Mazak Me Bhabhi Ki Chudai:हैलो दोस्तो, मैं आपका दोस्त आकाश आज फिर एक नयी कहानी के साथ आया हु, पिछेल भाग अगर आपने अनहि तक नहीं पढे तो प्लीज पहले उन्हे पढ़ ले , तो चलो आपका टाइम जायदा न लेते हुये कहानी सुरू करता हु,
नींद से बहार तो आ गया था लेकिन आँखे खुलने का नाम ही नहीं ले रही थी।
तब याद आया की कल रात क्या किया शोभा और भावना के साथ ड्रिंक्स की फिर फैशन शो के चक्कर में शोभा भाभी की बेबीडॉल तक पहन गया।

कल शाम दारु के नशे में वैसा कर गया लेकिन अब उसे सोच शर्म लग रही थी.
पर फैशन शो के बाद क्या हुआ? मैंने रात को खाया क्या? वैसे कल रात खाने में बना क्या? और मैंने बेबीडॉल पहनने के बाद क्या किया? कुछ भी याद नहीं आ रहा था।
वैसे तो मैं 4 या 5 पेग पी ही लेता हूँ पर सच मे बैंगलोर की व्हिस्की गज़ब का नशा दे गयी.
इतना हैंग ओवर मानो 2 पूरी बोतल गटक ली हो मुझे समझ में ही नहीं आ रहा था की आधी बोतल में मेरी ऐसी हालत क्यों हो गयी।
कोशिश करके आँख खोला और देखा तो में अपने रूम में ही नहीं था।
ये तो भैया का कमरा था और मैं उनके बेड पे पूरा नंगा पड़ा हुआ था.
सर पे हाथ रख उठ बैठा और सोचने लगा की कल हुआ क्या?

मैं भैया भाभी के कमरे में कैसे पहुंचा और मैं नंगा क्यों हूँ? कुछ भी समझ नहीं आ रहा था
पहनने को मेरे कोई भी कपडे भी नहीं आस पास और सोचा अगर मैं इस कमरे में हूँ तो भाभी किधर है?
झट से उठा और इधर उधर देखा तो ड्रेसिंग टेबल के पास एक टॉवल दिखा। Mazak Me Bhabhi Ki Chudai:
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टॉवल की खुशबू से ही जान गया की ये शोभा का है।
उसके अलावा कुछ था भी नहीं तो वही पहनके मैं बहार निकला, रूम से बहार निकलते ही देखा तो भाभी किचन में कुछ काम कर रही थी.
वह टॉप और पाजामे में थी, मैं उनके रूम से निकल कर चुप चाप अपने रूम को दबे पाँव जा ही रहा था.
तभी भाभी किचन से बोली: गुड आफ्टरनून सर!
मैं पलट कर उन्हें देखा और सर खुजलाते हुए बोला: हाँ गुड…गुड आफ्टरनून.
और फिर हैरानी से बोला: गुड आफ्टरनून क्यों?
शोभा: 12 बजने वाले है ज़रा टाइम देखो और ये चोरो के तरह कहा जा रहे हो.
तब मैं पलट कर घडी देखा और सच मे हैरान रह गयाटाइम 11:40 हो रहे थे।
यकीन नहीं आ रहा था की मैं कल इतना सोया दारु पीकर ।
क्या वह याद नहीं खाना खाया या नहीं वह याद नहीं भाभी के कमरे में नंगा सोया वह भी क्यों याद नहीं और वैसे भावना कब गयी?
मैं ये सब सोचकर बाल खुजलाता हुआ खड़ा था, पास आती हुई भाभी बोली: ये लो पीलो तुम्हे देख के इसकी ज़रूरत तुम्हे ज़्यादा लग रही है.
मैं: ये क्या है?
शोभा: निम्बू मिलाया हुआ सोडा नमक के साथ पीलो हैंगओवर ठीक हो जायेगा.
इतनी हैंगओवर में कोई निम्बू पानी दे दे बस और क्या चाहिए प्यास के मारे गाला भी सूख रहा था।
झट से प्यासे आदमी के जैसे पीने लगा.
शोभा: आराम से पीयो, तभी उनकी नज़र नीचे पड़ी और बोली: हेलो ! ये तो मेरा टॉवल है किस्से पूछके लिए?
मैं आधा गिलास पीकर बोला : वह और कुछ था नहीं पता नहीं कहा से आपके कमरे में पहुँच गया याद नहीं कुछ.
