Bua or maa Ki chudai ki story: हैलो दोस्तो, कैसे हो आप सब , अगर आपने अभी तक इस कहानी के पिछले भाग अभी तक नहीं पढे तो यहा क्लिक करके पढ़ सकते है.
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सुबह ब्रेकफास्ट के बाद माँ के साथ पोर्न देख कर चुदाई का मज़ा लेने के बाद माँ का फ़ोन बजा, वह मुझे रूम से भागने लगी ये कह कर के पापा का वीडियो कॉल है.
मैं पापा का नाम सुनते ही भागा ये भी नहीं सोचा की बस वीडियो कॉल है, ऐसा भागा मानो वह खुद ही आ गए हो, मैं रूम से नंगा ही भागता हुआ गेट खोला, पलट कर माँ को देख धीमी आवाज़ में बोला की कॉल के बाद मेरे रूम आये.
अपने रूम पहुँच कर थोड़ी देर थका हारा बेड पर लेटा रहा, ये सोच कर की माँ के साथ अब आगे और क्या क्या मज़े करूँगा, अभी तो ओर 2 दिन थे हमारे पास और साथ ही आज का आधा दिन और रात भी.

उफ़ चोद के मर न जाओ बस, इन बातो को सोच मैं नंगा बेड पर लेटा हुआ था, तब माँ अचानक से मेरे रूम आयी और बोली: राहुल! सब उलट पुलट हो गया.
मैं सर उठा कर माँ को देख पुछा: क्यों क्या हुआ? मत कहिये की डैड वापस आ रहे है आज.
माँ मेरे पास आकर मेरे बगल में बेड पर बैठ कर बोली: अरे नहीं. वह तो ये बताने के लिए कॉल किये की उन्हें और टीना को आने में 2 दिन ज़्यादा लगेंगे. Bua or maa Ki chudai ki story:
मतलब 4 दिन बाद, मैं झट से ख़ुशी के मारे उठ खड़ा हुआ और बोला, अरे वाओ! तब तो मज़ा ही आ गया,
माँ: नहीं राहुल, वह तो ठीक है पर तेरे पापा ने सब बिगाड़ दिया.
मैं: आप खुल कर बोलना क्या किया, मेरे को टेंशन मत दो.
माँ: उन्होंने कविता आंटी को यहाँ आने को कहा है.
मैं: कविता आंटी? वह क्यों? और कब? (कविता आंटी मेरी बुआ है मेरे पापा की बहिन)
माँ: मुझे क्या पता? वह कविता आंटी के घर उसके ससुराल वालो में किसी की डेथ हुई है, तो वह शादी में पापा के साथ नहीं जा सकी और वह यही है.
तेरे पापा उसको बोले की हम यहाँ अकेले है तो यहाँ आकर रहे कुछ दिन.
मैं अपने सर पर हाथ मारेते हुए बोला: हैट यार पापा भी न.
Sagi maa ki chudai ki kahani
खामखा कबाब में हड्डी.
माँ: अब तो लगता है हमे ये सब बंद करना होगा.
मैं उदास और गुस्से भरे शकल से बोला: कब आएगी वह?
माँ: शाम को, पता नहीं मैं फ़ोन करके कविता आंटी से पूछ लेती हूँ,
मेरी हालत ऐसी हो गयी मानो खड़े लंड पे लोहा मार दिया हो किसी ने.
वैसे कविता आंटी देखने में बुरी नहीं थी, पर उनके लिए मेरे दिमाग में ऐसी वैसी कोई भावना नहीं थी, हाँ कभी कभी उनकी बेटी यानि की मेरी कजिन भारती के बारे में मैंने कई बार सोचा है, पर ज़्यादा नहीं.
माँ अपना फ़ोन लगाने लगी और फिर मुझे देख फ़ोन को अपने कान से लगाकर बोली चुप रहना.
माँ: हेलो!
माँ: मैं ठीक हु तुम?
माँ: हाँ राहुल भी है.
माँ: हाँ घर पर ही है, उसकी क्लासेज नहीं है 3 दिन के लिए.
