Aunty ki chudai Maa Ke Saath: हैलो दोस्तों मैं राहुल, इस कहानी के पिछले भाग में आप लोगो ने पढ़ा की कैसे कविता आंटी के साथ मैं माँ के कमरे के वाशरूम में नहाने जा पहुंचा था और वहा मैंने आंटी से एक मज़ेदार रोलप्ले करने को कहा जो आंटी मान भी गयी, वह मेरी गाए बनकर मुझसे नहलवाने को तैयार हो गयी फिर मैं उनके हर हिस्से को किसी गाए की तरह चारो पैरो को अच्छे से धोने लगा, एक पल ऐसा आया जब मुझे थोड़ी मस्ती सूझी फिर, इस कहानी के पिछले भाग मे क्या हुआ ओर पढ़ने के लिए नीचे दिये हुये लिंक पर क्लिक करे और पढ़िये,
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फिर कमरे के दरवाज़े के खुलने की आवाज़ आयी, आंटी चौक उठी और दबी आवाज़ में पूछने लगी:
आंटी: तुम तुमने लॉक नहीं किया क्या गेट को ?हम दोनो शांत थे इतने शांत की बाल्टी में गिरते पानी की आवाज़ पूरे बाथरूम में गूँज रही थी, बहार से भारती ने आवाज़ दी:
भारती: माँ सुनना! अगर ये मेरी माँ होती तो घबराने की बात नहीं थी पर ये तो भारती थी जिसकी आवाज़ सुन्न आंटी के चेहरे का रंग सफ़ेद हो गया था और आंटी अपने होंटो पर ऊँगली रख मुझे इशारा किया की मैं आवाज़ न करू और जल्दी से उठ खड़ी हुई,मैंने भी शांत रहना सही समझा भले भारती जानती थी मेरे और अपनी माँ के बारे में पर आंटी ये बात नहीं जानती थी की भारती को सब पता है आंटी मेरे तने लंड को पकड़ कर खींचती हुई दरवाज़े के पास वाली दिवार के पास ले जाकर मुझे खड़ा कर दिया , फिर दरवाज़ा को थोड़ा से खोल कर बहार झाँक कर भारती से पूछा: Aunty ki chudai Maa Ke Saath:
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आंटी: हाँ क्या हुआ?
भारती: आप अभी नाहा रहे हो?
कविता आंटी: हम्म्म हाँ हाँ क्यों?
भारती: नहीं कुछ नहीं, यहाँ दरवाज़े के पीछे आंटी मेरे सामने अपनी गांड दिखाकर खड़ी थी मेरे सामने, उनकी गदरायी गोल गांड को देख मेरे हाथ कहा शांत रहते फिर मैंने अपने हाथ में उनके गोल गांड को पकड़ सहलाने और दबाने लगा वह भारती से बात कर रही थी।

कविता आंटी: ओह! को…कुछ काम है क्या तुम्हे?
भारती: वह मैं दिव्या के यहाँ जाकर आती हूँ, मेरे दुसरे हाथ में अब भी मैं फॉसेट पकडे हुए था सोचा की आंटी के इस घबराहट भरी समय में थोड़ी और परेशानी लायी जाए फिर अपने एक हाथ से उनकी गांड की दरार को फैलाया और फॉसेट के मुँह को उसके बीच रगड़ते हुए पानी चालू कर दिया, आंटी भारती को जवाब दे ही रही थी जब मैंने ये किया और बातो के साथ उनकी हलकी सिसक निकल गयी।
कविता आंटी: मममम अह्ह्ह दिव्या के यहाँ अभी क्यों?
भारती: क्या हुआ आपको? मैं उनके पीठ पीछे दरवाज़े के इस तरफ खड़ा हुआ मुस्कुराता रहा फिर अपने काम में लगा रहा जांघो के बीच से उनकी चूत के साथ उनकी गांड की छेद पर पानी की तेज़ फुहार मारी। मैं फॉसेट को रगड़ता हुआ उन्हें मज़ा देने लगा, उनकी चूत की होंटो के बीच फॉसेट के मुँह को दबाया और पानी को पूरी तीजी से मार दिया,
कविता आंटी: को… कुछ नहीं कुछ भी तो नहीं।
भारती: आप ठीक तो हो? कुछ सेकंड पानी अंदर गया और फिर भरी मात्रा में फूट कर उनकी चूत से छलकती हुई उनकी जांघो से नीचे फर्श पर छपछपाहट की आवाज़ के साथ गिर पड़ा।
कविता आंटी: हाँ ठीक हूँ!
