Bhai Aur Maa Ki Chudai: हैलो दोस्तो, मैं भारती आज एक नयी कहानी के साथ, तो चलो सुरू करती हु नयी सेक्सी कहानी। आप लोगो को राहुल की कजिन बहिन अगले दिन करीब 9 बजे मैं अपने क्लास के बहाने अपनी दोस्त से मिलने जा रही थी। बात थोड़ी अजीब थी और अपनी दोस्त दिव्या से बिना बताये ही जा रही थी।
राहुल के घर से निकल रही थी तो मेरी माँ कविता मुझे देख बोली: कहा जा रही हो?

मैं: वह… आज टेस्ट है।
माँ: आज? अचानक से?
मैं: हाँ वह सर ने सरप्राइज टेस्ट रखा है।
माँ: हाँ सही है कब तक आओगी फिर?
मैं: दोपहर तक या उसके बाद 3 बजे से पहले आ जाउंगी।
माँ: ठीक है ठीक है संभल कर जाना मैं जल्दी से निकलने लगी और सोफे पर सोये राहुल को देख सोचा की कमीना कैसे सो रहा है।
खर्राटे मारके रात को तो बड़ा काम किया जैसे मैं सीधे निकली अपार्टमेंट से ऑटो पकड़ी और दिव्या के यहाँ गयी।
दिव्या मेरी स्कूल फ्रेंड है हम क्लास 7 से ही साथ है और वह काफी खूबसूरत भी है ऐसा कोई लड़का ना हो मेरे स्कूल में जो दिव्या को लाइन न मरना चाहता हो काफी गोरी लम्बी और प्यारी सी शकल और साथ ही काफी नॉटी भी।
करीब 9.45 बजे मैं उसके घर पहुंची उसके घर उसकी माँ थी उनसे हेलो बोलकर मैं और दिव्या सीधे उसके कमरे में चले गए।
कंबाइन स्टडी के नाम पर दिव्या: अच्छा अब बता क्या ज़रूरी बात करनी थी तुझे?
मैं: हम्म्म… यार बताऊँगि ना तो तू पागल ही हो जाएगी।
दिव्या: है है है क्यों? क्या हुआ? किसी से प्यार हो गया क्या तुझे?
मैं: छि वैसा कुछ नहीं।
दिव्या: जो भी है कुछ तो ख़ास ही है तेरी शकल काफी चमक रही है आज है है है!
मैं: हाँ बता दी तो तेरी शकल की फ्यूज भी उड़ जाएगी.
मैं फिर दिव्या को कल रात का किस्सा सुनाने लगी। Bhai Aur Maa Ki Chudai
Maa ki chudai kahani
कल रात डिनर के बाद अपने रूम मैं पढ़ रही थी और करीब 11.30 बजे के आस पास मैं सोने को चली गयी सोने के लिए बेड पर लेटी हुई मोबाइल देख रही थी।

ऐसे ही करीब 12 बजे अपनी मोबाइल बंद किया और सोने की कोशिश करने लगी की तभी मेरे रूम के डोर के नीचे से कुछ रौशनी दिखाई देने लगी।
मैं थोड़ी डर सी गयी ओर देखा तो फ्लोर के टाइल पर पड़ती टोर्च की रौशनी सी लगी मैं सोची की क्या ये राहुल था।
वह कही मेरे कमरे के बहार आधी रात को तो नहीं मंडरा रहा तभी हलकी सी फूस फसाहत की आवाज़ आयी मानो दो लोग बात कर रहे हो।
मैं थोड़ी डरने लगी क्यों की आवाज़ दो लोगो की थी कही कोई चोर तो नहीं थे मोबाइल उठायी और राहुल के मोबाइल पर एक मैसेज किया॥
मैं: हैलो! तुम जगे हुए हो क्या?मेरे मैसेज का कोई रिप्लाई नहीं आया पर बहार से फूस फसाहत की आवाज़ अब भी आ रही थी।
मेरी तो जान निकलने लगी और मैं तुरंत राहुल को कॉल की पर उसका फ़ोन बंद आया।
अब तो मैं और घबरा गयी थी सोचने लगी की कही चोरो ने राहुल को कुछ कर तो नहीं दिया।
माँ को फ़ोन लगाया तो उन्होंने फ़ोन ही नहीं उठाया आंटी के नंबर पर किया तो वह भी बंद आने लगा।
मेरे मन में डर था की साथ ही ये भी जानने की उत्सुकता की बहार है कोन फिर बिना कोई आवाज़ किये अपने दरवाज़े का लॉक खोलाऔर धीरे से दरवाज़ा हल्का सा खोल बहार देखा.
