दोस्त की माँ की जबरदस्त चुदाई की

By | September 22, 2026

Dost ki maa ki chudai ki sex story:- मैं जॉय फिर आ गया हूँ अपनी एक रियल सेक्सी स्टोरी लेकर। इसमें बताऊँगा कि मैंने अपनी दोस्त की माँ को कैसे चोदा। बात 2 साल पहले की है। आकाश मेरा अच्छा फ्रेंड था। मैं उसके घर अक्सर जाता रहता था पढ़ाई करने के लिए। आकाश की मम्मी बहुत ज्यादा हॉट थीं। मेरी नजर उन पर बहुत दिनों से थी। उनको देखकर बस तसल्ली कर लेता था। इसके आगे कुछ करने की हिम्मत नहीं हुई क्योंकि वो मेरे दोस्त की मम्मी थीं।

Dost ki maa ki chudai ki sex story

उनका फिगर 34-30-38 था। दूध बहुत बड़े और गाँड बाहर निकले हुए थे। साड़ी में वो बहुत कयामत लगती थीं।

आकाश के पापा ठेकेदार थे तो वो ज्यादातर बिजी रहते थे और घर लेट आते थे। रोज़ ड्रिंक करके। उनके ड्रिंक की वजह से घर में अक्सर लड़ाई होती रहती थी। आकाश के घरवाले मुझ पर बहुत भरोसा करते थे। कभी आकाश के न होने पर उनका घर का काम मैं ही कर देता था जैसे कोई सामान लाना आदि।

आकाश के पापा को भोपाल से बाहर इटारसी में बिल्डिंग बनाने का कॉन्ट्रैक्ट मिल गया। वो इटारसी चले गए। वीक में एक बार आ जाते थे फिर चले जाते।

एक दिन आकाश का बर्थडे था। घर में तैयारी चल रही थी शाम की पार्टी की। मैं आकाश के घर पर आकाश और उसकी मम्मी की हेल्प करने चला गया। आकाश के पापा काम की वजह से नहीं आ पा रहे थे। आकाश को बुरा लग रहा था कि उसके पापा यहाँ नहीं हैं।

फिर मैंने आकाश की मम्मी से बात की। वो बोलीं—

नीलिमा: अब क्या करें? कैसे समझाएँ आकाश को?

फिर आकाश की मम्मी और मैंने आकाश को बहलाने की कोशिश की। उसका दिमाग पार्टी की तैयारी में लगा दिया। वो माइंड चेंज होने लगा और वो भी पार्टी की तैयारी में लग गया।

शाम के 8 बज गए थे और हमारी पार्टी की तैयारी हो गई थी। बस दोस्तों का इंतजार था आने का। मैं, आकाश और उसकी मम्मी रेडी होने चले गए।

मैं रेडी होकर आकाश के पास गया। वो भी रेडी हो गया था। मैंने आकाश से पूछा—

मै: अपनी पार्टी का इंतजाम करा?

मेरा मतलब बीयर से था।

आकाश: 6 बीयर लेकर रख ली है।

मैं खुश हो गया।

फिर आकाश की मम्मी रेडी होकर रूम से बाहर आईं। मैं तो देखता ही रह गया। पिंक साड़ी पहनी हुई थीं। पीछे से डोरी वाला ब्लाउज। उनके बूब्स ऊपर से थोड़े दिख रहे थे। उनके बूब्स की नाली में देख पा रहा था। लिप्स पर भी पिंक कलर की लिपस्टिक लगी थी। काफी सेक्सी लग रही थीं।

आकाश की मम्मी को देखकर मेरा तो लंड ही खड़ा हो गया। उन्हें देखता ही रह गया।

फिर आकाश ने मुझे हिलाया—

आकाश: कहाँ हो गया जॉय?