फिर मैं वापस पीने लगा, भाभी टॉवल की गांठ पकड़ खींच के मेरे बदन में जो एक मात्र टॉवल था उसे भी ले ली और बोली:
दो इधर इडियट पता नहीं क्या? लड़कियों की टॉवल नहीं लेते ?
एक झटके में उन्होंने मुझे पूरी बेशर्मी के साथ अपने सामने नंगा खड़ा करवा दिया।
एक हाथ में गिलास सँभालते हुए दुसरे हाथ से मैं अपना लंड छुपाने लगा.
वह बोली: हाहाहा! देखो तो ज़रा कैसे शरीफो के तरह शर्मा रहा है.
मैं सोचने लगा की अब तो भाभी ने मेरा लंड इतनी बार देखा है की अब वह शर्मा भी नहीं रही, मनो मुझे नंगा देखना तो आम बात हो गयी थी उनके लिए.
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भाभी टॉवल से मेरी जांघ पर मारा और बोली: कल शाम कहा गयी ये शर्म?
कल तो पूरे बेशरम होकर उसे झूला झूला कर नाच रहे थे. Mazak Me Bhabhi Ki Chudai:
मैं: की… किसे?
भाभी टॉवल मेरे उस हाथ को दे मरी जो मेरे लंड को छुपाये हुई थी और बोली: इसको… और किसे कुछ याद नहीं?
मैं ये नहीं दिखाना चाहता था की 4 पेग में ही मैं सब भूल गया था।
में बोला : नहीं नहीं याद है ना सब मुझे.
मेरी बात सुन भाभी के चेहरे की हसी हलकी सी उडी पर वापस वह मुस्कुराती हुई बोली: अच्छा ! क्या याद है बताओ ज़रा?
मैं: व… वही! हम दारु पिए.
भाभी टॉवल को घुमाती हुई आगे बोली: और? और क्या किये?
मैं: नाचे डांस किये
.भाभी: और?
मैं: और मममम और खाना खाये और सो गए.
भाभी: अच्छा! बताओ क्या खाया हमने कल?
मैं अब पूरा फसा जितनी भी कोशिश की याद नहीं आ रहा था, सर खुजलाते हुए इधर उधर देखने लगा तभी डाइनिंग टेबल पर पड़ी पिज़्ज़ा के डब्बे दिखा और झट से याद आया और बोला : पि.पिज़्ज़ा खाया न हमने कल.
शोभा फिर पूछी: हम्म्म… और उसके बाद?
मैं: हम्म्म उसके बाद… एक मिनट में कुछ कपडे पहनकर आता हूँ.
शोभा: बात मत पलटो वैसे भी कौनसे अब कुछ और दिखने को बचा है तुम्हारा? हाहाहाअब बताओ खाने के बाद क्या किये?
शोभा की बात भी सही थी अब न दिखने को बचा भी क्या था।
मैंने अपना हाथ अपने लंड से हटा लिया और उसके सामने लंड को खुले आम दिखाते हुए बोल : मममम खाने के बाद… याद नहीं आ रहा.
भाभी के चेहरे पर एक अजीब सी ख़ुशी वाली मुस्कान दिखी वह मेरे लंड को देख बोली: हम दोनों के साथ जो किये याद नहीं?
मैं आँखे फाड़ कर देखते हुए बोला : क्या? क्या किया मैंने?
शोभा: हँ! इतना पियोगे तो याद कैसे रहेगा? उतना ही पियोना जितना होता है
.मैं: अरे सॉरी पर बतावा क्या किया मैंने?
शोभा मेरे लंड के तरफ आँखों से इशारा कर बोली: अपने उससे पूछो शायद याद आ जाये.
मैं नीचे अपने लंड को देखा और झट से वापस उन्हें देख बोलै: सचमे!
शोभा टॉवल से मेरे जांघ पर मार बोली: जाओ जाकर कुछ पहनो अब वरना सर्दी लग जाएगी जाओ.
मैं: हाँ पर बतावा! क्या सच मे कल मैंने… आप लोगो के साथ…?शोभा मुझे टोकि और टॉवल से मुझे दुबारा मारने के लिए हाथ उठती हुई बोली: अब जाते भी हो या भागो? Mazak Me Bhabhi Ki Chudai:
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मैं: ठीक है ठीक है जाता हूँ.