बहार की धीमी लैंप की रौशनी में मुझे लिविंग में राहुल के साथ कोई दिखा या दिखी! काला साया सा था पर बदन के अकार से कोई लड़की लग रही थी।
मैं सोचने लगी की कमीना राहुल अपनी गर्लफ्रेंड को आधी रात घर पे चोरो के तरह बुलाया है और मेरी यहाँ जान निकल गयी।
वह लड़की झुक कर राहुल के पेट के पास कुछ कर रही थी और कुछ धीमे बोल रही थी इसके बाद देखा तो वह झुक के उसके मुँह से मुँह लगाए थी ज़रूर किश कर रहे थे।
मैं मन ही मन मुस्कुराने लगी और सोचने लगी की क्या इन्हे अकेला छोडु या इनकी मस्ती का मज़ा लू।
एक और बात थी की मैं जानना चाहती थी की उसकी गर्लफ्रेंड दिखती कैसी है कही मुझसे ज़्यादा खूबसूरत तो नहीं पर इस धुंदली रौशनी में तो कुछ भी नहीं दिखने वाला थोड़ी सेकंड सोचने के बाद मैंने फिर अपनी चप्पल निकाली और धीरे से दरवाज़ा खोला, बहार निकली चुप चाप बिल्ली जैसी एकदम धीरे धीरे किचन के दरवाज़े तक पहुंची। Bhai Aur Maa Ki Chudai
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चैन की सांस ली की चलो कोई आवाज़ हुई नहीं अब तक किचन के दरवाज़े से लिविंग ठीक से दीखता है और साथ ही उनकी धीमी बाते भी सुनाई दे रही थी लिविंग से बाते सुनाई दी।
राहुल: हाँ और मैं आपका बेबी काऊ।
मैं सोची बेबी काऊ? मन ही मन हस्सी की ये इस अवस्था में भी बचकानी हरकत नहीं छोड़ता पर इसने आपका क्यों बोलै?
दूसरी आवाज़: तो दूध पीना है क्या?
ये आवाज़ थोड़ी जानी पहचानी सी थी पर धीमे होने के कारन मैं पहचान नहीं पा रही थी।
राहुल: हांफने की उत्सुकता से मैं हलके से झांक कर देखि वह लड़की राहुल के टाँगो से उसका शार्ट खींच कर निकलने लगी।
और फिर धीमे बोली: चलो अपनी टी-शर्ट निकालो, काश थोड़ी और लाइट होती तो साफ़ दिखता की वह कैसी दिखती है पर उसकी आवाज़ अब भी काफी जानी पहचानी सी लग रही थी।
मैं उस आवाज़ को अपनी सारी फ्रेंड्स की आवाज़ से टोल रही थी पर किसी से नहीं मिल रही थी।
राहुल कमर के बल उठा और अपनी टी-शर्ट खोल फेखा फिर वह लड़की उसके छाती को धकेल उसे वापस लेतायी।
फिर वह दोनों एक दूसरे से नंगे बदन लिपटकर सोफे पर किश करने लगे उन दोनों को देख मुझे अब मज़ा आने लगा दो प्रेमियों को प्यार करते देख मेरे अंदर गुड़गुड़ाहट होने लगी।
तभी वह लड़की बोली: कितना मन कर रहा था पूरे दिन हो गया ? ये सुन्न मेरे होश उड़ गए, क्या मैंने सही सुना?