माँ: हाँ उसके पापा को नहीं पता, उनके जाने के बाद ही उसे भी छुट्टी मिली, उसी लिए वह सोचे की मैं यहाँ अकेली हूँ सारा दिन
माँ: हाँ ठीक है. कब आओगी?.
माँ: हाँ हाँ ठीक है आकर खूब सारी बाते करते है तुम आओ.
माँ: ओके बाई.
माँ के कॉल काटते ही मैंने तुरंत पुछा: क्या बोली वह?
माँ: यही की तुम्हारे पापा ने कहा की तुम क्लास चले जाते हो और मैं यहाँ अकेली रहती हूँ, तो यही आ के रहे कुछ दिन.
मैं: अरे यार पापा को बता देना चाहिए था की मेरी छुट्टी चल रही है और अगर बताता तो भी कुछ नहीं होता वह हम सबको शादी पर ले जाते.
माँ: आईटी’स ओके बेटा तुम ऐसे बुरा मत मानो.
मैं: क्या माँ! गुस्सा आ रहा है, क्या क्या सोच के बैठा था मैं.
इस पर माँ मेरे मुरझाये हुए लंड को सहलाती हुई बोली: आईटी’स ओके राहुल, सोचो हमने कितनी मस्ती की, आगे जब भी हम घर पर अकेले होंगे मस्ती करेंगे ओके, अब चलो गुस्सा थूको. Bua or maa Ki chudai ki story:
मैं: कब आएगी आंटी?
माँ: वह बोली वह लंच के बाद अपने घर से निकलेगी, करीब 3 बजे तक यहाँ पहुंचेगी.
मैं टाइम देखा तो 12:30 हो रहे थे, पर मेरा लंड कुछ देर पहले झड़ने के कारन काफी कमज़ोर पड़ चुका था, ऐसा नहीं लग रहा था की ये अभी उठेगा..
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माँ मेरा लंड सहलाना बंद करके उठी और बोली: चलो कपडे पहनो, मैं जाकर लंच की तैयारी करती हूँ, वैसे मैं भी कुछ ढंग के कपडे पहन लेती हूँ वरना तेरी कविता आंटी को शॉक लग जायेगा मुझे ऐसे देख कर, माँ मुझे हसाने की कोशिश कर रही थी. पर मेरे मुँह से हसी नाम की चीज़ ही आना मुश्किल था, कैसे आता? सारे सपनो पे पानी जो फिर गया था.
माँ मेरे रूम से निकल गयी और मैं मुँह फुलाकर पापा और आंटी को मन ही मन गाली देता रहा.
कुछ 15-20 मिनट में ऐसे ही अपने बेड पर निराश लेटा रहा, फिर किचन से आती हुई बर्तनो की आवाज़ सुन मैं उठ कर अपना एक टी शर्ट और शार्ट पहन कर किचन को चला गया.
वहा देखा तो माँ बिलकुल बोरिंग सी एक लम्बी क्रीम कलर की ढीला मैक्सी में काम कर रही थी, मैं उन्हें देख सोचने लगा की कितनी पटाका लग रही थी ओर्म अब माँ कैसे कपडे पहन के खड़ी थी सुबह से और अब देखो ऐसा लग रहा है मनो 5 बचो की उदास माँ हो.
मैं उनके पास गया तो वह मेरा मन रखने के लिए बोली तो बोलो राहुल आज क्या खाना पसंद करेंगे लंच में?
मैं: मेरा सर.
माँ: वह तो मैं नहीं बना सकती क्यों की अगर बना भी दूँ तो तुम खाओगे कैसे बिना सर के है है है! उफ़ देखो तो कैसी शकल तुम्हारी मुरझाई सी है जैसे चोदने के बाद तुम्हारा लंड हो जाता है है है है
माँ पूरी कोशिश में लगी हुई थी की मेरा मूड ठीक हो जाये, पर मुझे यही समझ नहीं आ रहा था की माँ इतनी खुश कैसे हो सकती है.
अगर मैं उदास हूँ तो उन्हें भी तो होना चाहिए?
फिर मैंने टॉपिक हटाने के लिए बोला: वैसे वह सोयेगी कहा?