शोभा: और सुनो चाहिए तो नहालो नहीं नहाये तो भी प्रॉब्लम नहीं क्यों की घर में थोड़ा काम है.
मैं: क्या काम है.
शोभा: जेक कुछ पहन कर आओ
मैं कॉफ़ी बनाती हूँ तब तक और फिर बताउंगी जाओ अब और हाँ सुनो नेहा को फ़ोन कर लेना.
मैं: नेहा को? अभी?
शोभा: हाँ तुम आज से -करोगे बोले थे याद है?
मैं तब सर पर हाथ रख बोलै: ओह तेरी! भूल गया.
शोभा: हाहाहा! पता था मुझे मैंने उसे मैसेज कर दिया है बॉडी की बहार से खा के तुम्हे जाची नहीं तुम्हे फ़ूड पाइजन हो गयी है,वैसा ही बोलना उससे.
मैं: तब रहने दोना अब मैं क्या बोलू दुबारा.
शोभा: अरे! ऐसे थोड़ी होता है तुम जॉब पे लगे हो चाय की दूकान में नहीं, फ़ोन करो और खुदसे भी बोलो उसे.
मैं: हम्म्म… ठीक है.मैं अपने कमरे को गया और अपना फ़ोन लेकर नेहा को कॉल किया, रिंग बजी और नेहा फ़ोन उठायी.
नेहा: हेलो!
मैं: हेलो नेहा मैडम मैं आकाश.
नेहा: हाँ बोलो आकाश आज ऑफिस क्यों नहीं आये?
मैं: वह मैडम मेरी तबियत थोड़ी ठीक नहीं.
नेहा: क्यों क्या हुआ? जॉब के पहले दिन ही तबियत ठीक नहीं? हम्म्म?
मैं: नहीं वैसा नहीं वह कल पहली बार बहार से खाया न तो आदत नहीं न तो पेट थोड़ा ख़राब हो गया.
नेहा: हम्म्म… पर इन्फॉर्म करनी चाहिए न टाइम देखो क्या हुआ अभी फ़ोन किया तुमने, कमिटमेंट्स और सचेडूल्स होते है ना, मैंने ऑफिस में भी सबको बताया की तुम आज से जॉइन करोगे।
क्या सोचेंगे वह की पहले दिन ही तुम ऐसे कर रहे हो? तुम्हारा ही रेपुटेशन ख़राब होगा न?
मैं: हाँ… वह तो सही है सॉरी.
नेहा: कोई बात नहीं कब से आओगे? ?
मैं: वह मैडम पता नहीं फ़ूड पाइजन हुआ है क्या मैं 2 तरीक से जॉइन कर सकता हूँ?
नेहा: हम्म्म ओके!
एक ही बार में फ़ोन काट कर दी, शायद गुस्से में थी, कल इतना अच्छे से बात कर रही तो थी अब क्या हुआ इसे अजीब औरत है यार इसके बाद सीधा बाथरूम घुसा और फिर पानी गर्म करने के लिए गीजर ऑन कर ब्रश करने लगा.
आईने में देख यही सोचता रहा की कल रात क्या सच मे मैंने भावना और भाभी के साथ कुछ किया?
तभी मेरी नज़र मेरे सीने पर पड़ी और मेरे सीने पे खरोच के निशाँ दिखे।
ये खरोच तो नाखून के निशाँ थे।
इसका मतलब भाभी सच बोल रही है मैंने कल सच मे सेक्स किया. Mazak Me Bhabhi Ki Chudai:
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एक हाथ से लंड को टटोलते हुए खेलने लगा और सोचा की क्या फूटी किस्मत है मेरे लंड की जब से आया हूँ तब से भाभी को चोदने के सपने देख रहा था और जब ये हुआ तो साला कुछ भी याद नहीं, ब्रश करने के बाद पानी छुवा तो अब भी ठंडा ही था.
फिर सोचा चलो भाभी ने तो बोलै ही कुछ काम है तो बाद में ही नाहा लूंगा, सर्दियों में तो वैसे भी बस एक बहाना चाहिए न नहाने की बाथरूम से निकला तो मेरी नज़र बेड पर पड़ी, मेरे शार्ट और टी-शर्ट पर पड़ी तब सोचा की ये तो वही है जो मैंने कल पहनी थी.
