाना न पड़े। मतलब ओवल शेप की तरह रोड बना हुआ था जिसका नुकीला साइड गेट की तरफ था।
इतना रईस होने के बावजूद भी वह कंजूस था। इतना कंजूस कि उसने ड्राइवर भी नहीं रखा था और खुद ही गाड़ी चलाता था। अगर कंजूसी किसी एक चीज़ में नहीं थी तो वह था उसकी बीवी के शौक पूरे करने में। ऐसा नहीं था कि वह खुद से उसके ऊपर पैसे लुटाता हो। उसके पास इतनी हिम्मत नहीं थी कि अपनी बीवी को किसी चीज़ के लिए मना कर सके। हालाँकि उसकी बीवी कंट्रोलिंग या ड्रामेबाज़ नहीं थी, मगर उसे किसी चीज़ के लिए ना-नुकर पसंद नहीं थी और वह इस मामले में सख्ती बरतती थी और करमचंद का भी उसके सामने बोलने या बहस करने का हिम्मत नहीं होता था।
वह गाड़ी से उतरकर घर के अंदर लिविंग रूम में पहुँचा तो सोफे पर उसी की उम्र का एक लंबा-चौड़ा आदमी सोफे पर आराम से बायाँ हाथ सोफे के हेडरेस्ट पर फैलाए हुए बैठा सिगरेट पी रहा था। उसकी उम्र 40 के आसपास ही थी। मगर जहाँ करमचंद का पेट थोड़ा निकला हुआ था और बदन ढीला था, वहीं वह आदमी लंबा-चौड़ा होने के साथ-साथ मस्कुलर भी था। वह बहुत ही फिट नहीं था। उसका भी पेट निकला हुआ था मगर करमचंद जितना नहीं। ऊपर से वह लगभग 6 फीट का था तो उसका थोड़ा सा निकला पेट समझ नहीं आता था। करमचंद 5 फीट 8 इंच के आसपास ही था।
वह आदमी का रंग काला था। वह ब्लू जींस और काला शर्ट पहना हुआ था। शर्ट का ऊपर का दो बटन खुला हुआ था जिससे उसके सीने के बाल दिख रहे थे। गले में पहना चेन उसके सीने तक लटक रहा था। बाएँ हाथ की कलाई में ब्रेसलेट पहना हुआ था।
वह उसको आराम से बैठा सिगरेट पीते हुए देख बोला,
करमचंद: अरे रघु, तुम इस वक्त यहाँ क्या कर रहा है?
यह सुनकर रघु उसके तरफ देखा, मगर इससे पहले वह कुछ बोलता एक औरत की आवाज़ आई,
गरिमा: रघु को मैंने बुलाया है।
यह सुनकर करमचंद और रघु दोनों की नज़र आवाज़ की दिशा में गई। वह आवाज़ सीढ़ी की तरफ से आ रही थी। जब दोनों की नज़र उधर पड़ी तो एक जवान और बहुत ही खूबसूरत औरत सीढ़ी से उतर रही थी। उसकी उम्र 30 के आसपास लग रही थी और हाइट 5’5″ के करीब थी जो हील पहनकर 5’8″ हो गई थी।
वह भी रघु के शर्ट की तरह काला साड़ी पहनी हुई थी जो उसके गोरे बदन पर अच्छा लग रहा था। उसने एक छोटा सा ब्लाउज पहना हुआ था जिसमें उसकी क्लीवेज कुछ हद तक दिख रही थी। लो वेस्ट साड़ी होने और साड़ी का आँचल बाएँ तरफ करके सीधा बाएँ कंधे के तरफ करके पिन करने के कारण उसकी पेट और नाभि साफ-साफ दिख रही थी। उसकी पेट पूरा सपाट था, ज़रा भी चर्बी नहीं थी और पेट के बीच में नाभि से एक लंबा सा बेली बटन रिंग लटक रहा था जो लाइट में चमक रही थी।
उसकी कमर पतली थी मगर उसके ऊपर उसकी चुंचियाँ और नीचे उसकी गाँड बड़ी थी जिसके कारण उसकी फिगर कर्वी थी। मोटापा ज़रा भी नहीं थी उसमें, बस चुंचियाँ और गाँड बड़ी थी, बाकी जिस्म पर ज़रा भी चर्बी नहीं थी। उसकी गले में एक चेन उसकी क्लीवेज की शुरुआत तक लटक रही थी। माँग में एक छोटा सा सिंदूर और हाथ में क्लच बैग था। वह किसी मॉडल से कम नहीं लग रही थी और दोनों करमचंद और रघु अपना नज़र उस औरत से हटा नहीं पा रहे थे।
वह औरत जब उतरकर उनके पास आई तब करमचंद उससे पूछा,
करमचंद: गरिमा, तुमने बुलाया है मगर क्यों? वो भी इतनी रात को?