माँ: टीना के रूम में, वह नहीं है ना तो वहा सो जाएगी या फिर मेरे साथ. Bua or maa Ki chudai ki story:
तुम तो जानते ही होना तुम्हारी आंटी कितनी बात करती है, आज तो वह मेरे रूम में ही रहेगी सारी रात यहाँ वहा की न्यूज़ सुनाने के लिए.
ये बात तो सही कहा माँ ने.
कविता आंटी बहुत गप्पे मारने वालो में से है, किसी की बेटी या बेटा कहा क्या गुल खिला रहा है ये उन्हें सब पता रहता है.
मैं: भारती आ रही है क्या?
माँ: पता नहीं. वह तो मैंने पुछा नहीं, वह भी तुम्हारे तरह एंट्रेंस की तयारी कर रही है शायद ना आये.
मैं: पर लास्ट ईयर भी तो वह तैयारी कर रही थी.
माँ: हाँ पर उसे मेडिकल में मिला नहीं इस साल तो ये साल फिर से बैठ गयी.
मैं: उससे बात हुए बहुत दिन हो गए, रक्षा बंधन के टाइम जब वह आयी थी तब भी मुझसे नहीं मिली.
माँ: ओके चलो अब तुम जाओ जाकर कुछ पढ़ाई करो, वैसे कल से किताब को हाथ तक नहीं लगाए ह, तुम जाकर कुछ पढ़ो तब तक मैं कुछ बनाती हूँ.मैं इस पर माँ के पास जाकर उनके ढीले मैक्सी के ऊपर से उनकी गांड को सहलाया.
फिर बोला: अरे पढ़ाई तो बहुत करनी थी, पर क्या करे क्लासेज कैंसिल हो गए.
माँ मेरे गाल पर हाथ में पकड़ी भिंडी से हलके से मारती हुई बोली: चलो भागो अब.
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अब नो मोरे क्लासेज, मैं उनकी गांड को आराम से दबाते हुए बोला, आंटी को आते आते 3 बज जायेंगे, थोड़ी देर मस्ती करे क्या माँ? अब तक मेरे लंड में भी जान आ गयी थी.
और ये माँ को पता चला जब शॉर्ट्स में उभरा मेरा लंड उनकी मैक्सी में छुपी हुई जांघो से रगड़ा.
माँ: ठीक है बस एक बार और जल्दी ओके, मुझे पता था की क्यों की इसके बाद हम नहीं कर पाएंगे, तो माँ का भी मन ज़रूर होना चाहिए और इसी लिए वह झट से मान गयी.
माँ: चलो इस बार तुम्हारे रूम चलते है.
मैं: नहीं माँ आप बस अपना काम करो और मैं अपना.
माँ: मतलब?
मैं माँ को अपना काम पर छोड़ उनके पीछे बैठ गया और उनकी ढीली नाइटी को पीछे से उठाने लगा. Bua or maa Ki chudai ki story:
वह भी चालक थी और समझ गयी और वापस अपना काम करने लगी, मैं धीरे धीरे उनकी नाइटी को पीछे से ऊपर उठता हुआ पहले उनकी टांग को चूमा.
फिर उनके घुटने के पीछे की मुलायम जगह पर, वह खिलखिलाकर हसने लगी और बोली: है है है! राहुल गुदगुदी हो रही है.
मैं नाइटी को और थोड़ा ऊपर उठाता हुआ आगे बड़ा.
फिर उनकी गोरी चिकनी जांघो के पीछे चूमने लगा, माँ की जांघो की मांस मेरे चुम्बन से सख्त और ढीली होती महसूस हुई, लगा की माँ को रोमांच हो रही है, उनकी जांगे चूमता और चाटता हुआ मैं और ऊपर गया.
फिर मंज़िल मिली तो देखा और बोला.
मैं: माँ?
माँ: हम्म्म….
मैं: नो पेंटी?
माँ: है है है! क्यों शॉक लगा?
