Maa Ne Karai Aunty Ki Chudai :हैलो दोस्तो, मैं आपका दोस्त राहुल एक नयी सेक्सी कहानी के साथ ओर भी अपनी सगी आंटी की कहानी, कविता को यकीन नहीं हो रहा था की ये सब कैसे हो गया।
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सारिका की बात अलग थी लेकिन न चाहते हुए भी राहुल उसके जिस्म के साथ खेल गया अब कविता राहुल के सामने उसकी बुआ नहीं रही थी न ही राहुल कविता के लिए उसका नन्हा भतीजा।

अब उन दोनों के बीच अब वासना के नए रिश्तो के फूल महकने लग गए थे, कविता को इस बात की शर्म और गलती का एहसास भी था की वह अपनी सबसे अच्छी दोस्त और नातिन सारिका को धोका दे रही है कविता एक तरफ वासना की आग में जल रही थी तो दूसरी तरफ लज्जा की सागर में डूब भी रही थी।
ये सब सोच कविता सामने लेटी सारिका को देख रही थी सारिका जो अब आँखे बंद कर सो चुकी थी पर पीछे राहुल सोया नहीं था, उसे अब नींद भी कैसे आती वह अपने हाथो में लंड लिये ख़ुशी से हिला रहा था।
अब आंटी आखिरकार मान ही गयी, पर उसे नहीं पता था की उसकी आंटी न चाहते हुए ये सब किया था उसे तो यही लगा की आंटी के साथ अब उसका रास्ता साफ़ है और अब वह कुछ भी कर सकता है अगले 10 मिनट बिस्तर में रजाई के अंदर कोई हरकत नहीं हुई सभी को शांत देख राहुल ने अपनी माँ की तरफ देखा की वह सो गयी या नहीं और फिर कविता के कान के पास आकर धीमी आवाज़ में बोला: Maa Ne Karai Aunty Ki Chudai
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राहुल: आंटी! सो गयी क्या? कविता ने झट से अपनी आँखे खोली और सर घुमा कर देखा तो राहुल उसके बिलकुल करीब था, कविता उसे डांटना चाहती थी पर जो हुआ उसे एक पल याद कर उसके होंटो पर शर्म भरी मुस्कान आ गयी, वह चाह कर भी छुपा न पायी वह अपनी आँखों के इशारे से राहुल से पूछा:

आंटी: क्या हुआ पूछी,
राहुल धीमी आवाज़ में बोला: मज़ा आया?कविता छुपाना भी चाहती तो छुपा नहीं पाती फिर उसने हामी में सर हिला दिया।
राहुल: माँ सो गयी क्या फिर कविता ने एक बार सारिका को देखा और फिर पलट कर राहुल को बोली:
आंटी: हाँ तो?
राहुल: बहार चले क्या? दोनों ही धीमी आवाज़ में बात कर रहे थे ताकि सारिका उठ न जाए।
कविता: क्यों?
राहुल: चलना और मज़े करेंगे।
कविता: नहीं नहीं… सो जाओ अब ।
राहुल अपने हाथ बढ़ा कर कविता के सामने लाया और उसकी नाइटी के ऊपर से बूब्स पर पकडे और दबाते हुए बोला:
राहुल: आपका तो हो गया मेरा क्या? कविता के जिस्म को राहुल के ऐसे पकड़ने पर दुबारा मस्ती आने लगी वह बोली: नहीं प्लीज अभी नहीं सारिका यही है।
राहुल कहा मानने वाला था वह बोला: इसी लिए तो बहार चलते है ना।
कविता: नहीं मुझे नहीं आना प्लीज ,कविता के जुबान पर ना भले थी पर मन में उसके भी हा थी की वह जाए पर सारिका को धोका देने का एहसास उससे पकडे हुये था। राहुल अपने तने लंड के अकार को कविता के कपडो के ऊपर से उसकी गांड पर दबाने लगा, उसके दबाने से कविता को अपनी गांड पर उसके बड़े लंड का एहसास होने लगा और वह पिछली रात को बार में मिले लड़के के साथ हुई चुदाई को याद करने लगी, कल रात को किये सेक्स का मज़ा उसके तन्न बदंन को ललचाने लगा,
कविता की चूत में राहुल के लंड को लेने की भूख उमड़ने लगी लेकिन वह खुद को रोक रही थी और बोली:
आंटी: प्लीज ज़ोर मत दो। Maa Ne Karai Aunty Ki Chudai
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राहुल: राहुल उसके कान को काटता हुआ बोला: क्यों? ये कहता हुआ वह अपनी कमर और आगे बढ़ाता हुआ अपना लंड उसकी गांड पर और अच्छे से दबाने लगा कविता के मुह से एक हलकी सी सिसकारी निकल गयी वह अपने जिस्म की भूख के सामने हार मानती हुई बोली:
आंटी: ममम… ठीक है तुम जाओ मैं आती हूँ।
राहुल के मन में ख़ुशी की फुलझड़ी फूट पड़ी और वह बोली: ओके आंटी मैं जाता हूँ बहार आप आना और आवाज़ मत करियेगा।
कविता: पर सारिका? वह उठ गयी तो?