भारती: वह…वह क्या आवाज़ थी, बेचारी आंटी ना भारती को कुछ बोल सकती थी न ही उसके सामने मुझे रोक सकती थी इसका फायदा उठाकर मैंने फिर से उनकी चूत में पानी दे मारा और इस बार काफी ज़ोर से दबाया फिर इस बार पिछले बार से कुछ पल ज़्यादा और उनकी चूत से काफी ज़्यादा पानी दोबारा बहार निकलने लगा ये सब करने में जितना मज़ेदार था उससे कई ज़्यादा उनकी चूत से छलकते पानी की धार को देखने में था। Aunty ki chudai Maa Ke Saath:
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कविता आंटी: आह्हः कुछ नहीं ये आवाज कैसी आवाज़?
भारती: आप सच मे ठीक तो होना? क्या हो रहा है आपको? आंटी अपना एक हाथ सामने से नीचे ले गयी और चूत से फॉसेट को पकड़ हटाकर अपने हाथ से चूत का मुँह धक लिया फिर वह सच मे मुझसे परेशान थी और मुझे उन्हें ऐसे गंभीर अवस्था में परेशान करने में काफी मज़ा आ रहा था, पर अब क्या? वह तो चूत छुपा कर खड़ी थी जैसे कोई कुतिया अपनी पूँछ से अपनी चूत छुपा लेती हो पर मेरा दिमाग कहा शांत बैठने वाला था ऐसा तो नहीं था की मैं ये पानी का खेल कही और नहीं खेल सकता था क्यूकी आंटी सोच रही थी की मैं अब उन्हें परेशान नहीं कर पाउँगा और दरवाज़े के उधर भारती से आवाज़ ठीक करती हुई बोली:
आंटी: तुम क्या बोल रही हो मैं ठीक हूँ ओह्ह्ह!वह अपने बात के बीच ही रुक गयी या यूं कहो मैंने उन्हें रुकने पर मजबूर कर दिया फॉसेट के मुँह को उनकी गांड के छेद से दबाकर हल्का सा धकेल मैंने पानी को पूरी तेज़ी के साथ दे मारा, उन्होने शायद ये कभी नहीं सोचा था या उम्मीद की थी वह इसके विरुद्ध में अपनी गांड को कस लिया लेकिन ऐसे करने से फॉसेट का मुँह और अच्छे से दब गया पानी जा तो रहा था पर ये सोच की पानी जादुई तरीके से कहा गायब हो रहा है ये सोच कर मैं काफी उत्तेजित होता गया और बिना रुके पानी डालता गया।
भारती: अरे अरे माँ आप…क्या हुआ अब? आंटी ने एक बार चाहा की वो दूसरे हाथ से मुझे रोके पर ऐसे करने पर उन्हें दरवाज़ा छोड़ना पड़ता मगर उन्होने वापस दरवाज़े को पकड़ लिया , वरना अगर दरवाज़ा खुल जाता तो उनके हिसाब से बवंडर मच जाता, वह मजबूर थी और वो ऐसे ही खड़ी रही एक हाथ से अपनी चूत छिपाये गांड को कस्ती और पेअर मचलती हुई पर मैं उन पर कोई रहम नहीं दिखाया। Aunty ki chudai Maa Ke Saath:
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कविता आंटी: ओह्ह कुछ नहीं तुम्हे कहा जाना है जाओ तुम।
भारती: ओके ओके जाती हूँ पर…
कविता आंटी: ठीक है तुम जाओ जल्दी आना शाम ढलने से पहले, भारती के जाते ही आंटी ने दरवाज़े को तुरंत बंद किया और फॉसेट को छुड़ाकर हटने की कोशिश की।
और अब वह मेरी बांहो में मचलती हुई बोली:
आंटी: अह्ह्ह राहुल छोड़ो मुझे ओह्ह्ह! मैं कुछ नहीं बोल और उन्हें तड़पता रहा जब वह आगे थोड़ा गुस्से में बोली:
आंटी: राहुल छोड़ो मुझे तुम क्या कर रहे हो! उनके आवाज़ में गुस्से को भाप मैं फॉसेट उनकी गांड से हटाया।