मैं कुछ न बोला और उनकी रोटी सी मुलायम गांड को दबा दबा कर थोड़ी देर खेला, फिर दोनों हाथ से उनकी गांड को फैलता हुआ अपना मुँह अंदर डाल दिया, फिर अपनी जीभ से उनकी गांड चाट कर उन्हें मज़ा देने लगा, कुछ सेकंड ऐसे करने के बाद मैं अपना एक हाथ उनकी जांघो के बीच ले गया.
वह समझ गयी और अपनी जांगे थोड़ी फलाती हुई मेरे हाथ को रास्ता दिया.
मैं अपनी 2 उंगलियों को सीधे ऊपर कर उनकी चूत की होठो तक पहुंचा, उन्हें छेड़ने लगा और साथ ही उनकी गांड को भी चाटता रहा. धीरे धीरे मैंने उनकी चूत को छेड़ा, उनकी होठो को फैलाया और अपनी दोनों उंगलिया उनकी चूत में जितना अंदर जा सका उतने अंदर ले गया.
मैं अपनी उंगलियों को नीचे खींच और फिर ऊपर धकेलते हुए उनकी चूत को धीरे धीरे चोदने लगा. कुछ देर ऐसे ही धीरे धीरे करने के बाद उनकी सिसकारियां और साँसे तेज़ होने लगी.
मैंने अपनी उंगलियों को थोड़ी तेज़ी से ऊपर की और मारता हुआ उनकी चूत चोदने लगा, करीब 2 मिनट ऐसे ही तेज़ उनकी चूत को ऊँगली से चोदने पर वह कामुक हुई, मुझे अपने पीछे से हटाती हुई पलटी और फिर अपनी नाइटी को अपने दोनों हाथो से पकड़ उठाई. Bua or maa Ki chudai ki story:
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अपनी गांड किचन के काउंटर पर सहारा कर चूत दिखाई बोली: सामने से करो और यहाँ चाटो अब.
ऐसा बोलती हुई अपने एक हाथ की दो उंगलियों से माँ अपनी चूत की होंटो को फैलाकर दिखाने लगी.
मैं सामने आया और उनकी चूत के दाने को चूमा, अपनी 2 उंगलिया चूत में घुसाने लगा, माँ अपनी चूत से हाथ हटाकर मेरे सर के बालो को पकड़ अपने तरफ खिचा.
वह उत्तेजित होने लगी और साथ ही मेरा नाम धीरे धीरे लेती हुई आहे भरने लगी, एक दो मिनट ऐसे ही मेरी उंगलिया तेज़ हुई. उनकी चूत में घुसती निकलती हुई उन्हें उनकी कगार पर ला ही रही थी, तभी कम्बख्त साला कौन हरामी डोर बेल्ल बजा दिया.
सच बोलू तो इतना गुस्सा मुझे आज तक नहीं आया था की एक तो सारे सपने बिगड़ गए और अब ये, ज़रूर कोई सेल्स मन होगा इस वक़्त, हुआ तो आज वह मेरे से पूरा गाली खाकर मानेगा.
ये सोच मैं गुस्सा हो रहा था की माँ बोली उठो और जाओ देखो कौन है.
मैं अपने गुस्से को दन्त के बीच दबाते हुए जाकर गेट खोला तो हैट साला.
कविता आंटी सामने खड़ी थी.
मैं: आप?कविता आंटी: क्यों क्या आप? भूल गए क्या मुझे?
मैं: नहीं मतलब आप अभी इतनी जल्दी?
कविता आंटी: अरे ये क्या मैनर्स है राहुल, पहले अंदर तो आने दो मुझे.
मैं: ओह सॉरी आंटी, अंदर आऔ.
उनके अंदर घुसते ही एक उम्मीद से गेट के बहार सर निकाल कर इधर उधर देखा, कही साथ में भारती तो नहीं आयी, पर कहा आज मेरा दिन ही खराब था, हर जगह नकमियाबी ही लिखी हुई थी. Bua or maa Ki chudai ki story:
मैं फिर गेट बंद कर अंदर मुड़ा जैसी ही कविता आंटी अंदर घुसी तभी माँ किचन से बहार अपनी नाइटी को ठीक करती हुई आयी. आंटी को देख बोली तुम इतनी जल्दी?