राहुल ने माँ को बोला क्या? नहीं मैंने गलत सुना होगा था सच मे देखा तो वह फिर से एक दूसरे को किश करने, फिर वह लड़की थोड़ी उठी और राहुल के ऊपर होती हुई अपनी बूब उसके मुँह में देती हुई बोली: लो माय बेबी काऊ पियो दूध।
अब मैं उस आवाज़ को सही पहचान पायी और साथ ही उस लड़की के साये को ये सच मे आंटी थी राहुल की माँ है भगवान् ये क्या है
मुझे यकीन नहीं हुआ राहुल अपनी माँ की बूब्स को चूस रहा था
मज़े से राहुल को अपने बूब्स चूसने दी रही थी और अपनी जांगे राहुल की जांघो के बीच रगड़ रही थी।
कुछ देर बाद आंटी अपनी एक हाथ राहुल के पेट से नीचे ले जाकर कुछ करने लगी राहुल उनकी बूब को और ज़ोर से चूसने लगा,
आंटी मुँह से मज़े के हलकी आहे निकाल रही थी मुझे ये सब देख अजीब लग रहा था। Bhai Aur Maa Ki Chudai
मैं जिसे राहुल की गर्लफ्रेंड समझ रही थी वह उसकी माँ थी।
थोड़ी देर बाद आंटी राहुल के पेट से होती हुई धीरे धीरे उसकी टाँगो के बीच जा बैठी फिर राहुल के तरफ देखती हुई उसके लंड को हाथो से पकड़ा,
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वैसे तो मैं राहुल का लंड शाम को देखा था उसकी शार्ट से बहार निकला हुआ पर अब जाकर उसकी पूरी लम्बाई और मोटापा आंटी के हाथ में देख रही थी।
कुछ सेकंड बाद आंटी झुकी और अपने मुँह में उसका लंड ले लिया इसे देख अब मुझे घिन्न आने लगी कोई माँ ऐसे कैसे कर सकती है।
वह अपने बेटे का लंड चूस रही थी की! पर ये दूसरी बात थी की उन्हें देख मेरे अंदर भी कुछ होने लगा।
मेरे हाथ अपने आप ही मेरे टॉप के ऊपर से मेरी निप्पल पर चले गए और मुझे पता भी नहीं चला आंटी अपने सर को ऊपर नीचे हिलाती हुई धीरे धीरे उसके लंड को अपने मुँह में घुसा और निकल रही थी।
फिर उठ कर बोली: मज़ा आ रहा है बेबी को?
राहुल: हाँ बहुत, कैसा सम्बन्ध है भला किसी माँ बेटे का? लंड चूस कर पूछ रही है मज़ा आया की नहीं इन सवालो के साथ मैं उलझी हुई थी।पर साथ ही मेरे रग रग में हलकी उत्तेजना उमड़ रही थी आंटी फिर से उसके लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी।
फिर सर ऊपर नीचे करने लगी मानो अपने मुँह को उसके लंड से चुदवा रही हो पता नहीं क्यों पर आंटी को ऐसा करते देख
मैंने अपनी एक ऊँगली अपने मुँह में डाली और उसे चूसने लगी।
फिर ऊँगली को मुँह में अंदर बहार उनके साथ ताल मेल बनती हुई खेलने लगी।
थोड़ी देर बाद आंटी लंड को मुँह से निकाल आगे को हुयी और उसके जांघो के बीच थूकने लगी सब कितना गंदा लग रह था पर साथ ही काफी मज़ेदार भी था।
वह फिर से उसके लंड को चूसने और खाने लगी पर इस बार उनका हाथ राहुल के लंड के नीचे कुछ कर रहा था जिससे राहुल को काफी मज़ा आ रहा था।
वह मज़े से आँख बंद किये पड़ा हुआ था कुछ 5 मिनट बाद वह उसके लंड को खा कर उठी और अपना मुँह पोछने लगी लाल रंग की रौशनी में वह ऐसे नंगी बैठी मुँह पॉच रही थी जैसे कोई पक्की रंडी हो बाजार की।
वह वापस राहुल के ऊपर आती हुई लेती फिर राहुल उनके थूक से सने हुये मुह को किश करने लगा।
भले सब गन्दा था पर अब मुझे ऐसा शायद नहीं लग रहा था मैं भी अपने थूक से सनी उंगलियों को अपने मुँह और होंटो पे पोछने लगी तभी किश को तोड़कर आंटी राहुल से पूछी: बेबी को बहुत मज़ा आया न? Bhai Aur Maa Ki Chudai
राहुल: हाँ सारिका।
आंटी: तो अब मम्मी को भी मज़ा दो।