आंटी : आहा राहुल छोड़ो मेरी कमर, पर पता नहीं मेरे अंदर उन्हें तड़पाने का ऐसा कौनसा कीड़ा घुसा हुआ था मैं फॉसेट को नीचे डाला और अपनी 3 उंगलिया उनकी गांड की दरार को फैलाता हुआ सीधे उनके छेद पर लगाकर अंदर दबा दिया फिर
कविता आंटी: अह्ह्ह्ह! उनकी आवाज़ में सिसक और दर्द दोनों भरी हुई थी पर मेरी जानकारी के हिसाब से उनकी इस सिसकार में मज़े का भार मुझे ज़्यादा लगा मैंने अपनी 3 उंगलिया उनकी गांड में दबाकर करीब आधी घुसा दिया।
कविता आंटी: राहुल प्लीज बेटा छोड़ो मुझे अह्ह्ह! मैंने उन्हें कस कर पकड़ा रहा और कंधे से उनके कान के पास आकार बोला :
मैं: क्या हुआ आंटी? बताइयेना! मैं उनके मुँह से उनका ये एहसास जानना चाहता था पर वह बोली:
आंटी: प्लीज राहुल प्लीज छोड़ो, मेरी नावी में दर्द सा हो रहा है छोड़ो मुझे उनकी इस कराह मैं भी मजबूर हो गया और अपने हाथ को पीछे खींच लिया जैसे ही मेरी उंगलिया उनकी गांड से बहार निकली पानी की एक सीधी और काफी तेज़ धार उनकी गांड से निकल नीचे फर्श पर गिरि, सच कहता हूँ जितना दिलचस्ब था ये देखना उतना मेरी ज़िंदगी में और कुछ न था करीब 2-3 सेकंड लम्बी और तेज़ तरार पानी की धार सीधे उनकी गांड से नीचे फर्श परऔर शायद 5-6 बार रुक-रुक कर निकलती रही।
और तभी बाथरूम के दरवाज़े पर दुबारा खत खटाहट हुई, इस बार दरवाज़े के बहार आवाज़ मेरी माँ की आयी और वह बोली: हेलो दरवाज़ा खोलो ये मैं हूँ! मैं आंटी को उनके हालत मैं छोड़ कर दरवाज़ा खोला माँ अंदर झांकती हुई अंदर आयी और कविता आंटी को दिवार से सटी बेहाल खड़ी देख बोली:
माँ: क्या कर रहे थे तुम दोनों? कविता क्या हुआ?
आंटी: आंटी तुरंत संभालती हुई सीढ़ी खड़ी बोली: को…कुछ नहीं सरु ये राहुल भी ना पर इतनी तेज़ धार निकलने के बाद भी उनके अंदर अब भी कुछ पानी बचा था
माँ: ये क्या है? क्या कर रही हो तुम? माँ को लगा की पानी उनकी चूत से निकल रहा है पर सिर्फ मैं और आंटी जानते थे की सच मे पानी कहा से निकल रही है Aunty ki chudai Maa Ke Saath:
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माँ: ये तू क्या कर रही है हाहाहा बच्चो के तरह! कविता आंटी होश संभालती हुई बोली: भारती…भारती वह गयी?
माँ: हाँ-हाँ बाबा वह गयी उसे भेजकर दरवाज़ा बंद करके ही आयी हूँ पर यहाँ क्या हो रहा है? और फिर वह हुआ जो मैंने कभी कल्पना नहीं की थी आंटी ने अपनी कमर को झुकाती हुई और पानी को बाहर निकालने लग, फिर माँ ये देख पूछी:
माँ: ये ये क्या है! मैं बस खड़ा ये नज़ारा देखा और फिर शैतानो वाली हसी मार कर बोल: आंटी मज़ा आया? आंटी पलटी और दिवार पर पीठ टिका कर खड़ी ज़ोर की सांस लेती हुई माँ को देख और फिर मुझे देख बोली:
आंटी : पागल है तू एकदम ऐसे कोन करता है
माँ: कोई बताएगा हुआ क्या?
राहुल क्या किया बताओतो, मैंने माँ को देखा और फिर आंटी से पुछा:
मैं: ये बताओ आंटी आपको मज़ा आया या नहीं?