कविता आंटी: सरप्राइज! है है है! सोची सरप्राइज दूँ. पर…
माँ: पर क्या?
कविता आंटी: तुम दोनों को देख के लगता है मानो सरप्राइज नहीं दोनों को डरा दिया हो मैंने.
माँ: है है है! ऐसा कुछ नहीं. बस तू बोली न की तू लंच के बाद आएगी तो बस उसी लिए.
राहुल आंटी की बेग टीना के रूम में रख दो जाओ.
कविता आंटी: अरे नहीं टीना के रूम नहीं.
माँ: क्यों? क्या हुआ?
कविता आंटी: ओह टीना अब बड़ी हो चुकी है सरु (आंटी माँ को सरु करके अक्सर बुलाती है).
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आज कल बड़े बच्चो को किसी का उनके कमरे में जाना पसंद नहीं.
माँ: अच्छा ठीक है तू मेरे कमरे में रहो तो.
माँ ने मुझे इशारे से समझा दिया की बेग उनके कमरे में लेकर जाऊं.
इसके बाद जब मैं माँ के कमरे से वापस आया तो आंटी और माँ दोनों किचन में बाते कर रही थी, मेरा मानो लंड पे डंडा नहीं कोई लोहे से मार रहा था, एक आखिरी मौका था माँ के साथ थोड़ी मस्ती करने की वह भी आंटी ने जल्दी आकर बिगाड़ दिया.
मैं निराश होकर अपने रूम बंद कर बेड पर लेट गया, लेट कर यही सोचता रहा की कब ऐसा मौका आएगा जब मुझे माँ के साथ अकेले टाइम मिले, शायद जब आंटी नाहा रही हो तब या जब वह सोई रहे तब या फिर किसी बहाने आंटी को घर से बहार भेजना होगा किसी काम से तब.
यही सब सोचता हुआ मैं लेटा रहा कुछ 15 से 20 मिनट बाद गेट के बहार आंटी ने आवाज़ दी राहुल पढ़ाई कर रहे हो क्या?
मैं: हाँ! क्या हुआ?
कविता आंटी: कुछ नहीं सोची तुम कहा चले गए, अच्छी बात है करो पढ़ाई.
मैं बेड पर लेटा हुआ ही बोला: हाँ ओके आंटी और फिर मैं मन बोला: भाड़ में जा कमीनी आंटी आज ही का दिन मिला था तुझे आने के लिए और मेरे पापा भी नहीं है तो भी कबाब में हड्डी ऐसा सब सोच मन ही मन मानो सबको चुन चुन कर गाली दे रहा था.
कुछ देर बाद मैंने सोचा की अपने लैपटॉप में थोड़ा गेम खेलु तभी याद आया की मेरा लैपटॉप और हार्ड डिस्क दोनों ही माँ के कमरे मैं है पर फिर अचानक से याद आया की जब मैं आंटी की बैग माँ के कमरे मैं रखने गया तो दोनों ही उनके बेड पर नहीं थे. Bua or maa Ki chudai ki story:
वरना उसे देख कर मुझे याद आ जाता और मैं वापस ले आता इसका मतलब माँ ने उसे छुपा दिया था पहले ही फिर जाकर मैंने राहत की सांस ली चलो आंटी के हाथ मेरा हार्ड डिस्क नहीं आएगा.
माँ के साथ चुदाई की रात
अब क्या करता लेटा लेटा यही सोचता रहा फिर मोबाइल निकाला और एक दो छोटे मोठे गेम खेलने लगा तभी पता नहीं क्या मस्ती चढ़ी मन में की सोचा चलो भारती को मैसेज कर देता हूँ.
यूं तो उससे बात किये कई दिन हो गए है पर शायद आंटी को देख कर मन में आज भारती का ख्याल आने लगा.
मैंने वाट्सअप निकाली और भारती के नंबर पर “ही हाउ अरे यू?” करके एक मैसेज डाल दिया.
फिर थोड़ी देर और गेम खेला की तभी रिप्लाई आया भारती का.
भारती: ही ऍम गुड. हाउ अरे यू राहुल?
मैं: ऍम गुड तू.