यह सुनकर गरिमा उसके तरफ थोड़ा गुस्से से देखकर बोली,
गरिमा: इसलिए क्योंकि तुम्हें तो कुछ याद रहता ही नहीं है। और कोई ज़्यादा रात नहीं हुआ है। 8 ही बज रहे हैं अभी।
करमचंद यह सुनकर सोच में पड़ गए और याद करने की कोशिश करते हुए पूछा,
करमचंद: मुझे याद नहीं रहता? मैं क्या भूल गया गरिमा?
यह सुनकर गरिमा वैसे ही गुस्से से उसे देखती हुई बोली,
गरिमा: अब जब याद नहीं है तो छोड़ो। घर में बैठकर पैसे गिनो, मैं बाहर जा रही हूँ।
गरिमा का मूड खराब देख करमचंद प्यार से दोबारा पूछा,
करमचंद: अरे गरिमा, कम से कम बोलो तो कि आखिर मैं क्या भूल गया और उसके लिए तुम अभी बाहर क्यों जा रही हो।
गरिमा उसे देखकर गुस्से से बोली,
गरिमा: आज कौन सा दिन है?
यह सुनकर करमचंद एक पल सोचकर बोला,
करमचंद: आज मंगलवार है। क्यों?
यह सुनकर गरिमा वैसे ही गुस्से में बोली,
गरिमा: एक्जैक्टली। आज चार दिन हो गए मूवी रिलीज़ हुए और कितने स्पॉइलर्स आ गए हैं इंटरनेट पर। इसलिए मैं फर्स्ट डे ही मूवी देख लेती हूँ, लेकिन तुमने इस बार सब गड़बड़ कर दिया।
यह सुनकर करमचंद को ध्यान आया कि गरिमा क्या बोलना चाह रही है और उसके गुस्से का कारण क्या है। वह बात को संभालने के लिए बोला,
करमचंद: ओह गरिमा। आई ऐम सॉरी, मैं भूल गया था। चलो अब तुम तैयार हो गई तो चलते हैं।
गरिमा उसे गुस्से से देखती हुई बोली,
गरिमा: कोई ज़रूरत नहीं है। मैं फ्राइडे को ही देखने के लिए बोली थी मगर तुमने बहाना बना दिया कि फ्राइडे को काम है, सैटरडे को ले चलोगे। मगर सैटरडे को तुम लेट से आए और टिकट वेस्ट हो गया। कल भी (मंडे) तुम लेट से आए। मैंने मन बना लिया था कि आज जैसे भी मूवी देखूँगी वो भी तुम्हारे बिना। वो तो अच्छा हुआ कि दिन में मैं रघु से बात कर रही थी तो पता चला कि वो आज रात यही मूवी देखने का प्लान कर रहा था और उसने मुझे साथ चलने के लिए कहा। अब मैं रघु से वादा कर चुकी हूँ तो उसी के साथ जाऊँगी।
यह सुनते ही कि रघु के साथ उसकी खूबसूरत और जवान बीवी मूवी देखने जा रही है, वो भी रात के 9 बजे वाला शो, करमचंद थोड़ा घबरा गया। वह गरिमा का गुस्सा देखकर उसे मना करने का सोच भी नहीं सकता था तो वह कुछ और सोचकर संग-संग बोला,
करमचंद: पर गरिमा, इतनी रात का प्लान क्यों बनाया हो? शाम में भी तो जा सकती थी।
यह सुनते ही गरिमा गुस्से से बोली,
गरिमा: सिर्फ तुम्हें ही काम रहता है क्या? बाकी दुनिया निठल्ले बैठे हैं, हूँ? रघु को भी काम रहता है। शाम में उसके पास टाइम नहीं था तो रात का प्लान बनाया है। और मुझे समझ नहीं आ रहा कि तुम्हें क्या इश्यू हो रहा अगर मैं रात का शो देखूँ तो?