आंटी: क्या मज़ा मेरी नावी मे दर्द हो रहा है ,
मैं: मज़ा आया या नहीं वह बोलो बस आप, मेरे सवाल पर आंटी के होंटो में दबी मुस्कान थी और उस मुस्कान के साथ वह बोली:
आंटी: नहीं बिलकुल नहीं।
मैं: आपकी मुस्कान तो ये नहीं कह रही!
माँ: अब तुम दोनों मेरे सवाल का जवाब दो क्या कर रहे थे?
मैं: हाहाहा वह आंटी मेरी गाये बन रही थी और उनकी अच्छी सफाई हो रही थी
माँ: हाहाहा गाये ! सच मे कविता? आंटी शर्माती हुई अपने मुँह पर हाथ रख कर बोली तो उससे पहेल मैं बोलै: आपके सामने शर्मा रही है मेरे सामने तो घुटनो पे मऊ-मऊ भी कर रही थी।
माँ आंटी के कंधे पर हलके से मार बोली: तेरा बचपना अब तक गया नहीं? हाहाहा!
कविता आंटी: ओफ्फो अब तुम ऐसे सब मत बोलो मैंने कोई मूओ मूओ नहीं लिया ये झूठ बोल रहा है
मैं: झूट! बताऊँ माँ को अभी क्या हुआ आपके साथ,
माँ: नहीं! मैं और आंटी ने माँ को देखा की इतनी देर से वह जानना चाहती थी पर अब नहीं, तभी उन्होने अपनी काली पारदर्शी नाइटी खींच कर ऊपर से निकाली और बाथरूम से बहार रूम के तरफ फेकि, सिर्फ एक काली पैंटी में खड़ी होकर बोली:
माँ: बता कर नहीं अगर कविता को मज़ा आयी तो मुझे भी करके बताओ! मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा जहा आंटी के साथ जबरन करना पड़ा अब वही माँ बिना जाने मुझसे वह सब करने को बोल रही थी फिर मैंने आंटी की तरफ देखा आंटी भी जानती थी की माँ को अंदाजा नहीं यहाँ क्या हुआ, Aunty ki chudai Maa Ke Saath:
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वह बोली: तू समझ नहीं रही छोड़ दे।
माँ: अच्छा तू राहुल की गाये बनकर अकेले मज़ा लेगी मैं क्यों नहीं वैसे…माँ अपने दोनों हाथ से अपने बूब्स को दबाती हुई निप्पल को अपनी उंगलियों में नोखिली करती हुई आगे बोली:
माँ: वैसे भी राहुल को दूध पिलाने वाली उसकी असली गाये तो मैं ही थी हाहाहा! कविता आंटी: पर…
माँ: पर-वर कुछ नहीं तुझे मज़ा आया?आंटी चुप हो गयी तो मैंने पुछा: बोलिये ना मज़ा आया या नहीं आपको!
कविता आंटी: आया पर…
माँ: बस बस देखो भारती अभी नहीं है तो हम आराम से मज़े कर सकते है बाद में टाइम नहीं होगा तो राहुल चलो अब जो भी आंटी के साथ किया मेरे साथ भी करो, सच मे माँ को अंदाजा नहीं था की वह बस कविता आंटी के तरह मज़ा लेना चाहती थी पर नहीं जानती थी की असल में मैंने किया क्या ये बात मेरे लिए दिलचस्ब थी ये जानेने के लिए की क्या माँ को भी पसंद आएगा ये सब?
मैं: तो क्या आप भी मेरी गाये। बनोगी हाहाहा! माँ ने अपनी पेंटी को पकड़ कर धीरे से नीचे खिचा और अपनी टाँगो से निकालती हुई बोली:
माँ: अगर उसमे कविता को इतना मज़ा आया तो बिलकुल बनूँगी मैं भी तो देखु,
कविता आंटी: तू सच मे नहीं जानती ये क्या करेगा, मैंने तुरंत आंटी को टोकते हुए बोला:
माइनल: ओफ्फो आंटी आप चुप रहना। मैं नहीं चाहता था की आंटी माँ को पहले ही बताते वरना क्या पता शायद माँ ना कह देती, तो मैं माँ को धीरे धीरे मज़ा देते हुए उनसे करवाना चाहता था ताकि वह मना न करे चाहे मैं कुछ भी करू।
माँ: हाँ तू क्यों मज़ा लेके मुझे रोकने की कोशिश कर रही हो,
मैं माँ के हाथ को पकड़ कर मेरे और आंटी के बीच लेकर बोल: चलिए अब आप अपने घुटने और हाथ पर बैठो।
माँ: वह क्यों? आंटी हसने लगी और मैं जवाब में बोला : ओफ्फो माँ! आपने कभी किसी गई को 2 पेअर पे चलते देखा आप भी बोलना आंटी।
कविता आंटी: हाहाहा मानले इसकी बात, माँ मुस्कुराती हुई मेरे सामने अपने घुटनो पर बैठी तब मेरा तना लंड उनके मुँह के पास खड़ा सलामी दे रहा था माँ हाथ बढ़ाकर उसे पकड़ने आयी तो मैं उन्हें रोकता हुआ फिर उनका हाथ पकड़ा और बोल:
मैं: हाथ नीचे कर के 4 पैरो पर चलो, माँ अब हम दोनों के बीच घोड़ी बानी बैठी ऊपर देख रही थी और फिर बोली:
माँ: हम्म्म अब?