भारती: माँ आयी क्या वह?
मैं: हाँ यही है.
भारती: ओके इसके बाद मैंने उसे मैसेज नहीं किया पता नहीं क्या मैसेज करता दिमाग में कुछ सूझ ही नहीं रहा था., फिर बस ऐसे ही कुछ मैसेज और भेजने लगा।
मैं: तुम क्यों नहीं आयी?
भारती: माँ ने बुलाया था पर मैं नहीं गयी उनके साथ.
मैं: क्यों?
भारती: टीना नहीं है ना आकर क्या करुँगी..
मैं: अच्छा तो मैं क्या यहाँ इवन हूँ.
भारती: है है है! येह झेलो अब अपनी माँ और मेरी माँ दोनों को.
गुड लक.मैंने ये अच्छा मौका समझा और रिप्लाई किया: तुम आ जाओ फिर उनकी टीम और हम दोनों की टीम.
भारती: है है है! वैरी फनी.
मैं: ऍम सीरियस यू के डाउन कंपनी. Bua or maa Ki chudai ki story:
बेटे ने की माँ की चुदाई की कहानी
भारती: ऍम सॉरी. कैन’टी.
मैं: भाई मत बोलना.
भारती: तो क्या बोलू भाई को भाई नहीं तो अंकल बोलू क्या (बड़े स्माइल वाली समिली)
मैंने सोच लिया की इससे अच्छा मौका नहीं मिलने वाला, हिम्मत करके रिप्लाई किया: डॉन’टी सी यू अस माय सिस्टर. सो प्लीज डॉन’टी कॉल में तहत.
भारती: व्हाट? (आंखे पहाड़ कर देखने वाली समिली)
मैं: येह मैं तुम्हे बहिन की नज़र से नहीं देखा हूँ आज तक यू अरे अस माय फ्रेंड तहत’स आल उसी लिए भाई सब मत बोलो.
भारती: पागल हो गए क्या?
मैं: पागल तो तुम हो काफी मॉडर्न बनती हो फिर ऐसे भाई बहिन बरोथेर एंड आल बला बला बला.
भारती: कुछ भी! जाओ जाकर पढ़ाई करो.
मैं: तुम भी आ जावा यहाँ फिर साथ में पढ़ाई करेंगे अकेले पड़ने का मन नहीं होता.
भारती: ओह! एक साथ पढ़ाई और तुम्हारे साथ! लास्ट टाइम याद है जब 10 के लिए मैं पढ़ रही थी और तुम 11 में थे.
किताब देखते ही तुम खर्राटे मारने लग जाते थे (बड़े स्माइल वाली समिली)
मैं: वह तब की बात थी 3 साल पहले की, अब मैं वैसा नहीं हूँ.
भारती: हाँ हाँ मैं मान गयी.
मैं: अरे यकीन नहीं आता तो आकर देख लो.
भारती: कब से तुम मुझे बड़े इंटरेस्ट के साथ बुला रहे हो, क्या बात है? बताओ कोई गर्लफ्रेंड का मामला है क्या जो सुलझाने के लिए तुम मुझे बुला रहे हो.
वरना तुम ऐसे कभी नहीं बोलते.
मैं: हाँ ठीक पहचाना प्लीज आऔ प्लीज हेल्प में न. प्लीज…ये मैंने ऐसे ही बोल दिया सोचा शायद इस पर वह मान जाये.थोड़ी देर उसका कोई रिप्लाई नहीं आया और फिर देर से ही एक रिप्लाई आया.
भारती: ओके! लेकिन एक काम करना पड़ेगा.
मैं पूरा खुश होकर उसे जवाब में लिखा: हाँ बोलो क्या?
भारती: टीना का रूम मुझे चाहिए, माँ के साथ मुझे नहीं रहना एक रूम में, काफी बाते करती है.
मैं: डॉन’टी वोर्री आंटी माँ के साथ उनके कमरे में रहेगी. Bua or maa Ki chudai ki story:
भारती: फिर भी मैं तेरे रूम में तो नहीं रह सकती न टीना से पूछ लो शाम तक आती हूँ बाई.