मै: कहीं नहीं।

और आंटी से बोला—

मै: आप तो आज 18 साल की लग रही हो।

तो वो हँसने लगीं। आकाश और उसकी मम्मी से मेरा मजाक बहुत चलता था। फिर वो किचन में चली गईं।

इतने में डोरबेल बजी। मैंने दरवाजा खोला। देखा तो सारे फ्रेंड्स आ गए थे। वो सब अंदर आए।

आकाश: जॉय काफी लेट हो गए। जल्दी से केक ले आ।

मै: अभी लाता हूँ।

और आकाश दोस्तों से बात करने लगा।

मैं किचन में गया तो देखा कि आकाश की मम्मी कुछ काम कर रही थीं। उनकी पीठ थी। पूरी बैक दिख रही थी। फिर एक डोरी बंधी हुई थी जो उनके बूब्स को संभाले हुए थी और गाँड बाहर की तरफ निकले हुए थे। मेरा लंड फिर खड़ा हो गया था। मन कर रहा था कि उनको पीछे से जाकर पकड़ लूँ और अपना लंड उनके गाँड के बीच में टच कर दूँ।

मैंने अपने लंड को साइड में किया और सोचा कि मैं बस इमेजिन कर सकता हूँ पर कुछ कर नहीं सकता। खुद को संभाला और आगे बढ़ा—

मै: आंटी फ्रेंड्स आ गए।

एकदम मेरे बोलने से आंटी शायद डर गईं और पीछे मुड़ीं तो उनके बूब्स मेरे चेस्ट से टकरा गए। इतना अच्छा फील हुआ कि कुछ तो हुआ।

नीलिमा: डरा दिया एकदम से बोलके।

मैं हँसने लगा।

नीलिमा: बदमाश कहीं का।

मै: आंटी केक कहाँ है?

नीलिमा: फ्रीज से निकाल लो।

मैं केक निकालकर आंटी को दिया। उन्होंने प्लेट में केक निकालकर दिया।

मै: आ जाओ केक काटते हैं।

वो मेरे साथ आ गईं। फिर हम सबने मिलकर केक काटा। सेलिब्रेट किया। आकाश ने केक पहले अपनी मम्मी को खिलाया फिर मुझे। मैंने भी आकाश को खिलाया और आकाश की मम्मी को। मेरी कोहनी आकाश की मम्मी के बूब्स से टच हो रही थी। मुझे मजा आ रहा था।

फिर आकाश की मम्मी ने मुझे केक खिलाया। मैंने आकाश की मम्मी का हाथ पकड़के केक अपने मुँह में ले लिया और उनकी उँगली भी अपने मुँह में दबा ली और चूसने लगा। फिर जल्दी से उन्होंने हाथ निकाल लिया और बदमाश कहकर हँसने लगीं।

आंटी केक लेकर किचन में चली गईं।

मै: आकाश तू फ्रेंड्स के साथ बैठ। केक और नाश्ता मैं लेकर आता हूँ।

फिर वो बैठ गया और मैं किचन में चला गया। बार-बार मुझे आकाश की मम्मी के साथ मिलने का मौका मिल रहा था। उसे मैं गवाना नहीं चाहता था।

फिर मैं किचन में गया और आकाश की मम्मी की हेल्प करने लगा। बार-बार मेरा हाथ आकाश की मम्मी को टच कर रहा था। मुझे बहुत मजा आ रहा था और मेरा लंड जैसे मानो बाहर निकलने के लिए फड़फड़ा रहा था।

फिर मैं नाश्ता लेकर फ्रेंड्स के पास गया और सबको दिया।

आकाश: तू भी कर ले।

मै: मैं आंटी के साथ कर लूँगा। तू फ्रेंड्स को देख।

फिर मैं किचन में गया।

नीलिमा: सबको हो गया?

मै: हाँ हो गया। बस आप और मैं रह गए हैं।

नीलिमा: ये प्लेट ले लो और जाओ।

मै: नहीं। आपके साथ भी तो कोई होना चाहिए।

फिर हम दोनों किचन में ही खाने लगे। फिर आकाश की मम्मी के गालों पर मैंने केक की क्रीम लगा दी।

नीलिमा: अरे!