मैंने आंटी से पुछा: आप भी गाये बनोगी? Aunty ki chudai Maa Ke Saath:
आंटी: न बाबा अब नहीं हाहाहा
मैं: ठीक है तो आप मेरे साथ इस गाये की सफाई में साथ दो,
माँ हस्ती हुई बोली: हाहाहा कैसे बुला रहे हो मुझे गाये गाये करके, मैं माँ की उभरी गांड पर गीले हाथ का एक हल्का थप्पड़ मार कर बोला:
मैं: क्यों सच बोलिये आपको मज़ा आ रहा है या नहीं जब मैं आपको गाये बुलाता हूँ तो?
माँ ने अपनी छाती हिलायी और अपने लटकते बड़े बूब्स को नीचे दांये बाए झूलते हुए बोली:
माँ::हाहाहा! बहुत चलो अब मज़ा दो अपनी गाये को, फिर मैंने शावर जेल उठाया और उनके पीठ से गांड की दरार तक जेल की 3-4 रेखा खींच कर आंटी से बोला: Aunty ki chudai Maa Ke Saath:
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मैं: चलिए आंटी लगते है काम पर, फिर मैं और आंटी माँ के अगल बगल बैठे कर और अब सही में हम दोनों माँ को किसी गाये की तरह साबुन से मलने लगे,
वैसे आज रात क्या होना था वह तो अब तक तय नहीं हुआ था माँ और आंटी अपने कमरे में थी पर ना जाने इन औरतो को क्या होता है फिर करीब 6 बजे के आस-पास दरवाज़े की घंटी बजी मैं समझ गया की ये ज़रूर भारती ही होगी जाकर दरवाज़ा खोला तो वह मुझे ऊपर से नीचे देख अंदर आने लगी,
मानो पूछ रही हो की कैसा रहा, यकीनन वह तो जानती ही होगी की उसके ना होने पर यहाँ घर में क्या हुआ होगा वह अंदर लिविंग में जाकर बैठी और अपने बंधे बाल खोलने लगी, तभी मैं भी उसके सामने वाले सोफे पर जा बैठा,
उसने पूछी: आंटी और माँ किधर है?
मैं: वह दोनों कमरे में है, फिर भारती तिरछी आँखों से मुझे देख मुस्कुराकर बोली:
भर्ती: क्यों हालत ख़राब कर दी क्या उन् दोनों की?
मैं हस्ता हुआ बोला: हाहाहा शायद तुम्हे देखना चाहिए था आज मैंने क्या किया उन्दोनो के साथ!
भारती: मममम देखना मैंने किचन में क्या किये आंटी के साथ उससे ज़्यादा क्या करना? मैं अब उसे कैसे समझाता की माँ और आंटी के गांड के साथ मैंने कोनसा खेल खेला।
मैं बोलै: हाहाहा उससे भी मज़ेदार।
भारती: क्या? इतने में माँ के कमरे का दरवाज़ा खुला मैंने पलट कर देखा तो सिर्फ माँ आ रही थी अपनी उसी पारदर्शी छोटी सी बेशर्मी भरी नाइटी में पर आंटी नहीं दिखी, तो भारती से बोल : माँ से ही पूछ लो क्या किया मैंने, माँ ने तुरंत मेरे कान पकड़ और धीमे आवाज़ में बोली:
माँ: शठ कविता अंदर है सुन्न सकती है भारती माँ को देख हलकी मुस्कान दे रही थी मानो वह मन ही मन माँ से पूछ रही हो की माँ बेटे ने अच्छे से मज़े लिए या नहीं,
मैंने माँ से पुछा: माँ आंटी क्या कर रही है अंदर?