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इसके बाद मैं मानो मन ही मन नाचने गाने लगा पर अभी काम पूरा तो क्या शुरू भी नहीं हुआ था, माँ तो नहीं मिलेगी अब.
तो इस लिए कैसे भी करके भारती को अपने बिस्तर पर नंगा लेटाना था मैंने तुरंत दीदी को फ़ोन लगाया.
टीना: हेलो? क्या हुआ?
मैं: दी सुनना वह आंटी आयी हुई है घर पे.टीना: ओह आ गयी क्या पापा बता रहे थे.
मैं: हाँ और अब वह भारती भी शाम तक आ रही है.टीना: ओके तो क्या हुआ?
मैं: नहीं हुआ कुछ नहीं बस वह आपका कमरा पूछ रही थी रहने के लिए.टीना: हाँ ठीक है मैंने लॉक नहीं की है दे दो एक सेकंड नहीं हुआ दीदी को ये बोलकर की तभी वह टोकती हुई बोली फ़ोन पर: रुको रुको नहीं मत दो.
मैं: क्या?टीना: वह भारती को मेरे रूम में मत भेजो.
मैं: क्यों?टीना: जो बोली बस सुनो तुम ओके.
वैसे मैं भी यही चाहता था की भारती दीदी के कमरे में न रहे ये मेरे प्लान का पहला हिस्सा था, बिना कुछ किये ही होता हुआ दिखने लगा.
मैं: ओके दीदी पर क्या बोलू भारती को की क्यों न दूँ उसको आपका रूम.
टीना: एक काम करो. अब तक तो कोई मेरे रूम में गया नहीं होगा तो उसे लॉक करो और चाबी छुपा लो अपने पास, बाद में अगर माँ पूछी तो मैं बोल दूंगी की गलती से चाबी मैं अपने साथ ले आयी.
मैं: ओके दी नाइस आईडिया चाबी किधर है आपके रूम की?
टीना: वह मेरे रूम में टेबल पर होगी पर सुनो.
मैं: हाँ!
टीना: वाह किसी भी चीज़ को हाथ लगाए तो देख लेना.
मैं: नो दी डॉन’टी वोर्री विल नॉट.
टीना: तुम हो उसी लिए वोर्री हूँ. चलो जाओ लॉक करके मुझे एक मैसेज दे दो, बाई.
मैं तो अब सातवे आस्मां को चुने वाली छलांग मार रहा था बैठे बैठे भारती मेरे घर बेघर हो गयी.
अब कैसे भी ऐसा कुछ करना था की वह मेरे रूम में रहे वैसे प्रॉब्लम तो नहीं होनी चाहिए माँ और आंटी को क्यों की मैं और भारती तो उनकी नज़र में भाई बहिन है.
और बचपन में हम अक्सर एक रूम एक बेड पर ही सारे बच्चे सोते थे पर क्या मालूम की अब माँ और आंटी क्या सोचती थी.
मैं तुरंत रूम से बहार निकला और यहाँ वह देखने लगा की माँ और आंटी है किधर. Bua or maa Ki chudai ki story:
फिर किचन को गया तो माँ को किचन में पाया और पुछा: आंटी किधर गयी?
माँ: वह मेरे कमरे में चेंज करने गयी है. क्या हुआ?
मैं: नहीं बस दिखी नहीं तो पूछ लिया.
मैं तुरंत भागा दीदी के रूम आराम से बिना आवाज़ किये दीदी का रूम खोला और अंदर घुस कर रूम बंद कर लिया .
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फिर दीदी की टेबल पर चाबी ढूंढ़ने लगा तो चाबी तो मिली साथ ही टेबल के पास नीचे फ्लोर पर एक साटन का कपडा दिखा. उठाकर देखा तो वह एक साटन की छोटी नाईट ड्रेस थी पर सोचने भी लगा की मैंने दीदी को कभी इसे पहने नहीं देखा तो ये यहाँ फ्लोर पर क्या कर रही है.
फिर सब वही रख में रूम से बहार निकला और चुप चाप रूम लॉक कर अपने रूम चला आया. चाबी अपने बेड के नीचे छुपा दी और दीदी को भी एक मैसेज भेज दिया.