मै: आंटी आज बर्थडे है। सेलिब्रेट।

वो हटाने लगीं।

मै: लाओ मैं हटा देता हूँ।

मैंने उनके गाल को टच किया। क्या गाल थे। एकदम सॉफ्ट। मेरा लंड बेकाबू हो रहा था।

इतने में आकाश ने मुझे और आंटी को आवाज दी। हम दोनों आकाश और फ्रेंड्स के पास जाकर बैठ गए। फिर आकाश ने इशारा किया बीयर पीने का। मैंने उसे आँख मार दी।

मै: आंटी आप फ्रेंड्स के साथ बैठिए। हम छत पर जा रहे हैं।

नीलिमा: ठीक है।

आकाश चुपचाप से बीयर लेकर छत पर आ गया। मैं भी आ गया। दोनों ने पहले एक-एक बीयर पी। आकाश को जल्दी चढ़ जाती थी इसलिए वो एक पीने के बाद मना करने लगा। मैंने फोर्स किया तो वो दूसरी पीने लगा। मैं भी दो बीयर पी चुका था।

फिर आंटी की आवाज आई और हम नीचे जाने लगे। अभी दो बीयर बाकी थीं। नीचे गए तो फ्रेंड्स जाने को रेडी थे।

नीलिमा: क्या कर रहे थे?

मै: कुछ नहीं। बस ऐसे ही। कॉल आ गया था।

शायद उन्हें शक हो गया था। एक फ्रेंड की बाइक पंक्चर हो गई थी तो आकाश बोला—

आकाश: मैं छोड़ आता हूँ।

अभी बीयर पीने के कारण आकाश को नहीं चढ़ी थी।

मै: ठीक है। मैं यहीं रुकता हूँ। तू छोड़ आ फ्रेंड को।

और मैंने उसे एक बीयर और दे दी कि रास्ते में पी लेना। फ्रेंड के घर पहुँचकर उसने बीयर रख ली। मौसम भी खराब हो रहा था तो मैंने उसे जल्दी आने को कहा।

फिर वो चला गया। मैं अंदर आया तो आकाश की मम्मी सब सामान किचन में रख रही थीं। मैं भी उनकी हेल्प करने लगा।

नीलिमा: गया आकाश फ्रेंड को छोड़ने?

मै: हाँ आंटी गया।

नीलिमा: देखो मौसम भी खराब हो रहा है। दे आँधी चल रही है और थोड़ी-थोड़ी बारिश शुरू हो गई है।

नीलिमा: जॉय आकाश को कॉल करके बोल दो कि मौसम ज्यादा खराब हो जाए तो वो फ्रेंड के यहाँ थोड़ी देर रुक जाए और तुम ऊपर जाके दरवाजे देख लो सब बंद हैं ना। बारिश तेज होने वाली है।

मै: ठीक है। मैं ऊपर जाके देख लेता हूँ और आकाश को कॉल भी कर देता हूँ।

फिर मैं ऊपर गया। वहाँ मेरी एक बीयर और रखी हुई थी। मैं ऊपर गया और पहले आकाश को कॉल किया। पूछा कि कहाँ पर है।

आकाश: फ्रेंड के घर पर ही। पर बारिश तेज है। कम होने पर निकलता हूँ।

मै: बीयर पी ली?

आकाश: नहीं पी रहा हूँ।

आकाश को हवा लगने की वजह से कुछ ज्यादा ही चढ़ गई थी।

मै: अगर बारिश तेज हुई और तुझसे गाड़ी न चले तो वहीं रुक जाना। मैं यहाँ देख लूँगा।

आकाश: ठीक है। शायद ज्यादा चढ़ गई। मैं यहीं रुक जाता हूँ। तू मम्मी को संभाल लेना। गुस्सा न करें।

मै: डोंट वरी। मैं हूँ ना।

और कॉल कट दिया।

फिर जल्दी से मैंने बीयर खोली और पीने लगा। बारिश तेज हो रही थी जैसे मानो तूफान सा आ गया हो। मैं भीगता हुआ बीयर पी रहा था। आकाश की मम्मी की नीचे से आवाज आई। मैंने जल्दी से बीयर फिनिश करके नीचे गया तो पूरा भीगा हुआ था।

नीलिमा: अरे जॉय तुम तो भीग गए। मैं तौलिया लाती हूँ।

और बोलीं—

नीलिमा: आकाश को कॉल कर दिया था?