माँ पलट कर अपने कमरे के तरफ देख कर बोली:
माँ: हाहाहा! बड़ी शर्मा रही है बहार आने के लिए, माँ इतने ज़ोर से बोली मानो वह मुझे जवाब में नहीं बल्कि कमरे के अंदर आंटी को सुनाने के लिए बोल रही हो।
भारती: क्यों? क्या हुआ आंटी?
मैं: हाँ वह क्यों शर्मा रही है, इतने में अंदर कमरे से कविता आंटी भी ज़ोर से बोली: तू ज़्यादा बोल मत सरु यहाँ मुझे फसाके तू वाह जाके ज़्यादा न बोल। Aunty ki chudai Maa Ke Saath:
माँ: ओफ्फो कविता अब बहार भी आ, ऐसे क्या शर्माना? कम से कम बिना कपडे की तो नहीं हो न हाहाहा! पता नहीं माँ और आंटी के बीच क्या चल रह था न ही मुझे और न ही भारती को कुछ समझ आ रहा था ,माँ फिर से कमरे के तरफ देख कर बोली:
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माँ: कविता आ न बहार कौन सा यहाँ कोई बहार से मेहमान आये हुए है?
मैं और भारती दोनों जिज्ञासा के साथ माँ के कमरे के तरफ देख रहे थे जब आंटी कमरे से झूठा गुस्सा दिखाती हुई बहार आयी और आंटी माँ की रोबे पहनी हुई थी जो उनके जांघो तक थी, वैसे तो मेरे लिए अब उनमे कुछ नया था नहीं लेकिन फिर भी जांगे दिखाती हुई वह सेक्सी लग रही थी।
भारती: आप रोबे क्यों पहनी हुई हो? कविता आंटी माँ को कोसती हुई बोली:
कविता: अपनी आंटी से पूछ बेवक़ूफ़ कही की, माँ हसने लगी और बोली:
माँ: हाहाहा! वह… हाहाहा! वह मैंने इसके सरे कपडे धोने डाल दिए एक साथ,
कविता आंटी: मुझसे पूछ तो लेती एक बार कम से कम एक मैक्सी तो रख देती हद्द ही है।
मैं: अरे तो क्या हुआ आंटी आप क्यों टेंशन ले रही हो? भारती कुछ नहीं बोल रही थी बस बैठ कर अपनी माँ को जांगे दिखती रही फिर
माँ: हाँ वही तो मैं भी बोली इसको की यहाँ भारती और तुम्हारे अलावा कोई नहीं तो क्या दिक्कत है?
कविता आंटी: दिक्कत की बात मत कर सरु बस बेशर्मी सी लगती है
भारती: ओफ्फो माँ जहा भी जाओगी आप कुछ न कुछ बहस करोगी ही कपडे धुलने के बाद पहन लेना उसमे क्या है?