राहुल: जब बहार आओगे तो डोर को बहार से लॉक कर दीजियेगा आते वक़्त।
कविता: ओके… अब जाओ तुम , इसके बाद राहुल धीरे से रजाई से निकला और दबे पाँव बिना आवाज़ किये रूम का दरवाज़ा खोला और लिविंग रूम में जा बैठा।
यहाँ कमरे के अंदर कविता शान्ति से आँखे बंद कर लेटी हुई थी वह कुछ 5 मिनट खुद को इन सबके लिए तैयार करना चाहती थी, वह अपने मन को सारिका को धोका देने के लिए तैयार कर रही थी जब अचानक से सारिका बोली:
सारिका:जाओगी नहीं क्या? कविता चौक उठी और आँखे खोल कर सारिका को देखती रही सारिका बोली: घबराओ मत मैं सोई नहीं थी मैंने सब सुन लिया कविता अपनी आँखे ज़ोर से वापस बंद कर अपने सर नीचे किया।
सारिका: सारिका अपनी हाथ बढ़ा कर उसके गाल को उठाती हुई बोली: क्या हुआ तुम्हे? कविता लम्बी सांस छोड़कर बोली: पता नहीं ये सब कैसे हुआ।
सारिका: मुझे तो पहले ही शक था उस पर, लेकिन तुझ पर नहीं था लेकिन अभी तुम दोनों की काना फूसि सुनकर पता चल गया की मेरी बंद आँखों के सामने क्या हो रहा है।
कविता: यार ऐसा नहीं है।
सारिका: शठ! सारिका थोड़ी आगे बढ़ी और कविता की होंटो को चूमती हुई बोली: अगर राहुल किसी और औरत के साथ सेक्स करता तो मैं उसे नहीं छोड़ती पर तुम हो… अगर मैं उसकी माँ हूँ तो तुम भी उसकी आधी माँ हो।
कविता: प्लीज मुझे उसकी माँ मत बनाओ अब वरना मेरा मन हमेशा के लिए ख़त्म हो जायेगा।
सारिका ये सुन्न मुस्कुरा गयी वह ये सोच कर मुस्कुरायी की कविता बस माँ शब्द से ही मन ख़राब कर बैठी, अगर उसे पता चले की इस घर में माँ बेटे के बीच क्या हो रहा है तो वह मर ही जाए।
सारिका: वक़्त आने दे तुम्हे सब मन को भायेगा अभी तू बेझिझक जा।
कविता: सरु… मैं तुझे धोका तो नहीं दे रही न?
सारिका: नहीं कवी… अगर तुम दोनों ये मेरे पीठ पीछे करते तो हाँ शायद लेकि मैं तुझे जानती हूँ जब मैं तुम दोनों की बाते सुनी तो हाँ गुस्सा तो आया मुझे पर फिर मैं तुम्हारे बारे में सोची कल रात के बारे में सोची की तू किश तरह से अपने सुखो से दूर थी और कल कितनी खुश हुई उसे पा कर। Maa Ne Karai Aunty Ki Chudai
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कविता की आँखों में हलकी सी नाम आ गयी और वह बोली: सरु तू सबसे बेस्ट है यार।
सारिका मुस्कुराती हुई एक और बार कविता की होंटो को चूम लेती है और बोली: चल अब जा और मेरे बेटे को इतना वेट मत करवा।
कविता: हफ़… पता नहीं क्या से क्या हो रहा है ये सब।
सारिका: शठ… ज़्यादा सोच मत और जा अब।
कविता: मममम… पर सारिका तुरंत अपनी ऊँगली कविता की होंटो पर रखी और बोली: तू जाती है या मैं अपना मन बदलूँ?
कविता: ओके ओके कविता रजाई के अंदर से निकल रही थी जब सारिका बोली:
सारिका: और सुन…
कविता: हाँ बोलो।
सारिका: डोर लॉक मत करना।
कविता: क्यों?
सारिका: जैसा कह रही हूँ करना चल जा अब और हाँ राहुल को मत बताना की दूर लॉक नहीं है।
कविता मुस्कुराकर कमरे से निकल गयी और सारिका उसे दिखती हुई वापस अपनी रजाई ओड ली, कविता के रूम से निकलते ही लिविंग रूम में ख़ुशी से झूमता हुआ राहुल खड़ा मुस्कुराने लगा कविता लिविंग रूम में जाकर बैठ गयी।
राहुल उसके पास आकर बैठन गया और बोला: माँ उठी तो नहीं?