तो फिर इसके साथ एक और पड़ाव पूरा हुआ.अब भारती आयी तो उसके पास मेरे रूम के अलावा बस एक लिविंग रूम ही था. पर ऐसा तो नहीं था की भारती लिविंग रूम में रात काटे.
जो भी हो अब तो बस भारती के आने पर ही पता चलेगा की मेरे इरादे कितने रंग लाने वाले थे, मैं ये सोचता हुआ अपने रूम से निकला,
फिर सामने लिविंग से किचन को जाती हुई आंटी को उनके नाइटी में देखा, क्या मस्त लग रही थी.
मैंने अपने आप को समझाया की माँ के साथ जो हुआ उसके बाद से अब मेरी नज़र किसी भी औरत के लिए बहक जा रही थी. आंटी को उनके साटन की नाइटी में देख मैं उनके नंगे जिस्म का अकार अपने मन में बनाने लगा.
उन्हें और देखने के लिए मैं भी किचन को चला गया. अब मैं माँ और आंटी दोनों को पीछे से देख रहा था, दोनों को एक साथ नंगे खड़े अपने मन में देखने लगा.
आज तक आंटी के लिए मुझे ऐसा कुछ भी नहीं फील हो रहा था, लेकिन अचानक मेरे मन में मेरे कजिन बहिन भारती और अब आंटी दोनों ही सेक्सी नज़र आ रहे थे.
पता नहीं मुझे क्या हो रहा था और आगे ये सब मुझे कहा ले जाने वाली थी, जो भी हो मुझे मेरे मन में गलत कुछ नहीं दिख रहा था, बस अब यही था मन में की काश माँ के साथ इन दो माँ बेटियों को भी चोदने का मौका मिल जाये.
कुछ देर बाद हम तीनो मिलकर लंच किये और कुछ यहाँ वहा की बाते की कई बार मेरी नज़र आंटी की स्लीवलेस कंधो पर और अक्सर उनके साटन नाइटी से उनके बूब्स की दरार पर चली जाती, पर माँ के सामने होने से बार बार अपनी नज़र हटा लेता, अचानक आंटी ने आवाज़ बनायीं: आउच! Bua or maa Ki chudai ki story:
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माँ: क्या हुआ?
आंटी अपना बाय हाथ नीचे ले जाकर अपनी साटन की नाइटी ऊपर उठायी और धीरे धीरे ऊपर जंगों से ऊपर ले गयी मुझे उनकी जांघो की दर्शन मिल गयी, जब वह अपना हाथ बहार लायी तो उनके हाथ में एक प्लास्टिक का शॉपिंग टैग मिला.
ये वह टैग होता है जो हम जब नए कपडे लेते है तो उस पर दाम और ब्रांड का नाम वगैरा होता है.
कविता आंटी: ये गदा मुझे लगा कुछ काट दिया.
माँ: ये क्या अभी ली हो क्या?
कविता आंटी: हाँ आज यहाँ आ रही थी तो सोची ये लेकर आऊं.
माँ: अछि लग रही हो. है ना राहुल, पता नहीं माँ ने मुझसे क्यों अचानक से पूछी, कही उन्होंने मुझे आंटी पर नज़र डालते तो नहीं देख लिया.
मैं: है हाँ. अच्छा है.
कविता आंटी: थैंक यू. बेटा लंच के बाद माँ और आंटी माँ के रूम में चली गयी और में घडी देखता हुआ अपने रूम को.
यही सोच रहा था की भारती कब आएगी,
मैं तुरंत अपने रूम को साफ़ किया, थोड़ा झाड़ू लगाया बेडशीट जो पिछले 2 हफ्ते से नहीं बदली थी उसे बदला.
रूम में रूम फ्रेशनर भी मार दिया जिससे रूम अच्छा महके, भारती मेरे रूम को मना नहीं करे बस यही था मैं में. वक़्त गुज़रा और ४ बज गए. तब घर की घंटी बजी और मैं अपने बेड से उछाल उठा.
बस दोस्तो आज इस कहनी मे इतना ही बाकी अगले भाग मे.
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