ये यहाँ कैसे? ये तो कल मैंने भाभी के रूम में खोला था उनकी बेबीडॉल पहनने से पहले शायद भाभी सुबह लेकर यहाँ आई होगी।
तो फिर वह मुझे उठायी क्यों नहीं? सवालो पे सवाल खुद से करता हुआ वही शार्ट और टी-शर्ट पहना और फिर रूम से निकला.
इतने में भाभी लिविंग के टेबल पर कॉफ़ी लेकर रखी और बोली: लो पीलो.
इतना कह कर भाभी अपने कप के साथ सोफे पर बैठ गयी और टीवी ऑन करने लगी.
मैं जाकर दुसरे सोफे पर बैठा की गाने चालू हो गया टीवी में तभी टीवी देख में बोलै: अरे ये चैनल तो कल लगाया था हमने.
भाभी तुरंत टीवी बंद की और बोली: ओह तुम्हे याद आ रहा है.
मैं: क्या भाभी पता नहीं क्यों मुझे कुछ याद ही नहीं आ रहा.
भाभी: हाहाहा! कोई बात नहीं होता है ज़्यादा ज़ोर मत दो दिमाग पे, सर दुखेगा फिर.
मैं: वैसे भावना कब गयी?
शोभा: आज सुबह काफी मज़े किए उसने कल.
मैं: सच मे? क्या यार मुझे कुछ याद नहीं.
शोभा: ओफ्फो जाने दो क्यों याद करने की कोशिश में हो? वैसे आज शाम को याद से चले जाना उसके यहाँ.
मैं हैरानी के साथ पुछा: उसके यहाँ? भावना के?
शोभा: हाँ क्यों? नहीं जाना?
मैं: पर क्यों?शोभा: ये लो अब ये भी याद नहीं?
मैं: क्या? सच मे याद नहीं बतावा.
शोभा: अरे तुम दोनों ने मिलकर प्लान की न कल रात.
मैं: क्या?
शोभा: यही की तुम उसके कजिन भाई बनकर उसके यहाँ जाकर रहोगे.
मैं: ये कब प्लान हुआ?
शोभा: उफ़! कल तो दोनों बड़े चिपक रहे थे, तभी तुम दोनों ने प्लान किया की तुम भावना के यहाँ उसके भाई कजिन भाई बनकर 2-3 दिन वही रहोगे. Mazak Me Bhabhi Ki Chudai:
मैं: पर मैं क्यों उसका भाई बनकर उसके साथ रहूँगा?शोभा: अब ये भी मैं ही बताऊँ?
मैं बिना कुछ बोले सवाल भरे चेहरे से देखने लगा,
भाभी आगे बोली: उसके साथ उसके घर कल जैसी मस्ती करने.
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मैं तब थोड़ा खुश हुआ की भले पता नहीं कब ये सब प्लान बनाया मैंने, पर जो भी हो भावना के साथ मस्ती बुरी बात नहीं है।
फिर पुछा: तो वह अकेली रहती है क्या अभी?
शोभा: नहीं उसके सांस ससुर है वही तो वह ऐसे ही तुम्हे नहीं ले जा सकती न तो वह तुम्हे अपना भाई बनाकर अपने घर उनसे मिलाएगी।
फिर 2-3 दिन वही रहना और जब चाहे चुप-चुप कर मज़े करना 1 तरीक को वापस आ जाना और 2 तरीक से जॉब पे चले जाना, वरना साड़ी मस्ती निकाल देगी नेहाहाहाहा!
मैं: हाँ हाँ सही में वैसे भावना के यहाँ अगर में गया और उसके सांस ससुर कुछ पूछे तो में कैसे सही सही जवाब दूंगा?
शोभा: घबराओ मत शाम को 7 बजे तक चले जाना, पर उससे पहले भावना को फ़ोन करके सारी बाते पूछ लेना की तुम्हारा नाम जगह सब क्या बताना है घबराओ मत उसके सास ससुर काफी काम बात करने वालो में से है ज़्यादा सवाल करके परेशान नहीं करेंगे.
मैं राहत की सांस लेता हुआ भावना को चोदने के सपने सजाने लगा।
फिर भाभी से पुछा: पर भाभी! आप तो अकेली हो जाओगी.
शोभा: नाह! 1.2 दिन की ही तो बात है परसो तो राकेश आ ही जायेगा.
मैं: अच्छा भैया परसो आ रहे है?
शोभा: हाँ 31 को आ रहे है नई ईयर में वह आया नहीं तो उसकी टाँगे न तोड़ दो में हाहाहा!