करमचंद यह सुनकर प्यार से बोला,
करमचंद: अरे गरिमा, रात को सेफ्टी का इश्यू रहता है इसलिए बोल रहा हूँ।
गरिमा का गुस्सा थोड़ा शांत हो चुका था और वह यह सुनकर हँसते हुए बोली,
गरिमा: हाहा सेफ्टी इश्यू? व्हाट नॉनसेंस! पीकर आए हो क्या? यह शहर है, कोई जंगल नहीं। और ऐसे भी अपनी गाड़ी से जाना-आना है, कोई पब्लिक ट्रांसपोर्ट तो यूज़ करना नहीं है।
करमचंद यह सुनकर थोड़ा शर्मिंदा हो गया। उसे ध्यान आया कि गरिमा के सामने बेकार का बहाना चलने वाला नहीं है, फिर भी वह कोशिश कर रहा था कि गरिमा को जाने से रोके। वह यह सुनकर बोला,
करमचंद: हाँ फिर भी।
गरिमा यह सुनकर इरिटेट होकर पूछी,
गरिमा: फिर भी क्या?
यह सुनकर रघु जो इतनी देर से चुपचाप गरिमा के बगल में खड़ा सब सुन रहा था, वह कड़क आवाज़ में बोला,
रघु: ऐ सेठ, काहे को फालतू का बकवास कर रेला है। सीधा-सीधा बोलना कि तू नहीं चाहता तेरी बीवी अपुन के साथ फिल्म देखने जाए।
बात तो सही थी मगर करमचंद यह साफ-साफ बोल नहीं सकता था। रघु को तो वह बोल सकता था मगर गरिमा के सामने बोलने से उसे डर था कि वह गुस्सा न हो जाए। वह न ही “हाँ” बोल सकता था और न ही यह बोल सकता था कि उसे गरिमा का रघु के साथ जाने में कोई इश्यू नहीं है। इसलिए वह बात को घुमाकर बोला,
करमचंद: रघु, मैं अपनी बीवी से बात कर रहा हूँ, तुम बीच में मत बोलो।
यह सुनकर रघु गुस्सा हो गया,
रघु: ऐ सेठ, तुम्हारी बीवी है तो साला तुमको लेकर जाना चाहिए ना इसे। साला तुम इसको फिल्म दिखा देता तो इतना ड्रामा नहीं होता। और ऐसे भी अपुन को शौक नहीं तुम्हारी बीवी को घुमाने का। वो तो अपुन प्लान बनाएला था आज और तुम्हारी बीवी भी प्लान बनायेली थी तो सोचा कि साथ ही देख लेंगे फिल्म। अपुन को क्या मालूम कि तुम दोनों के बीच क्या ड्रामा चल रेला है।
यह सुनकर गरिमा फिर से गुस्सा होने लगी और वह कभी रघु को देखती हुई उसकी बात सुनती तो कभी गुस्से से करमचंद के तरफ देख रही थी। रघु का यह बोलना कि उसे गरिमा को घुमाने का कोई शौक नहीं है गरिमा के ईगो को थोड़ा हर्ट करता है, मगर वह इसका ज़िम्मेदार अपने पति को मान रही थी यह सोचकर कि रघु ऐसा इसलिए बोला क्योंकि उसका पति बेवजह के ड्रामे कर रहा था।
रघु गरिमा को देखकर बोला,
रघु: ऐ सेठानी, पहले अपना घरेलू ड्रामा निपटाओ। अपुन को इस लफड़े में नहीं पड़ने का।
