स्कूल टीचर की बेटी की चुदाई

हेलो दोस्तों स्वागत हैं आपका antarvasnastory.in की वेबसाइट पर।  आज की यह कहानी मेरे स्कूल टीचर की बेटी के साथ चुदाई के ऊपर हैं। आशा करता हूँ की आपको यह कहानी जरूर पसंद आएगी तो इस कहानी को ध्यान से जरूर पढ़ें। तो चलिए कहानी शुरू करते हैं

Teacher ki beti ki chudai hindi sex story

यह कहानी उन दिनों की है जब मै 10वी कक्षा में था।  मैं पढ़ने में अच्छा था और बाकी स्कूल एक्टिविटी में भी बहुत अच्छा था।  एक दिन की बात हैं मैं अपने गणित के टीचर के पास अपने सवाल का हल पूछने जा रहा था।

वैसे तो मैं अपने ज्यादातर जवाब खुद ही  ढूंढने की कोशिस करता हूँ परन्तु उस दिन मैंने बहूत कोशिश की परन्तु मैं उसका जवाब नहीं निकाल पा रहा था, तो मैंने निर्णय लिया की मैं अपना समय व्यर्थ ना करते हुए अपने टीचर के पास चले जाता हूँ। 

मैं स्टाफ रूम की ओर बढ़ा हमारा स्कूल काफी बड़ा हैं और स्टाफ रूम भी दूर था।  मै स्टाफ रूम के पास पंहुचा तो मैंने चिल्लाने और रोने की आवाज सुनी। मैंने आगे बढ़कर देखा तो हमारे गणित के अध्यापक अपनी बेटी को जोर से डाँट मार रहे थे और उनकी बेटी सुनकर रो रही थी।

मैं दरवाजे पर जाके खड़ा हुआ तो सर ने मुझे देखा और कहा अरे सुभम आओ बेटा क्या हुआ? उनकी बेटी सीमा ने मुझे देखा और अपना रोटा हुआ मुँह छुपा लिया। वो नहीं कहती थी की कोई उसे रोते  हुए देखे पर मै उसे देख चूका था।

मैं स्टाफ रूम में अंदर गया और सर से पूछा कि  मुझे इस सवाल में problem हो रही हैं।  सर ने मुझे समझाना चालू किया तो मेरी नजरे बार बार सर की बेटी के ऊपर जा रही थी।  वैसे तो हमारे सर की शक्ल से लगता नहीं था की उनकी इतनी सुन्दर लड़की भी होगी।

सर ने मुझे समझाया और फिर मुझे भेज दिया।  आज से पहले मैंने कभी सर की बेटी को देख के इतना गौर नहीं किया था, पर उस दिन मुझे पता नहीं क्या हुआ पहली बार ऐसा लगा जैसे की सर की बेटी को यही पकड़ के किस कर लू और उसके आंसू पोंछ लू।

उस समय मैं वहां से चला गया।  अगले दिन मैं स्कूल में आया और पढ़ने के लिए और लाइब्रेरी में चला गया।  मै बैठा था ही की सामने से सर की बेटी मेरी और चलकर आ रही थी।  उसने स्कर्ट पहन रखी थी और उसकी गोरी टांगें और सेक्सी फिगर देख मेरा लंड उचकारे मारने लगा।

वो मेरे पास आकर बैठ गई और मुझसे कहने लगी की कल के  बारे में किसी को मत बताना।  फिर हम दोनों बाते करने लगे।  अब यह हमारा रोज का सिलसिला हो गया था।  कुछ दिन के बाद हम दोनों एक दूसरे के काफी करीब आ चुके थे।

हम दोनों अपनी सभी बाते आपस में शेयर करने लगे थे। एक दिन मेने अपने सर की लड़की को प्रपोज मार दिया।  और सर की लड़की ने मुझे मना नहीं किया और उसने भी मुझे हाँ कर दी।  हम दोनों साथ में घूमने जाने लगे।  एक दिन हम दोनों मूवी देखने गए हम मूवी देख रहे थे तो मूवी में किसिंग सीन और एक दो गंदे सीन थे।

उसे देख हम दोनों को भी किश करने का मन किया।  मैं और मेरे सर की लड़की एक दूसरे को किस करने लगे।  हमने वहाँ बैठ कर किस तो कर ली पर हम दोनों का मन किश से आगे बढ़ने का था।