मै: जी आंटी। मैंने उसे बारिश की वजह से वहीं रुकने को बोल दिया।

नीलिमा: ठीक किया।

और आंटी ने मुझे तौलिया दे दी। मैंने तौलिया से अपना सर साफ करने लगा।

नीलिमा: कपड़े उतार लो वरना ठंड लग जाएगी। मैं आकाश का लोअर दे देती हूँ।

फिर मैंने अपनी शर्ट उतारी। मुझे ऐसा लगा कि तिरछी नजर से आकाश की मम्मी देख रही हैं। शायद मेरा वहम था।

फिर आंटी ने मुझे लोअर लाकर दिया। मैं बाथरूम में जाके शावर लिया और लोअर पहनके आ गया। फिर अचानक तेज बिजली चमकी। बहुत तेज आवाज हुई और लाइट चली गई। आंटी डर गईं। एकदम बोलीं—

नीलिमा: आकाश!

मै: आंटी डरो मत। मैं हूँ जॉय।

कुछ दिख नहीं रहा था।

नीलिमा: कहाँ हो तुम?

मै: आप वहीं रुको। मैं आपके पास आता हूँ।

और धीरे-धीरे मैं उनके पास जैसे ही आया उनका हाथ मेरे हाथ से टच हुआ और उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया। फिर एक और बिजली चमकी और आंटी मुझसे लिपट गईं।

मैंने सिर्फ लोअर पहना हुआ था। ऊपर कुछ नहीं। जैसे ही वो मुझसे लिपट गईं उनके बड़े बूब्स मेरे चेस्ट से टकरा गए। मेरा लंड खड़ा हो गया था। लोअर उसे साइड में भी नहीं कर सकता था।

नीलिमा: जॉय मुझे बिजली से बहुत डर लगता है और आकाश को भी अभी जाना था। मुझे बहुत डर लग रहा है।

मैंने भी आंटी को कसके पकड़ लिया।

मै: आंटी मत डरो। मैं तो हूँ और वैसे भी आकाश फ्रेंड के यहाँ रुका हुआ है। डरने की कोई बात नहीं है।

पीने के बाद मुझे चढ़ गई थी और मेरा कॉन्फिडेंस लेवल बढ़ गया था। फिर आंटी मुझसे लिपट रही थीं। मैंने भी आंटी को जोर से पकड़ा हुआ था और मेरे दोनों हाथ आंटी की नंगी पीठ पर थे। गोरा बदन। पसीने की बूंद उनकी पीठ पर महसूस कर रहा था।

हम दोनों खामोश एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। बाहर तेज बारिश हो रही थी। क्या सही टाइमिंग थी बारिश और बिजली की। ऊपर वाला शायद मुझ पर मेहरबान था।

फिर आंटी बोलीं—

नीलिमा: तुम्हारे मुँह से स्मेल आ रही है।

मै: आंटी आज बर्थडे की खुशी में थोड़ी बीयर पी ली।

नीलिमा: क्या आकाश ने भी पी है?

मै: हाँ आंटी थोड़ी सी।

नीलिमा: बड़े हो गए।

मैं महसूस कर रहा था कि आंटी के लिप्स मेरे शोल्डर से टच हो रहे हैं और मेरा लंड जैसे मानो लोअर से बाहर आने को तड़प रहा था।

मैं महसूस कर रहा था कि मेरा लंड आंटी की चूत से टच हो रहा है। मुझसे कंट्रोल होना मुश्किल हो रहा था कि अचानक आंटी ने अपने लिप्स मेरे शोल्डर पर दबाए। मैंने उन्हें और जोर से पकड़ लिया और मेरे लिप्स भी आंटी के नेक से टच हो रहे थे। मैंने भी अपने लिप्स उनके नेक पर रख दिए। वो थोड़ा हिल गईं और गर्मी से मैं और आंटी पसीना-पसीना हो रहे थे।

फिर आंटी ने स्लो आवाज में बोला—

नीलिमा: जॉय मैं तुम्हें कैसी लगती हूँ?

मै: आंटी आप बहुत सुंदर हो।

और कहकर उनके नेक को चूसने लगा। आंटी भी मेरा साथ देने लगीं। वो भी मेरे चेस्ट को किस कर रही थीं। फिर आंटी ने अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ लिया।

नीलिमा: जॉय मुझे प्यार करोगे?