कविता: नहीं पर… पर मुझे कुछ पूछना है तुमसे।
राहुल: हाँ पूछिए?
कविता: हम कुछ गलत तो नहीं कर रहे न?
राहुल: मुझे तो नहीं लग रहा।
कविता: क्यों? मैं तुम्हारी बुआ हूँ गलत नहीं था क्या जो तुमने किया? राहुल के मन में अब था की कैसे अपनी आंटी को समझाए की ये गलत नहीं है कही ऐसा न हो की कविता का मन बदल जाये।
राहुल: जो किया मैंने उससे आपको बुरा लगा क्या? सच बताइयेगा।
कविता नीचे देख कुछ पालो के लिए शांत रही और फिर एक राहत की सांस छोड़ कर बोली: नहीं।
राहुल: तो कैसा लगा? कविता वापस राहुल को देख पूछा:
कविता: तुम्हे कैसा लगा?
राहुल: सच बताऊँ?
कविता: हाँ बोलो।
राहुल: आप बहुत खूबसूरत हो आंटी आज सुबह से जब से आपको देखा तब से पता नहीं क्यों प्यार सा हो गया है, राहुल काफी तेज़ था वह अपनी मीठी बातो के जाल बुन्न रहा था क्यों की उसे इसके अलावा और कोई चारा नहीं दिख रहा था उसकी बाते कविता को मन ही मन खुश भी कर रही थी। Maa Ne Karai Aunty Ki Chudai
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कविता:कविता ने उससे पूछा: ऐसा क्या देखा मुझमे?
राहुल: सब कुछ आपका चेहरा आपका जिस्म आपका लाड सब कुछ आंटी मुझे आपका सब पसंद है।
कविता: और?
राहुल: बोल के नहीं बताऊंगा और क्या क्या पसंद है।
कविता: तो? राहुल सोफे से उठ कर कविता के सामने जा खड़ा हुआ और अब कविता अपना सर उठा कर उसकी आँखों में देखे जा रही थी।
राहुल अपने हाथ बढ़ा कर कविता के कंधे को पकड़ उसे सोफे पर आराम से बैठा दिया।
कविता ने इस पर कुछ नहीं पूछी और बस जो राहुल करता रहा उसे करने दिया, कविता को सोफे पर पीठ टिका कर बैठने के बाद राहुल उसके सामने अपने घुटनो पर ज़मीन पर बैठ गया।
कविता और राहुल एक दूसरे की आँखों से नज़र हटा ही नहीं रहे थे कविता की आँखों में आँखे डालता हुआ राहुल उसकी नाइटी
के निचले हिस्से को पकड़ उठाने लगा कपडे को उठाकर घुटनो तक रख वह झुका और उसकी चिकनी मुलायम टाँगो को अपने एक हाथ में लेकर चूम लिया।
कविता हलके से आँखे बंद कर ली और वापस देखने लगी राहुल ऊपर जाता हुआ अपना अगला चुम्बन कविता के घुटनो पर दिया कविता की होंटो पर मुस्कान आ गयी और आँखों में धीरे धीरे जिस्म की भूख का रंग उतरने लगा।
राहुल और आगे बढ़ता हुआ कविता की गाउन को पकड़ ऊपर को धकेला जल्द ही कविता अपनी नंगी जांगे दिखाने लगी कविता ने अपनी जांगे चिपका कर रखी थी जिसे राहुल ने थोड़ा आगे बढ़कर चूम लिया, चूमते चूमते वह ऊपर धीरे धीरे बढ़ने लगा। Maa Ne Karai Aunty Ki Chuda
फिर अचानक से राहुल सर उठाकर कविता की नज़रो से नज़र मिला कर देखा तो कविता समझ गयी वह एक पल के लिए सोचा होगा फिर अपनी सारी शर्म हया और समाज और रिश्ते नातो को भूल अपनी चिपकी जांघो को फैला दिया और राहुल मुस्कुराता हुआ आगे बढ़ा,कविता की नाइटी को उठाकर पहली बार अपनी आंटी की चूत को देखने लगा।
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राहुल कविता की चूत को देख बोला: आप शेव भी करती हो रेगुलर?
कविता: आए…हाँ कुछ ही दिन पहले की थी।
राहुल: पर ये तो लग रहा है की आज ही की हो बाल तो न मात्रा ही है, वैसे ये सच भी था की कल रात बार में मिले अविनाश के साथ हुई चुदाई के बाद कविता आज सुबह ही अपनी चूत की शेव की थी, पर कविता ने ये अविनाश के लिए किया था लेकिन ये कभी नहीं जानती थी की उसे राहुल के साथ भी मौका मिलेगा.