एक तो गरिमा अपने पति करमचंद पर पहले से ही गुस्सा थी कि वह उसे मूवी दिखाने का वादा करके भूल गया था, ऊपर से अभी उसका रोक-टोक देख उसका और मूड खराब होने लगा।
वह गुस्से से अपने पति को देखकर बोली,
गरिमा: ऑफ हो क्या ड्रामा लगा रखे हो जाने वक्त। एक तो तुम बोलकर भी मुझे मूवी दिखाने नहीं ले गए और ऊपर से जब रघु मुझे ले जा रहा है तो तुम ड्रामा कर रहे हो।
फिर वह रघु के तरफ देखकर बोली,
गरिमा: और तुमसे कितनी बार कहा है मुझे सेठानी मत कहा करो। ऐसा लगता है जैसे मैं कोई बुढ़िया हूँ।
यह सुनकर रघु हँसने लगा,
रघु: हाहाहा।
रघु को हँसता देख गरिमा उसे बनावटी गुस्से से देखी तो रघु हँसते हुए बोला,
रघु: अच्छा ठीक है, नहीं बोलेगा अपुन। लेकिन यह अपने सेठ को बोलो साला अपुन का मूड खराब नहीं करने के लिए।
गरिमा यह सुनकर अपने पति को देखकर बोली,
गरिमा: देखो, बेवजह का हम दोनों का मूड खराब मत करो। मुझे पता है तुम दोनों के बीच नहीं बनता है लेकिन यह तुम दोनों की आपस की बात है। इसके लिए मेरा मूड खराब मत करो। अभी यह मुझे मूवी दिखाने ले जा रहा है और मैं जा रही हूँ। दैट्स इट। अभी एक वर्ड भी तुम्हारे मुँह से निकला तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।
करमचंद यह सुनते ही चुप हो गया। गरिमा उसे एक नज़र गुस्से से देखी और फिर रघु के तरफ देखकर बोली,
गरिमा: चलो रघु, नहीं तो लेट हो जाएगी और मूवी का इनिशियल पार्ट मिस हो जाएगी।
रघु यह सुनकर बोला,
रघु: चलो सेठानी।
यह सुनकर गरिमा रघु को गुस्से से देखी तो रघु हँस दिया,
रघु: हाहाहा।
गरिमा उसको हँसता देख बोली,
गरिमा: फिर? अब तुम भी मेरा मूड खराब मत करो।
रघु हँसता हुआ बोला,
रघु: अच्छा ठीक है, अब नहीं बोलूँगा। चलो।
यह सुनकर गरिमा रघु का बाँह पकड़ती हुई बोली,
गरिमा: चलो।
और दोनों दरवाज़े के तरफ चल दिए।
करमचंद यह सब चुपचाप देख रहा था। उसे खुद पर गुस्सा आ रहा था कि वह क्यों गरिमा को फिल्म दिखाना भूल गया। वह दोनों को जाते हुए देखने लगा। उसकी बीवी जो कुछ सेकंड पहले उसके सामने खड़ी उसी की हाइट की लग रही थी और उसके आँखों में देखती हुई बात कर रही थी, वह रघु के बगल में उससे लगभग 4-5 इंच छोटी लग रही थी। चलते वक्त उसकी बड़ी गाँड हिल रही थी और साड़ी गाँड पर टाइट बँधे होने के कारण गाँड का पूरा शेप पता चल रहा था। उसके ऊपर उसकी पीठ बैकलेस ब्लाउज में लगभग पूरी नंगी थी जो गोरी होने के कारण रोशनी में चमक रही थी।