हमारी मूवी खत्म हुई और मैं अपने सर की लड़की को उसके घर पर छोड़ अपने घर की और निकल पड़ा।  हम दोनों अब किस से आगे बढ़ने की सोच रहे थे पर हमें ओयो  रूम पर जाने में डर लग रहा था।  एक दिन मैं सर के घर अपने गणित के सवालों का जवाब पूछने चला गया।

सर ने मुझे घर के अंदर बुलाया और मुझे सोफे पर बिठा दिया। सर ने मुझे पानी के लिए पूछा, मैंने बोला जरूर सर तो सर ने अपनी बेटी को आवाज लगाई सर की बेटी आई और उसने पूछा  क्या हुआ पापा? तो सर ने बोला हम दोनों के लिए पानी ले आओ और कॉफी बना दो बेटा।

तो सर की बेटी ने मुझे देखा और मुस्कुरा के पानी लेने चली गई।  वो पानी लाई और कॉफी बनाने लगी।  मैंने सर को बोला लाओ सर मै ये गिलास रख के आ जाता हूँ।  सर ने बोला ठीक हैं बेटा।  मैं किचन में गया तो सर की बेटी हमारे लिए कॉफी बना रही थी।  

मैं गया और मैंने पीछे से जाके सर की बेटी को पकड़ लिया और उसकी गर्दन पर किश करने लगा।  उसने मुझे धक्का देते कहा अरे तुम मुझे पिटवाओगे क्या? पापा ने देखा तो हम दोनों की पिटाई हो जाएगी।  फिर मैं वापसी आके सर से अपने सवालों का जवाब पूछने लगा।  

सवालों को हल करते करते हमें काफी समय लग गया था, तो सर ने बोला बेटा अब खाना खा कर ही जाना।  इतने में सर की पत्नी का कॉल आ गया सर की पत्नी गाँव से आ रही थी तो उन्होंने उन्हें स्टेशन से लेने के लिए बुलाया।  

तो सर ने बोला बेटा मैं तो खा नहीं पाउँगा पर तुम खाना जरूर खा के जाना मैं निकल रहा हूँ स्टेशन के लिए।  सर अपनी कार ले कर चले गए अब सर की बेटी और मुझे ऐसे मौके मोके की तलाश तो पहले से ही थी।  

जैसा की आप जानते हैं की सर की पत्नी का फ़ोन आ गया था और सर बिना खाना खाए घर से निकल गए थे।  सर तो घर से जा चुके थे अब घर पे मैं और सर की बेटी बचे थे।  हम दोनों को तो ऐसे मौके की तलाश पहले से ही थी। 

 माफ़ करना दोस्तों मैं आपको अपने सर की बेटी का नाम बताना तो भूल ही गया था। मेरे सर की बेटी का नाम अनु हैं। अनु मेरे पास आई और मेरे गोद में आके बैठ गई।  उसने मुझे अपनों बाहो में लिया और मुझे किस करने लगी।  

अनु ने मुझसे कहा की मै सोच ही रही थी की काश आज तुम हमारे घर पे आते।  मैंने अनु से पूछा की तुम्हारे माँ और पापा कब तक आ जाएंगे।  तो अनु ने बताया की जाने में करीब 1  घंटा और आने में 1 घंटा टोटल मिलाकर 2 घंटे लग ही जाते हैं।  

तो मैंने कहा अब हमारे पास (1 -1 /2  घंटे ) का समय हैं।  तो अनु मुझे अपने रूम में लेकर गई और मुझे अपने बिस्तर पर लिटा दिया और उसने अपने कपडे उतारना चालु कर दिए।  जैसे ही अनु ने अपनी टी-शर्ट उतारी उसके चूचे मेरी नजरो के सामने आये।  

उसके चूचे तरबूज की तरह थे बड़े बड़े।  मैंने अनु के चूचो को अपने हाथो में लिया और उन्हें चूमने लगा।  अनु में मेरे कपडे उतारना सुरु कर दिए और फिर मेरी पैंट भी उतार दी। मेरा लंड तो पहले से ही अनु की चूत  मारने के लिए उतावला हो रखा था।  

अनु ने मेरे लंड को अपने हाथो में लिया और उसे हिलाने लगी और साथ साथ वो मुझे किस करती।  अनु अब अपने घुटनों के बल बैठी और अपने चुचो के बीच मेरे लंड को दबा लिया।  मैंने भी अपने लंड को उसके चूचो पर रगड़ना चालु किया।  