मैं: हाहाहा! हाँ वह भी तो है, तब तो मैं भी आ जाऊंगा 31 को.
शोभा: नहीं नहीं बिलकुल नहीं तुम आराम से 1 तरीक को शाम तक आना.
मैं: पर भैया पूछेंगे तो?
शोभा: अरे! तुम न बस वह करो जो कह रही हूँ तुम आराम से मज़े लेना भावना के साथ 1 तक.
मैं चिडता हुआ बोला: ओहो! ओहो! ओहो! अब समझा भाभी जी को भैया के साथ अकेले टाइम चाहिए हाहाहा!
शोभा: हाहाहा! और नहीं तो क्या?
मैं: तो वैसा बोलिये न!
भाभी आगे बोली: हम्म्म तो चलो अब काम पे लगे है.
मैं: हाँ वह तो पुछा ही नहीं क्या काम है?
शोभा: नई ईयर आ रहा है तो घर की सफाई का काम. Mazak Me Bhabhi Ki Chudai:
मैं तब चिढ़ाने के लिए बोला: ओह लगता है भावना मुझे बहुत याद कर रही है क्यों न मैं अभी चला जॉन.
शोभा: काम चोर! बिना किये तो तुझे कही जाने नहीं दूंगी बोल दूंगी भावना का प्लान कैंसिल करे.
मैं उठ खड़ा हुआ और बोलै: नहीं नहीं! करता हु ना।
मैं तो बस मज़ाक कर रहा था चलिए बताइये! क्या करना है?
शोभा भी उठी और टेबल से कप लेकर किचन को जाने लगी.
वह बोली: पहले झाड़ू देती हूँ अपना रूम झाड़ू लगाओ
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तब तक मैं डाइनिंग टेबल से ये पिज़्ज़ा के डब्बे बोतल और कचरा साफ़ कर देती हूँ.
तब मेरी नज़र डाइनिंग टेबल पर रखी व्हिस्की की बोतल पर गयी जिसमे अब भी दारु बची हुई थी।
मतलब की कल मैंने आधी बोतल भी ख़तम नहीं की थी और मेरी ये हालत थी, शोभा के पीछे पीछे मैं चला वह किचन से मुझे झाड़ू दी.
मैं अपने रूम को गया और झाड़ू लगाने लगा, यहाँ वह यूं ही झाड़ मारकर 10 मिनट में लिविंग को वापस निकला।
भाभी किचन से मुझे देख बोली: इतनी जल्दी?
मैं देखूंगी अगर ठीक से नहीं किये तो सोच लेना
.मैं: अरे हो गया मैं कौनसा एक महीने से रह रहा हूँ ज़्यादा गन्दा नहीं था.
शोभा: ठीक है तो फिर लिविंग रूम कर दो.
मैं फिर लिविंग की सफाई पर लग गया सेंटर टेबल पर कल की चखने की प्लेट रखी हुई थी जिसे उठा कर में किचन में देने गया।
वहा भाभी प्लेट धो रही थी.सच कहूँ तो चाहे नंगा देख ही लिया हो लेकिन भाभी के गले पर पानी की बूँद और उनके घुंगरले मुलायम बाल जो पानी से उनके गलो पर चिपकी हुई थी कितनी सेक्सी लगती है।
हर बार वह और मेरी सड़ी किस्मत कल रात का कुछ भी याद नहीं मुझे.
मैं खड़ा ये सब सोच रहा था जब भाभी मुड़ी और बोली: हेलो! क्या टुकुर टुकुर घूर रहे हो? प्लेट रखो वह और जाओ.
मैं: बस यही की आप काम करती हुई कितनी मस्त लगती हो.
भाभी प्लेट धोती हुई सर घुमाकर तिरछी नज़रो से बोली: अच्छा! सिर्फ काम करती हुई ही अच्छी लगती हूँ क्या?
मैं: नहीं मेरा मतलब हमेशा अच्छी लगती हो.
शोभा: हाहाहा इडियट! जाओ जाकर लिविंग रूम झाड़ू मारो. Mazak Me Bhabhi Ki Chudai:
इतना कहती हुई भाभी अचानक से झुक गयी और नीचे के कैबिनेट से लिक्विड सोप निकलने लगी, ऐसे झुकने पर उनकी मध मस्त गांड का अकार उनकी मुलायम पाजामे पर चप गयी।
उसे देख मैं बोलै: भाभी!शोभा बिना मुझे देखे झुकी हुई ही बोली: ओफ्फो तुम गए नहीं अब तक? क्या हुआ अब?