कुछ सेकंड तक करमचंद अपनी बीवी को देखता रहा फिर जैसे ही रघु दरवाज़े के बाएँ तरफ घूमा अपना फॉर्च्यूनर के तरफ जाने के लिए तो गरिमा उसकी बाँह पकड़ी बोली,
गरिमा: जैग्वार में चलते हैं।
करमचंद यह सब देख रहा था। अगले पल वह गरिमा को रघु के तरफ चाबी बढ़ाते हुए देखा। गरिमा रघु को चाबी देती हुई बोली,
गरिमा: यह लो।
रघु गरिमा के हाथ से चाबी लिया और गाड़ी के दूसरे तरफ जाकर गरिमा के लिए दरवाज़ा खोल दिया। गरिमा रघु के तरफ मुस्कुराती हुई देखी और बोली,
गरिमा: थैंक यू।
रघु फिर ड्राइवर सीट के तरफ आकर गाड़ी में बैठ गया और गाड़ी वहाँ से चली गई। करमचंद यह सब देखने के बाद सोफे पर बैठने के लिए घूमा कि तभी उसकी नज़र घर की नौकरानी पर पड़ी जो खुद दरवाज़े के तरफ देख रही थी।
करमचंद उसको देखकर बोला,
करमचंद: क्या देख रही हो? जाओ चाय बनाओ।
करमचंद की आवाज़ सुनते ही नौकरानी चौंककर उसके तरफ देखी और उसकी बात सुनते ही हड़बड़ा कर “जी साहेब” बोलकर किचन के तरफ चली गई। करमचंद फिर सोफे पर बैठ गया और अखबार लेकर पढ़ने लगा।
लगभग 5 मिनट बाद उसकी नौकरानी चाय लेकर आई और चाय टेबल पर रखकर बोली,
नौकरानी: साहेब चाय।
करमचंद अखबार पढ़ते हुए बिना नौकरानी के तरफ देखे “हम्म” करके अखबार पढ़ते रहा। कुछ सेकंड बाद वह चाय लेने के लिए अखबार से नज़र हटाकर टेबल के तरफ हाथ बढ़ाया तो देखा कि नौकरानी वहीं खड़ी थी।
करमचंद उससे पूछा,
करमचंद: अब क्या हुआ? यहाँ खड़ी क्यों हो?
नौकरानी घबराती हुई उससे बोली,
नौकरानी: जी साहेब, पूछना था कि खाने में क्या बनाऊँ।
यह सुनकर करमचंद थोड़ा गुस्से में बोला,
करमचंद: अरे तो यह गरिमा से पूछना था ना। वो जा रही थी तो उसे घूर-घूर कर देख रही थी तो यह पूछने का ख्याल नहीं आया?
नौकरानी घबराती हुई फिर बोली,
नौकरानी: साहेब, मेमसाहेब से पूछा था मैंने। वो बोली कि वो बाहर में ही खाना खाएगी। आपके लिए आपसे पूछकर कुछ बना दूँ।
यह सुनकर करमचंद चाय की चुस्की लेकर बोला,
करमचंद: ठीक है। जो भी मन करे बना दो।
नौकरानी सिर हिलाती हुई “जी साहेब” बोलकर वहाँ से चली गई। कुछ मिनट बाद करमचंद चाय पीकर ऊपर अपने कमरे में चला गया। नौकरानी उसको ऊपर जाते देख धीरे से बोली,
नौकरानी: खडूस कहीं का। बीवी के सामने मुँह नहीं खुलता है और मेरे ऊपर रौब दिखाता है, हूँह।
आगे क्या हुआ, पढ़िए अगले पार्ट में।