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उनकी इस बात से मेरे अंदर एक अजीब सी लहर उठ गयी मैं सोचने लगी की क्या अब वही होने वाला है जो मैं सोच रही थी तभी राहुल उठ खड़ा हुआ सोफे से और आंटी उसकी जगह लेट गयी
एक टांग सोफे के बैक रेस्ट के ऊपर रखी और दूसरी टांग सोफे के इस तरफ नीचे लटकाये हुये, इससे आंटी की जंघे पूरी फैली हुई थी।
राहुल के लिए ये देख मैं अपनी टॉप के ऊपर से अपने निप्पल को निचोड़ने लगी।धीरे धीरे उन दोनों की ये सारी गन्दी हरकते मेरे लिए बेहद मज़ेदार होने लगी।
राहुल उनकी फैली जांघो के बीच जा बैठा।फिर थोड़ी देर आंटी को देखने के बाद उनकी चूत को सूंघने लगा और फिर चाटना शुरू किया।
आंटी सर उठा कर मज़े लेने लगी उन्हें ऐसे देख मुझे काफी उत्तेजना होने लगी सोचने लगी की अगर देखने से इतना मज़ा हो तो उन्हें कितना मज़ा आ रहा होगा।
आंटी आंखे बंद कर अपने बूब्स को दबाती तो कभी निप्पल को नोचती, कोई शक नहीं उन्हें बहुत मज़ा आ रहा है ।उन दोनों को देख मेरी जांगे अब आपस में रगड़ रही थी मेरे निचले बदन में एक मचलाहट सी हो रही थी।
मनो पाँव के तलवे पर करोडो सुई चुभती हुई गुड़ गुदा रही हो।
मैं अब अपने एक हाथ की उंगलियों को चूस रही थी।
साथ ही दूसरे हाथ से पायजामे के ऊपर से अपनी चूत को रगड़ रही थी।
थोड़ी देर बाद देखि तो राहुल उनकी चूत चाटने के साथ एक हाथ आगे पीछे धीरे धीरे हिला रहा था यकीनन अब वह उनकी चूत को ऊँगली से चोद भी रहा था।
आंटी एक हाथ से सोफे को कस कर पकडे हुई थी और दुसरे से अपनी निप्पल खींच रही थी। Bhai Aur Maa Ki Chudai
मुझसे अब रहा नहीं गया और मैं अपने पायजामे की इलास्टिक पकड़ उसे नीचे खींच दिया, नीचे पायजामे को अपने घुटनो तक खोल मैं अपने हाथ से अब अपनी नंगी चूत को सहलाने लगी।
वह काफी गीली हो चुकी थी दूसरे हाथ को अपने टॉप के नीचे से अंदर डाला और अपने निप्पल को खींचने लगी।
आंटी का हाथ जल्द ही सोफे को छोड़ बालो को पकड़ उसके मुँह को उनकी चूत के तरफ दबाने लगी।
आंटी को बहुत मज़ा आ रहा था। वो अपनी उंगलियो से अपनी चूत के दाने को टटोलती हुई सहलाने और रगड़ने लगी।
मेरे मुँह से बिना आवाज़ की आहे निकल रही थी आँखों में उन्हें देख नशा आ रहा था, कुछ 5-7 मिनट ऐसे ही राहुल अपनी माँ को और मैं खुद को मज़ा देती रही।
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और फिर देखा तो आंटी अपने बूब्स से हाथ हटाकर अपने मुँह में दबाती हुई अपनी कमर को ऊपर किया और उछालने लगी।
मनो उन्हें झटके लग रहे हो मैं समझ गयी की वह झड़ रही थी मेरी भी ऊँगली काफी तेज़ी से मेरी चूत के दाने पर मसलने लगी।
कुछ 20-25 सेकंड आंटी ऐसे ही झड़ते हुये बेसूद पड़ी रही।
राहुल उठ कर बैठा अपना तना हुआ लंड हिलाने लगा फिर आंटी उठ बैठी और राहुल के सर को पकड़ खींचती हुई उसे किश करने लगी।
वह सच मे अपनी चूत से निकले रस को राहुल के मुँह से चख रही थी।
ये सोच मैं अपनी चूत को सहलाने लगी तभी आंटी राहुल के लंड को अपने हाथ में लेकर धीमी आवाज़ में बोली: अब इससे मेरा रस निकालो निकलो जान?
राहुल: हाँ बिलकुल… बहुत वेट किया आज, ये सुन तो बस मेरे अंदर करंट दौड़ गया।
मैं अपनी चूत के दाने को हलके से चींटी काटी सहम उठी क्या सच मे अब राहुल अपनी माँ को चोदेगा ?
क्या वह अपना लंड उसकी माँ की चूत में घुसेगा?