आंटी: उफ़ पता नहीं ये लड़का शादी के बाद अपनी बीवी का क्या करेगा।
माँ और आंटी हसने लगी तो मैं बोलै:
मैं: आप दोनों हो तो मुझे शादी करनी ही नहीं कभी।
माँ: चलो-चलो मैं चाय बना देती हूँ सबके लिए।
कविता आंटी: हाँ मैं भी आती हूँ इस लड़के से बहुत खतरा है अब मुझे।
मैं: मैं भी आता हूँ न तभी माँ हाथ दिखा कर मुझे रुकने का इशारा कर बोली: Aunty ki chudai Maa Ke Saath:
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माँ: ओफ्फो राहुल यही रहो हमेशा मत चिपके रहो न अब सारी मस्ती रात को, ये कहती हुई वह दोनों किचन को चले गए.. मैं कुछ देर लिविंग में बैठा आंटी के मदमस्त सेक्सी नज़ारे को देख रात के सपने सजाने लगा कुछ ही देर में भारती के कमरे का दरवाज़ा खुला, वहा से जब भारती निकली तो मेरे लंड ने झटका दे दिया मैं समझ गया की अब माँ के साथ बेटी भी अपनी शर्म किसी डब्बे में बंद कर समुन्दर में फेक आयी है
भारती अपने कमरे से सिर्फ एक फुल स्लीवे काले रंग की शर्ट पहन कर आ रही थी शर्ट लम्बी तो थी पर उसकी जांगे आधे से भी ज़्यादा दिख रही थी मुझे देख वह जान गयी की मैं उसे कैसे निहार रहा हूँ वह मुस्कान देती हुई मेरे पास चलकर आने लगी उसे देख इंग्लिश फिल्मो की लड़किया याद आ रही थी जो सेक्स के बाद शर्ट पहन कर सुबह उठती है वह मेरे सामने के सोफे पर आकर बैठ कर भवरो से ऐसा इशारा किया की क्या हुआ,
मैं उसकी चिकनी जांघो के प्रदर्शन को देख धीमी आवाज़ में बोलै: सेक्सी लग रही हो यार।
भारती भी धीमी आवाज़ में बोली: शठ! चुप
मैं आगे कुछ न बोला क्यों की पास ही किचन में माँ और आंटी थे माँ से तो कोई दिक्कत नहीं लेकिन आंटी अगर हमारी बात सुन ली तो काफी दिक्कत होती कुछ देर बाद माँ और आंटी किचन से चाय लेकर आने लगी, जैसे ही आंटी ने भारती को देखा तो वह भड़क उठी,
कविता आंटी: भारती! क्या पहनके बैठी है तू? माँ भारती को देखि और मैं आंटी को भारती अपनी शर्ट के निचले सिरे को नीचे खींच बोली:
भारती : क्या हुआ शर्ट ही तो है?
कविता आंटी: हाँ तो नीचे क्या पैंट या पायजामा पहनना भूल गयी? माँ चाय टेबल पर रख भारती के बगल बैठ गयी और भारती सोफे से कुशिओं लेकर अपनी गॉड में रख बोली:
भारती ::तो क्या हुआ शर्ट पहनी हूँ न नंगी तो नहीं बैठी हूँ Aunty ki chudai Maa Ke Saath:
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माँ: कविता तू बैठ उधर पहले ऐसे चिल्ला के मत बात करो न बच्ची सेआंटी मेरे बगल सोफे पर जा बैठी और माँ से बोली:
आंटी: सारिका तू अब इसका साथ मत ले सुबह स्विम सूट पहनी वह मानी में पर ये भी कोई तरीका है?
भारती: आप खुद क्या पहनी हो वह देखना मुझे क्यों कह रही हो?
कविता आंटी: देखा सरु इसी लिए मैं ये नहीं पहनना चाहती थी अब ये अपनी बेशर्मी का इलज़ाम मुझ पर लगाएगी।
माँ ने मुझे देखा और फिर कविता आंटी से बोली:
माँ: ओफ्फो कविता भारती घर पे ही तो है यहाँ कोई और थोड़ी आया है या आएगा, कविता आंटी एन मुझे देखि और फिर माँ से बोली:
आंटी: तो क्या हुआ राहुल है यहाँ? क्या इसे बिलकुल शर्म नहीं?
माँ: कविता बस कर अब तू और वैसे भी राहुल इसका भाई है बहिन को भाई से क्या शर्म और वैसे भी ये बिना कपड़ो के तो नहीं बैठी है ना टंगे ही तो दिख रही है
कविता आंटी: हाँ तो टाँगे ऐसे कोई…भारती आंटी को टोकती हुई बोली:
भारती ::आप खुद अपनी टंगे दिखा कर बैठी है तो कोई दिक्कत नहीं राहुल है तो भी कोई दिक्कत नहीं मैं कुछ पह्नु या न पह्नु तो आप पर पहाड़ टूट पड़ा है
माँ: कविता तू चाय पी आंटी गुस्से के साथ चाय के कप को लेती हुई बोली: तेरी बेटी टीना ऐसे करे तो यही कहना तू, माँ आंटी के गुस्से पर हस्स पड़ी और बोली:
माँ: हाहाहा तभी न भारती भी मेरी बेटी जैसी ही है ये अगर गलत करेगी तो मैं खुद डाँटूगी पर अभी मुझे कुछ गलत नहीं दिख रहा ।
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कविता आंटी: हाँ तो रख ले इसे अपने ही पास नालायक लड़की, माँ भारती के हाथ में चाय देती हुई आंटी से बोली:
माँ: हाँ हाँ क्यों नहीं रख लूँगी इसे माँ फिर मुझे देख मज़ाक बनाती हुई आंटी से बोली: और तू इस नालायक को रख ले।
कविता आंटी: देख सरु तू मज़ाक न बना शायद माँ चाहती थी की आंटी का गुस्सा कैसे भी ख़त्म कर दे इसी लिए वह मज़ाक बना रही थी और आगे बोली:
माँ: मज़ाक कहा कर रही हूँ आज से ये गधा तुम्हारा जा रख ले इस बात पर भारती हस्स पड़ी माँ मज़ाक बना रही थी पर खामखा मुझे ही नालायक गधा सब कह रही थी मैं चुप-चाप सोचता रहा की बोलू तो क्या बोलू?