कविता अपनी चूत छुपाती हुई आगे बोली: यहाँ आने से पहले की थी उसी लिए।
राहुल: चलो अच्छा हुआ।
कविता: क्या?
राहुल: राहुल कुछ नहीं बोला और कविता की जांघो को और फैलता हुआ उसके बीच घुस कर अपना सर नीचे ले गया कविता की उभरी मुलायम चूत के दाने को चूम गया फिर कविता के मुँह से हलकी आह निकल गयी, उसके हाथ खुद ही अपने ऊपर पहनी नाइटी को पकड़ उसे और ऊपर उठाती हुई राहुल को अपनी चूत का पूरा नज़ारा दिया और खुला रास्ता दिखाने लगी, राहुल अपनी जीभ निकाल कर उसकी चूत के दाने पर गोल गोल घूमाने लगा।
जब जब राहुल की जीभ उसकी दाने पर टकराती तब तब कविता का रोम रोम रोमांच की लहरों से टकरा जाता और कविता को अब कुछ भी गलत नहीं लग रहा था उसकी आँखों में पाप का साया धुंदला पड़ने लगा और वासना की किरणे से नयी ज़िंदगी की रौशनी दिखने लगी।
राहुल अपने जीभ से अब कविता की चूत से उभरी गुलाबी होंटो को दांये बांये टटोलता हुआ चाटने लग, कविता अपना सर उठाकर सोफे पर आराम से बैठी मज़े लेने लगी, धीरे धीरे उसके हाथ राहुल के सर के बालो के साथ खेलती हुई अपनी चूत की और खींचने लगी।
राहुल कविता की इस हरकत से जान गया की उसकी आंटी काफी मज़े में है फिर अपनी जीभ को उसकी चूत में धकेल अंदर से निकलते नमकीन रस को चाट चाट कर अपने मुँह में लेने लगा। Maa Ne Karai Aunty Ki Chudai
उसकी जीभ को अपनी चूत के अंदर खेल महसूस कर कविता और पागल होने लगी, जब राहुल ने नीचे से अपनी दो उंगलिया भी घुसा दी फिर राहुल कविता की चूत के दाने को अपने होंटो में दबाकर चूसता हुआ अपनी उंगलियों को चूत के अंदर घूमाने लगा।
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कविता अपने हाथो से राहुल के बालो पर और कसने लगी और जैसे जैसे वह उसके बालो को खींचती गयी वैसे वैसे राहुल उसकी चूत में ऊँगली से चोदने लगा कुछ ही देर में कविता की चूत में से पानी की चाप चपाहट भरी आवाज़ निकलने लगी।
राहुल अपनी आंटी को मज़ा देते हुए उसकी चूत से छलकती नमी का स्वाद अपने जीभ से अंदर लेते गया, राहुल कविता की अवस्था जान अपने उंगलियों को और तेज़ मारने लगा।
कविता: अह्ह्ह राहुल ओह्ह्ह्ह! जब राहुल को पता चला की उसकी आंटी झड़ने के कगार पर है तो उसने तुरंत अपनी ऊँगली निकाल ली और उठ खड़ा हुआ मस्ती भरी राह में रुकावट देख कविता अपनी आँखे खोल राहुल को देख बोली:
आंटी: उफ्फ्फ… क्या हुआ?
राहुल: राहुल अपने शर्ट के बटन खोले और अपने लंड को बहार निकाल हिलाता हुआ बोला:
राहुल: आपका तो मैंने एक बार करवा दिया था न रूम में अब मुझे भी तो थोड़ा मज़ा चाहिए, कविता मुस्कुरा पड़ी और आगे को उठ बैठी पर जैसे ही वह राहुल के लंड को हाथ बढ़ा कर पकड़ने गयी तो राहुल ने उसे रोक दिया। Maa Ne Karai Aunty Ki Chudai
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कविता: क्या?
राहुल: अब मैं लेटूँगा सोफे पे आप उठो।
कविता “हम्म्म” बोलती हुई हामी भरी और उठ खड़ी हुई और राहुल उसकी जगह पर पीठ के बल लम्बे सोफे पर लेट गया कविता अपने बिखरे बालो को पकड़ सर के पीछे बाधी फिर राहुल की एक टांग को पकड़ कर उसे फैलाकर उसकी जांघो के बीच बैठ गयी राहुल के लंड को हाथ में लेकर हिलाती हुई वह मुस्कुराकर बोली: वैसे काफी बड़ा है तुम्हारा।
राहुल: अंकल से भी बड़ा क्या ?
तो दोस्तो आज बस इतना ही अगले भाग मे बतौगा कैसे की मैंने अपनी आंटी(बुआ )की जम के चुदाई।
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