मैं: अपना ऐसे मेरे सामने झुका मत करो.
शोभा झट से अपने गांड पर हाथ रखी और उठ कर पलटकर बोली: क्या?
फिर आँखों में अदाए लती हुई बोली: हम्म्म्म क्यों? तुम्हे कुछ होता है क्या?
मैं: हाँ न बहुत कुछ मन करने लगता है.
शोभा: अच्छा! क्या मन करता है?
मैं: की न बस हाथ मार दू, भाभी वापस मुड़कर बर्तन धोती हुई बोली: बस हाथ मरोगे?
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मैं सोचा की भाभी का मूड बन्न रहा है और उनके थोड़ा पास जाते हुए बोलै: और भी बहुत कुछ मारने का मन करता है.
वह पलट रख मुझे देख खड़ी हो गयी और मुस्कुराती हुई बोली: हम्म्म… क्या मरोगे?
मैं और थोड़ा पास जाते हुए उनके करीब पहुंचा इतना करीब की भाभी को गर्दन हलकी सी ऊँची करनी पड़ी मेरे आँखों से आँख मिलाने के लिए.
मैं: क्या मारने दोगी?
शोभा: तुम बताओ क्या क्या मार सकते हो?
मैं: आप बस मौका तो दो जहा जहा मार सकता हूँ हर जगह चुन चुन कर मरूंगा.
शोभा: सच मे इतना अच्छा मार लेते हो क्या?
मैं: हाँ न कल का तो मुझे याद नहीं कुछ पर अब एक मौका दो फिर देखो.
शोभा और थोड़ी करीब अपना मुँह मेरे मुँह के पास लायी मनो किश करने वाली हो मुझे इतना करीब आयी और बोली: अगर मौका दिया तो अच्छे से मरोगे ना?
मेरा लंड अब हरकत में आ गया भाभी ऐसी अदाओ के साथ ऐसी बाते कर मेरी आग भड़का रही थी।
में बोलै: हाँ न भाभी अच्छे से करूँगा.
शोभा: अगर सच मे मुझे अच्छी लगी तो मैं तुमसे ही मरवाउंगी रोज़, अब तो मुझसे रहा नहीं जा रहा था मेरा लंड शार्ट में धक् धक् धड़कने लगा।
मैं बोलै: तो फिर भैया का क्या होगा?
शोभा: नाह! वह नहीं मार पाते ठीक से उन्हें नहीं आता करना अगर तुम मर्दो अच्छे से तो रोज़ तुमसे सुबह और शाम मरवाउंगी.
मैं तो पूरा पागल होने लगा और बोलै: तो सुबह का हिस्सा अभी मारने दोगी. Mazak Me Bhabhi Ki Chudai:
शोभा अपने होठो को मेरे होठो पास लायी, फिर मुझे तरसाती हुई अपना सर वापस पीछे लेली और बोली: दिया न मौका जाओ जाकर अच्छे से मारो, कोना कोना मारो मममम और मुझे शिकायत का मौका मत देना
.मैं: जाओ? कहा?
शोभा मेरे सीने को अपनी हाथ से धक्का देकर मुझे पीछे हटाती हुई ज़ोर से हस्सी और बोली: लिविंग में झाड़ू मारने की बात कर रही हूँ।
मैं जाओ जाकर अपना काम करो वर्ण मेरी छोड़ो भावना भी नहीं मिलेगी आज.
मैं अपने सर पर हाथ रख दांत दबाते हुए सोचने लगा, साली ये कैसी औरत है डबल मीनिंग बाते कर तन बदन में आग लगाकर खड़े लंड पे डंडा दे मारा।
मेरे रंग उड़े शकल को देख शोभा खिलखिलाती हुई हसने लगी.
वह बोली: हाहाहा है! पागल जाओ बाबा जाकर झाड़ू लगाओ काम है और भी पोछा भी लगाना है.
मैं नाराज़ शकल बनाते हुए किचन से ऐसे निकला मानो आज झाड़ू लगाकर पूरा फ्लोर थोड़ दूंगा, वापस लिविंग में जाकर एक कोने से झाड़ू लगाना शुरू किया फिर भाभी बर्तन धोकर मेरे काम को देखने लिविंग को आयी.