रगड़ते रगड़ते  मैं अपना लंड उसके मुँह के पास ले आया।  अनु ने अपना मुँह खोला और मैंने अनु के  मुँह के अंदर अपने लंड को डाल दिया।  जब मेरा लंड अनु के मुँह में गया और अनु ने चूसना चालु किया तो मेरी झुरझुरी सी छूट गई।  

उसके मुँह की भाप, मेरे लंड को और भी सख्त बना रही थी।  अब अनु ने मेरे लंड को अपने थूक से पूरा गीला तो कर ही दिया था तो मैंने अनु को खड़ा किया और बिस्तर पर लिटा दिया।  मैंने अनु की टाँगो को चौड़ा किया और उसकी चूत के ऊपर अपने लंड को रगड़ने लगा। 

साथ ही अनु अपनी चूत के ऊपर हाथ फेर रही थी।  मैंने अनु की चूत के ऊपर थूका और उसकी चूत को गीला कर अपने लंड को उसकी चूत के अंदर डाल दिया।  मेरा लंड अनु की चूत के अंदर जाते ही अनु की चीख निकल आई।  अनु ने बोला सुभम तुम तो बड़े गंदे हो तुमने तो मेरी चीखे निकलवा दी। 

अनु ने कहा आज तक मैं अपनी उंगलियों से काम चला  रही थी अब मेरी चूत को उसका प्यार भी मिल गया।  मेरी चूत की प्यास बुझाने अब तुम जो मेरे पास आ गए हो।  मैं अनु की चूत में अपने लंड को अंदर बहार अंदर बाहर करता रहा और कुछ दे बाद उसकी चूत के ऊपर ही अपना सारा वीर्य निकाल लिया।  

अनु बैठी और मेरे लैंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और बोली फिर पता नहीं तुम्हारा लंड कितने दिनों बाद मिलेगा। हमारे पास अभी भी आधे घंटे का समय बचा व था तो हम दोनों  उस टाइम में और भी मजे लेना चाहते थे।  

मैंने अनु को अपने गोद में उठाया और उसे चूमने लगा। 

अनु ने कहा क्या तुम मेरी गांड मारना पसंद करोगे। 

मैंने अनु को बोला है क्यूँ नहीं। 

अनु दूसरे  और वह से तेल लेकर आई और मेरे हाथो में तेल की बोतल थमा दी।  

मैंने अनु को घोड़ी बनाया और उसकी गांड के छेद के ऊपर तेल लगाया और फिर अपने लंड के ऊपर भी लगाया ताकि अंदर घुसाने में कोई दिक्कत ना हो।  मैंने अनु की गांड में अपने लंड को घुसाना चालु किया अनु की गांड बहुत टाइट थी और मेरा लंड का सुपाडा इतना टाइट नहीं हो पाया था। 

अनु उठी और मेरे लंड को टाइट करने के लिए उसे हिलाने लगी।  वो कभी अपने चुचो के बिच मेरे लंड को डालती और कभी उसे हिलाती।  जैसे ही मेरा लंड दुबारा से टाइट हुआ अनु फिर से घोड़ी बन गई।  मैंने थोड़ी सी जान लगाई और अनु की गांड में धीरे धीरे अपने लंड को अंदर घुसाने लगा।  

जैसे ही अनु की गांड के छेद के अंदर मैंने अपना पूरा लंड घुसाया तभी अनु बिस्तर पर लेट गई और दर्द से (आअह  आअह) करने लगी।  पर अभी अनु का गांड मरवाने का शौक जो पूरा करना था।  

मैंने उसे दुबारा घोड़ी बनाया और उसकी गांड में इस बार थोड़ा आराम से अंदर बहार अंदर बहार करने लगा।  कुछ देर ऐसे ही करते मैंने उसे सीधा किया और कभी उसकी चूत में अपने लंड को डालता और कभी उसकी गांड में।  

मेरे जैसे ही निकलने को हुआ मैने अपना सारा वीर्य अनु की गांड के छेद के अंदर ही भर दिया।  फिर हम दोनों कुछ दे ऐसे ही लेटे रहे।  और मैं फिर तैयार हुआ और अपने अनु को किस करके अपने घर की और निकल पड़ा।  

तो दोस्तों यह कहानी यही पर समाप्त होती हैं।  आशा करता हु की आपको मेरी यह कहानी जरूर पसंद आई होगी। धन्यबाद।

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