मैं पागल होने लगी अपनी चूत को रगड़ती हुई और जानना चाहती थी की आगे क्या होगा।
आंटी अपने घुटनो के बल सोफे पर उठी और वैसे ही राहुल के तरफ पीठ दिखाती हुई मूड गयी पलट कर उसे देखती हुई उसके मुँह पर एक हल्का सा थपड मारा,
सामने को झुकती हुई राहुल को गांड दिखाकर कुतिया बनके बैठ गयी। Bhai Aur Maa Ki Chudai
राहुल भी उनके पीछे अपना लंड पकडे खड़ा हो गया।
आंटी उसे पलट कर देखि और फिर अपनी एक हाथ पे थूकती हुई उस हाथ को पीछे ले जाकर उसके लंड पर लगाने लगी।
फिर आंटी ने अपने हाथ से उसके लंड को अपने पीछे लगाया और उसी हाथ से राहुल के कमर पर मार इशारा की जिसपर राहुल कमर को आगे बढ़ाया।
और आंटी का सर ऊपर को उठ गया, कोई शक नहीं उसने अपना लंड उनकी चूत में घुसा दिया था।
तभी आंटी वापस पलट कर राहुल को इशारा कर अपने पास बुलाया राहुल सामने अपनि माँ के मुँह के पास आया तो आंटी दूसरी तरफ पड़ी सोफे पर ऊँगली दिखाती हुई बोली: वह कुशिओं दो मुझे।
वह उठ कर सोफे के पास जाने लगा तो मैं वापस चुप गयी की कही वह मुझे देख न ले।
मैं वही चुप कर खड़ी रही तो उनकी बात करने की आवाज़ आयी
राहुल: ये क्यों?
सारिका आंटी: समझ जाओगे अब जाओ पीछे और फिर से घुसाओ।
उफ्फ्फ आंटी जब बोली की जाओ पीछे और घुसाओ ये सुन मुझसे बिलकुल भी रहा नहीं जा रहा था ।
मैं धीरे से वापस झाँक कर देखने लगी तो राहुल अब उनकी कमर को पकड़ कर धीरे से अपनी कमर आगे बड़ा रहा था।
वह काफी धीरे अपनी माँ को चोद रहा था।
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मैं अपने हाथ को अपने मुँह के पास लायी और जो मेरी चूत की खुशबू से महक रही थी उसे चूसती हुई गीली की और फिर हाथ नीचे ले गयी।
और अपनी चूत को और ज़्यादा गीली करती हुई रगड़ने लगी।
कुछ 5 मिनट बाद आंटी राहुल के कमर को पकड़ आगे पीछे हिलाने लगी।
मनो वह राहुल को कह रही हो की अब थोड़ी तेज़ी से करे और यही हुआ उनके ऐसे करने के बाद राहुल अब तेज़ी बढ़ाते हुए अपनी कमर को आगे पीछे हिला रहा था।
आंटी तुरंत अपनी मुँह में कुशिओं को दबाकर चबाने लगी शायद वह अपनी सिसकारियों को शांत कर रही थी।
मुझसे अब और नहीं सहन हुआ और अपनी दो ऊँगली अपनी चूत में घुसकर खुदको चोदने लगी। Bhai Aur Maa Ki Chudai
राहुल काफी तेज़ी से अपनी माँ को पीछे से चोद रहा था और उसकी कमर के साथ ताल मेल बनाती हुई मैं अपनी चूत मे ऊँगली से चोद रही थी।
मेरी आँखों में मस्ती का नशा उतर रहा था फिर आंटी अपना एक हाथ पीछे ले गयी पर वहा क्या किया मुझे दिखा नहीं लेकिन वहा जो भी किया उसे देख राहुल और भी ज़ोर से उनकी चूत चोदने लगा।
ऐसा क्या किया होगा आंटी ने? करीब 2 से 3 मिनट इसी तरह राहुल चोदता रहा और फिर आंटी अपने हाथ से उसे रोका,
अपने पास बुलाकर बोली: मेरी गांड को भी चोदो न ओह! क्या आंटी ने कहा की उनकी गांड चोदो? उनकी बातो से मुझे काफी मज़ा आ रहा था.