मै: जी आंटी। मैं आपको बहुत प्यार करना चाहता हूँ।

फिर अचानक लाइट आ गई। आंटी मुझसे दूर हो गईं और आंटी की साड़ी का पल्लू मेरे हाथ में आ गया। उनके बूब्स को देखकर पागल हो गया। कितने बड़े और आधे बाहर थे। मैंने आंटी की धीरे-धीरे साड़ी खोलना शुरू कर दिया। आंटी की साँसें बहुत तेज चल रही थीं। मैंने उनकी पूरी साड़ी खोल दी। अब सिर्फ वो पेटीकोट और ब्लाउज में थीं।

मैं उनके पास गया। वो तड़पकर मेरे गले लग गईं। उनके बूब्स इतने टाइट हो गए थे कि मेरे चेस्ट पर थोड़े गड़ रहे थे।

नीलिमा: प्लीज जॉय मेरी तड़प मिटा दो। मेरी प्यास बुझा दो।

मै: जी आंटी क्यों नहीं।

नीलिमा: आंटी मत बोलो। मेरे नाम से बुलाओ। नीलिमा।

मै: हाँ नीलिमा।

और पागलों की तरह उनको किस करने लगा। उनके पसीने की एक बूंद चाट रहा था। कभी बूब्स के अंदर अपनी जीभ डाल रहा था तो कभी उनके होठों को किस कर रहा था। उनकी जीभ और मेरी जीभ अंदर ही अंदर जैसे खेल रहे हों।

फिर मैंने उनके ब्लाउज की डोरी खोल दी और एक साइड से ब्लाउज को शोल्डर से हटाके चूमने लगा। आंटी भी मुझसे जोर-जोर से किस करने लगीं। फिर आंटी मुझे पकड़के बेडरूम में ले गईं और दरवाजा बंद कर दिया।

फिर मैंने उनका ब्लाउज खोला। फिर उनकी ब्रा जैसे ही खोली उनके बड़े दूध जैसे मानो किसी जेल से आजाद हो गए हों। मैं उनके दूध को चूसने लगा।

फिर मैंने उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। अब वो पूरी नंगी थीं। फिर मैंने उन्हें बेड पर धक्का देकर लिटा दिया। मैंने देखा उनके बॉडी पर एक भी बाल नहीं थे। पूरी बॉडी वैक्स की हुई थी। पूरा बदन गोरा था और उनका चेहरा लाल हो गया था।

मैं जोश में आ गया। मैं उनके ऊपर लेट गया। जब मेरी बॉडी उनकी बॉडी से टच हुई मेरा लंड जैसे फटा जा रहा था। फिर मैं उनके बूब्स को किस करने लगा। वो मेरे सर को पकड़के एंजॉय कर रही थीं।

उनकी स्लो आवाज—

नीलिमा: ओह जॉय… चूसो मेरे बूब्स को… आआआह्ह्ह… जॉय मैं बहुत प्यासी हूँ…

फिर मैं पागलों की तरह उनके कभी बूब्स, कभी लिप्स, कभी शोल्डर, कभी नेक पर किस करने लगा और पूछा—

मै: नीलिमा तुम कब से नहीं चुदी?

नीलिमा: 3 महीनों से। उन्होंने हाथ भी नहीं लगाया। उन्हें फुर्सत ही कहाँ। प्लीज मेरी प्यास बुझाओ जॉय।

मै: हाँ मेरी जान। आज मैं तुम्हारी पूरी तड़प मिटा दूँगा।

फिर मैं उनको ऊपर से किस करता हुआ उनके चूत के पास आ गया और उस पर किस किया। नीलिमा उछल गईं।

मै: क्या हुआ नीलिमा?