कविता आंटी चिढ़ती हुई बोली: Aunty ki chudai Maa Ke Saath:
आंटी: हाँ-हाँ रख लुंगी अगर तू सच मे देदे तो राहुल को रख ही लुंगी इस कम्बख्त के बदले
माँ: हाहाहा! ठीक है तो रख लो जब अपने घर जाओगी तो ले जाना इसेआंटी मुझे देख मुस्कुरा गयी और फिर वापस गम्बभीर होकर बोली:
आंटी: बेटा राहुल तू न अपने कमरे में ही सो इस नालायक लड़की के लिए तू क्यों सोफे पर सोता है चाहिए तो वह सोयेगी यहाँ या फिर जाए घर वापस।
माँ: अरे अरे कविता क्या बोल रही हो भारती लड़की है वह कैसे सोफे पर सोयेगी,
कविता आंटी: क्यों इसकी कमर अकड़ जाएगी क्या? राहुल अब से अपने कमरे में ही रहेगा उसे सोफे पर सोने की ज़रूरत नहीं
माँ: ठीक है तो ऐसा हुआ तो कविता तू ही सोफे पर सो आज भारती मेरे साथ मेरे कमरे में रहेगी, मैं एक टक माँ को तो कभी आंटी को देखता रहा की इनकी बाते कहा जा रही है
तभी भारती बोली: हाँ आंटी मैं तो आज आपके कमरे में रहूंगी माँ ही रहे सोफे पर उनको राहुल की बड़ी चिंता है न, माँ भारती के कंधे पर हाट रख बोली:
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माँ: हाँ बीटा तुम अब से मेरे कमरे में रहो अपने सामान तुम मेरे कमरे में ले आओ राहुल के कमरे से, मैं सोचता रहा की ये क्या हो गया अगर माँ भारती के साथ रही तो कही ऐसा तो नहीं की माँ मुझे और भारती को एक साथ मज़े लेने का मौका बना के दे रही है? ये सोच मैं चुप रहा पर तभी आंटी बोली:
आंटी: हाँ तो जा मैं राहुल के साथ उसके कमरे में रह लुंगी बड़ी आयी, भारती ने चाय पीकर ख़त्म की और फिर अपने कमरे को जाती हुई बोली:
भारती : तो फिर मैं अपना सामान राहुल के कमरे से आंटी के कमरे में रख देती हूँ ये कह कर वह तिरछी नज़र से मुझे देख कर जाने लगी मैं आंटी के सामने भारती को घूरना नहीं चाहता था इसी लिए पलट कर देखने नहीं गया यहाँ माँ और आंटी आपस में किट-पिट बाते करने लग गयी, कुछ 5 मिनट बाद भारती मेरे कमरे से अपनी किताब और बैग लेकर निकली मैंने मूड कर देखा तो वहा से वह भी मुझे देखती हुई माँ के कमरे में चली गयी. Aunty ki chudai Maa Ke Saath:
मैं यही सोचता रहा की आज रात अब क्या होगा आंटी के साथ होने पर माँ से पूछ भी नहीं सकता था की उनके मन में क्या है फिर कुछ देर बाद माँ और आंटी किचन चले गए और सब अपने अपने काम में लग गए।
तो दोस्तो आज इस कहानी मे बस इतना ही आगे क्या हुआ ये मैं आपको कल बतौगा,
तो बे कॉन्टिनोएड अपने राइ विमर्श और कहानी जल्दी मिलने के लिए मुझे comment करे
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हॉट पारिवारिक जीवन
Is story ka ek or part likho
Or usme fouset wala seen ko fully detailed likho