सोचने लगी की गांड चटवाने में कितना मज़ा आता होगा फिर देखि तो राहुल आंटी के पीछे झुक कर बैठा और अपने हाथो से उनकी गांड फैलाकर अपनी मुँह उनकी गांड में छुपा लिया।
वह उनकी गांड चाट रहा था ऐसा सोच मैं मेरे बूब्स को निचोड़ रही थी।
उसे बहार निकाल कर चाट कर गीली कर दिया और फिर अपने पीछे लगाई और उन दोनों को देखती हुई उस गीले हाथ की उंगलियों से अपनी गांड की छेद को सहलाने लगी।
मेरे एक हाथ चूत में ऊँगली चूत रहा था और दूसरा गांड की छेद को गीली कर सहला रही थी।
कुछ 2 मिनट उनकी गांड चाटने के बाद राहुल उठा और फिर से उनकी चूत पीछे से चोदने लगा पर इस बार वह अपना एक हाथ ऐसे ऊपर नीचे हिला रहा था।
मनो वह उनकी गांड में भी ऊँगली घुसा रहा हो मेरी भी मैं कर रहा था की मैं भी अपनी गांड मैं ऊँगली करू पर खुद को रोक लिया और उन्हें देख सिर्फ एक हाथ से आगे चूत चोदी और दूसरे से पीछे गांड की छेद मसल कर मज़ा लिया।
आंटी को काफी मज़ा आ रहा था और वह बस तकिये में मुँह दबायी पड़ी चुदवा रही थी।
अगले 5 से 7 मिनट राहुल ऐसे ही उनकी गांड में ऊँगली करता हुआ उनकी चूत चोदने के बाद वह अचानक से अपना लंड निकाल हाथ से पकड़ा और फिर से घुसाने लगा पर तभी आंटी तिलबिला उठी और उसे अपनी हाथ से धक्का मर कर हटाया.
मैं समझ गयी की शायद राहुल ने अपना लंड इस बार आंटी की गांड में घुसाने की कोशिश की होगी पर तभी आंटी पलट कर राहुल को इशारे से फ्लोर के तरफ दिखा। Bhai Aur Maa Ki Chudai
राहुल उतर कर फ्लोर पे पड़ी एक कपडा उठा कर आंटी को दिया और आंटी ने उसमे से कुछ क्रीम की बुँदे जैसी कुछ निकली।
फिर हाथ पीछे कर उस बोतल से क्रीम अपने पीछे लगा डाली और फिर अपनी हाथो से अपने पीछे मलने लगी।
मुझे कुछ समझ नहीं आयी की क्या हो रहा था लेकिन तभी आंटी राहुल से बोली: उसको अच्छे से मेरी गांड की छेद पर मलो।
फिर घुसाओ अपना लंड दर्द नहीं होगा मुझे अब जाकर समझ आया की वह शायद कोई क्रीम थी जो वह अपनी गांड की छेद पर मल रही थी।
माँ और बेटे की चुदाई
उनकी बात सुन मेरे मन में अब गांड में ऊँगली घुसाने की बहुत इच्छा होने लगी सामने मेरी ऊँगली तेज़ी से मेरी चूत में घुसने लगी।
राहुल तुरंत उनके पीछे गया और फिर अपने एक हाथ से उनकी गांड में कुछ करने लगा वह ज़रूर उस क्रीम को उनकी गांड की छेद पर अच्छे से मल रहा था।
कुछ देर बाद आंटी पलटी और धीमे बोली: चलो हो गया नाउ फ़क मी, बेबीउफ्फ्फ्फ़! वह कितनी सेक्सी बाते बोलती है उनकी बाते सुनकर ही मेरी चूत से रस की बूँद उमड़ रही थी।
मैं खुद को रोक नहीं पायी और अपना हाथ पीछे से मुँह के पास लायी और सूंघी मेरी गांड की हलकी बदबू अब मुझे खुशबू सी लग रही थी।
कुछ न सोचा और मुँह में डाल कर चाटने लगी और फिर वापस पीछे अपने गांड की छेद के पास ले गयी फिर देखा तो राहुल पूरा उत्सुकता से अपने लंड को पकड़ उनके पीछे लगाने लगा।
तो आंटी पलट कर बोली: शठ श! धीरे धीरे डालना इस पर राहुल उनकी एक कमर पकड़ा और धीरे से कमर को आगे बढा दिया उसी के साथ मैं भी अपनी एक ऊँगली गांड की छेद में घुसाने लगी हलकी जलन हुई पर आगे इनके लाइव सेक्स को देख मैं सारी जलन भूल गयी।