नीलिमा: आज तक वहाँ किसी ने किस नहीं किया।

फिर मैंने उनके दोनों लेग्स ओपन किए और चूत पर अपनी जीभ फेरने लगा। इतनी अच्छी स्मेल आ रही थी जैसे मानो आंटी ने पूरा परफ्यूम चूत पर डाल दिया हो। मैं उनकी चूत चाटने लगा।

आंटी धीरे-धीरे आवाज निकालने लगीं—

नीलिमा: ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… जॉय… और चाटो मेरी चूत को… उफ्फ्फ्फ्फ्फ… आआआह्ह्ह…

आंटी बहुत तड़प रही थीं। आंटी को बहुत ज्यादा मजा आ रहा था। फिर मैंने उनकी चूत ओपन करके उसमें अपनी जीभ डाल दी और चाटने लगा और कभी अपनी जीभ से उनके चूत की खाल को अपने दाँतों से दबा देता। आंटी चीख देतीं—

नीलिमा: ओह जॉय…

फिर आंटी झड़ गई थीं। उनकी चूत का निकला हुआ सारा पानी मैं पी गया था। फिर आंटी ने मुझे ऊपर लिया और मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ लिया और हिलाने लगीं।

नीलिमा: जॉय तुम्हारा लंड तो आकाश के पापा से भी बड़ा है।

मै: तो लो ना मेरी जान इसे।

फिर आंटी अपना मुँह मेरे लंड के पास लाईं और उस पर किस किया। फिर लंड के ऊपर अपनी जीभ फेरने लगीं। फिर आंटी ने मेरा लंड चूसना चालू कर दिया। मेरा पूरा लंड आंटी के मुँह के अंदर नहीं जा पा रहा था। बहुत देर तक आंटी चूसती रहीं।

फिर मैंने आंटी को डॉगी स्टाइल में किया और पीछे से उनकी चूत में झटके से डाल दिया। आंटी की चीख निकल गई—

नीलिमा: आआआह्ह्ह… जॉय… धीरे…

नीलिमा के बाल पकड़के जोर-जोर से झटके मारने लगा।

नीलिमा: ओह जॉय… बहुत बड़ा लंड है तुम्हारा… मैं कभी इतना बड़ा लंड नहीं लिया… चोदो मुझे…

15 मिनट तक ऐसे चोदता रहा। फिर आंटी को सीधा लिटा दिया और उनके लेग्स को अपने शोल्डर पर रखकर अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया। उफ्फ्फ्फ्फ… आंटी की चूत चाटने की वजह से गीली हो गई थी और चपचप आवाज आ रही थी। आंटी के बूब्स उछल रहे थे और उनके थीस पर भी किस करता जा रहा था।

फिर 20 मिनट के बाद आंटी के लेग्स को खोलके उनके ऊपर जाके लेट गया और उनके लिप्स पर किस करने लगा। फिर आंटी के लेग्स फैलाकर फिर अपना लंड झटके से डाल दिया।

नीलिमा: जॉय चोदो मुझे… जोर-जोर से चोदो…

चोद रहा था और मैंने आंटी के काफी जगह किस करके लव बाइट के निशान भी बना दिए थे। दोनों हाथों से उनके बूब्स को कभी दबाता कभी चूसता। आंटी दो बार झड़ गई थीं। मैं भी अब झड़ने वाला था।

मैंने आंटी को बोला—

मै: नीलिमा मैं झड़ने वाला हूँ।

नीलिमा: जॉय मेरे मुँह में अपना माल डाल दो।

फिर मैंने अपना लंड नीलिमा की चूत से निकालकर उसके मुँह पास ले गया। नीलिमा से मेरा लंड चूसने लगीं। फिर मैं झड़ रहा था और नीलिमा मेरा माल पी रही थीं। अब मैं पूरा झड़ गया था और नीलिमा के बगल में जाके लेट गया।

नीलिमा मुझसे चिपकके लेट गईं और बोलीं—

नीलिमा: आज तक मुझे इतना सुकून नहीं मिला जो तुमने मुझे दिया जॉय। और आकाश को कभी इस बात की खबर और शक नहीं होना चाहिए।

मै: बिल्कुल नीलिमा। कभी नहीं होगा। जब तुम मुझे बुलाओगी तभी आऊँगा। प्रॉमिस।

उस रात हमने 2 बार चुदाई की और ऐसे ही चलता रहा। किसी को शक भी नहीं हुआ और आकाश के सामने मैं वैसा ही नेचर रखता था जैसे पहले था। फिर जब भी मौका मिलता नीलिमा को वो मुझे बुला लेतीं और मैं उसकी और अपनी प्यास मिटाने चला जाता।

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