उसके पाजामे और टॉप में कई जगह पानी लगा हुआ था।
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साथ ही छाती पर गीलेपन के कारन उनकी निप्पल अच्छी खासी तरीके से उभरी हुई थी.
मैं: आप तो पूरे पसीने पसीने हो गए.
शोभा नीचे अपनी छाती से चिपकी टॉप को सीने से अलग खींच उठती हुई बोली: पसीना नहीं पानी है ।
खामखा ये पहना आज गन्दा भी हो गया.
मैं: अरे तो पहने ही क्यों?
भाभी मेरी बात सुन कुछ सोची और फिर मुस्कुराने लगी.
मैं पुछा: क्या सोच के मुस्कुरा रहे हो आप?
शोभा: हाहाहा! कुछ नहीं कल रात तुम्हारे भैया से बात हुई थी तो वही सोच रही थी.
मैं: कल? कल रात? कल रात कब किया उन्होंने फ़ोन?शोभा हड़बड़ाती हुई बोली: नहीं कल रात नहीं कल दिन में जब तुम यहाँ नहीं थे तब.
मैं: अच्छा ऐसा क्या कहा उन्होंने की आपको अभी सोचकर हसी आ गयी?
शोभा जाकर सोफे पर बैठी और बोली: वह तुम्हे क्यों बताऊँ हस्बैंड वाइफ की पर्सनल बात है
.मैं झाड़ू लगता हुआ बोलै: हाँ हाँ ठीक है ठीक है मुझे नहीं जानना.
शोभा: जल्दी लगाओ झाड़ू देखो 1 बजने वाले है अभी पोछा भी लगाना बाकी है बस बाते ही करते रहो.
मैं: सारा घर पोछा लगाओगे क्या?
शोभा: नहीं नहीं बस लिविंग और किचन करना है बाथरूम तो साफ़ ही है.
मैं: तो एक काम करना भाभी लिविंग तो झाड़ू लगा ही दिया है बस डाइनिंग करनी है आप लिविंग में पोछा लगाना शुरू कर दो तब तक मैं डाइनिंग झाड़ू लगा के ख़त्म कर दूंगा और एक साथ जल्दी हो जायेगा काम.
शोभा सोफे से उठी और अंगड़ाई लेती हुई बोली: हाँ आईडिया तो ठीक है मैं मोप लेकर आती हूँ. Mazak Me Bhabhi Ki Chudai:
ऐसे जब वह अगड़ाई ली तो क्या कमाल की लग रही थी।
गीली टॉप पर उनकी बूब कस कर दबी और निप्पलों को तन्न कर उभर कर दिखा दी,
मैं तब बोला: वैसे भाभी एक बर्तन धोने में आपके कपड़ो की ये हालत मोप करोगी तो आप तो पूरी गीली हो जाओगी हाहाहा!
शोभा: हाँ हाँ तुम्हे ताड़ने को अच्छा नज़ारा भी मिलेगा क्यों?
मैं: हाहाहा! हाँ नकाम के साथ मनोरंजन.
शोभा मोप लेने किचन को जाती हुई पलट कर मुझे चिढ़ाती हुई बोली: हाँ तो मैं कपडे उतार के मोप लगाती हूँ नन कपडे गंदे होंगे और तुम्हारा मनोरंजन भी बढ़ जायेगा.
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मैं पहले खुश हुआ और फिर निराशा दिखते हुए बोलै: जाओ आप न बास खामखा बाते कर आग लगाती हो.
शोभा हस्ती हुई किचन को चली गयी वहा से मोप ली और फिर अपने रूम को जाने लगी.
मैं: लिविंग रूम का करना है ना.
शोभा: अरे पानी और बकेट मेरे बाथरूम में है ना बेवक़ूफ़.
मैं: ओह हाँ ओके ओके!पर जैसे ही अपने रूम के दरवाज़े के पास पहुंची तो वह मुझे पलट कर देखि और बोली: वैसे क्या पता शायद सच मे घर की सफाई तुम्हारे लिए मनोरंजक हो जाए आज हाहाहा! वह ये कह कर अपने रूम को अंदर से बंद कर दिया, पता नहीं खामखा भाभी ऐसे मुझे क्यों आग लगाती रहती है अब तो मेरा उनसे भरोसा भी उठ गया।
दोस्तो आज इस कहानी मे बस इतना अगले भाग मे बतौगा की कैसे मैंने काम करते करते भाभी की चुदाई केआर डाली ।
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