और अपनी गांड मैं ऊँगली करने लगी आंटी कुशिओं में मुँह दबायी पड़ी रही और राहुल उनको पीछे से उनकी गांड चोदने लग गया थोड़ी देर बाद आंटी ने हाथ से जल्दी से करने का इशारा किया।
जिसपर राहुल उनकी कमर को दोनों हाथो से पकड़ बेरहमी के साथ उन्हें चोदने लगा उन्दोनो को देख मेरे हाथो में भी तेज़ी आ गयी।
मैं काफी ज़ोर से अपनी चूत में दो ऊँगली से चोदने लगी और साथ ही गांड में पीछे से एक ऊँगली ये नज़ारा और मेरे हाथ मुझे मदहोश करती हुई सेक्स की मस्ती में डूबा रही थी। Bhai Aur Maa Ki Chudai
थोड़ी देर बाद आंटी अपनी एक हाथ नीचे से ले गयी और शायद वह अपनी चूत में मेरी तरह ऊँगली कर अपना मज़ा बढा रही थी।
आंटी के मुँह से दबी हुई आवाज़ निकल रही थी अगर वह कुशिओं में मुँह न दबती तो शायद चिल्ला उठी।
उन्हें देख मेरे हाथो में तेज़ी आती जा रही थी मानो मेरे हाथ नहीं थकने वाले और मैं ज़ोर ज़ोर से अपनी चूत और गांड में ऊँगली घुसा रही थी।
एक साथ ऐसे ऊँगली करने का मज़ा ही कुछ और था।तभी देखा तो राहुल अचानक से रुक गया और ऊपर की और देखता हुआ एकदम सा मूरत बन गया।और उसके साथ ही नीचे आंटी झटके खाने लगी उनका शायद झड़ गया और उन्दोनो को इस अवस्था में देख मेरे बदन से भी रहा नहीं गया और मैं अपनी हाथ में झड़ पड़ी।
मेरी चूत के रस मेरे हाथ से होती हुई मेरी झंगो से नीचे जाने लगी और आँखों में सब धुंदला होता गया। 5 मिनट दिवार के सहारे खड़ी होश में आने लगी खुद को और फिर उन्हें देखने लगी राहुल सोफे पे थका हुआ बैठा था।
बेटे ने माँ को जम के चोदा
और आंटी उठ कर उसके मुँह के पास जाकर बोली: थक गया मेरा बेबीराहुल: हफ़… कल भी करेंगे ना?
सारिका आंटी: हाँ… अगर दिन में नहीं तो ऐसे ही रात को आजाऊंगी अपने बेबी के साथ मस्ती करने चलो अब कपडे पहनो और सो जाओ गुड नाईट।
राहुल: आप को भी गुड नाईट।
मैं समझ गयी की अब आंटी अपने कमरे क जाने वाली थी मैं नहीं चाहती थी की वह जब अपने कमरे को जाये तो शायद कही पानी पीने के बहाने किचन को न आ जाये। Bhai Aur Maa Ki Chudai
मैं पकड़ना नहीं चाहती थी और उन्दोनो को अपने हालत में छोड़ मैं वहा से जैसे आयी वैसे ही धीमे पाँव अपने कमरे को चली आयी।
मैं अपनी सारी बात ख़त्म कर दि। उसको देखा तो वह अपने टॉप पर अपनी निप्पल निचोड़ रही थी और बोली: वाओ!
मैं: वाओ? क्या ये जो हुआ सही था?
दिव्या: यार पता नहीं माँ और राहुल! हम्म्म गलत है पर वाओ! है है है!
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मैं हाथ आगे बढ़ाती हुई उसके दूसरे निप्पल को टॉप पर चुटी काट बोली: पागल सोच तेरी सुन के ये हालत तो मेरी क्या हुई होगी।
दिव्या: राहुल दिखने में कैसा है?
मैं: क्यों? खड़ूस दीखता है एक दम ।
दिव्या: तू उसको पटा न।
मैं: व्हाट?
दिव्या: सोच जो अपनी माँ की उम्र की औरत को इतना मज़ा दे सके उसकी तो बात ही अलग होगी।
ये कहती हुई उसने मुझे आँख मारी अब मैं दिव्या की बात पर ध्यान देने लगी शायद राहुल को लेकर मेरे मन में विचारो की एक नयी राह बनने लगी
तो दोस्तो इस कहानी मे आज बस इतना ही अगले भाग मे बतऔगी कैसे मैंने और दिव्या ने उससे चुदाई कारवाई।
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Praveen Singh
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