Maa ki chudai gair mardo se:- माँ बहुत सुंदर हैं और उतनी ही भोली भी हैं। पता नहीं ऐसा क्यों है क्योंकि आम तौर पर सुंदर लड़कियाँ अपनी ग्रोइंग लाइफ में लड़कों और मर्दों का छेड़ना और कमेंटबाजी इतना एक्सपीरियंस करती हैं कि उनको इनकी पहचान अच्छे से हो जाती है। शायद मम्मी को पहचान नहीं क्योंकि वो एक अच्छी फैमिली और अच्छी सोसाइटी में ग्रो अप हुईं। गर्ल्स कॉलेज और कॉलेज गईं। कॉलेज आने-जाने हमेशा घर से कोई न कोई जाता था। और वो भी अपने घर वालों की बातें मानती थीं।
सो कभी आवारा लड़कों से इंटरैक्शन नहीं हुआ ना किसी से रिलेशनशिप। शायद इसीलिए शादी के बाद जब मम्मी का फ्लर्टेशस लड़कों और थरकी मर्दों से पाला पड़ता तो वो उनके ट्रिक्स को समझ नहीं पातीं। मम्मी के इस भोलेपन का सब्जी वाले, दूधवाला, भिखारी, ऑटो ड्राइवर, नौकर, ऐसे लोग खूब फायदा उठाते। मम्मी बहुत काइंड, कोमल हृदय और फ्रैंक/सच बोलने वाली भी थीं। उनका दिल लोगों को, खासकर गरीब लोगों को, दुख में देखकर एकदम पिघल जाता था और वो कोशिश करती थीं उनका दुख दूर करने की।
Maa ki chudai gair mardo se
मम्मी की उम्र 38 थी। फिगर 36, 28, 38। मम्मी ज्यादातर साड़ी पहनती थीं विद लो कट ब्लाउज और साड़ी भी नाभि के नीचे बाँधती थीं।
एक दिन मम्मी सब्जी लेने मार्केट गईं। वो आमतौर पर एक ही सब्जीवाले से सब्जी लेती थीं। उसके पास हर तरह की सब्जी और फल रहता था। उन्हें देखकर सब्जीवाला खुश हो जाता है, पर दिखाता नहीं और बोलता है,
सब्जीवाला: आइए मेमसाब आइए। आज बड़े दिनों बाद आपने इस प्यारे से चेहरे के दर्शन करवाए। क्या हमसे कोई गलती हो गई या हमने सब्जी खराब दे दी जो आप अपने इस सब्जीवाले से नाराज हो गईं?
मम्मी: अरे नहीं, मैं अपने इस सब्जीवाले से कैसे नाराज हो सकती हूँ। आपकी सब्जी ही तो मैं दिन-रात खाती हूँ। और जिसका खाती हूँ उससे नाराज कैसे हो सकती हूँ।
सब्जीवाला: नहीं मैडम मुझे विश्वास नहीं, वरना आप इतने दिनों बाद नहीं आतीं। आपने जरूर अपने इस सब्जीवाले को छोड़कर किसी दूसरे सब्जीवाले को अपना लिया है। किसी दूसरे की सब्जी अब आप अपने मुँह में डालती हो।
मम्मी को बुरा लग रहा था कि सब्जीवाला उनको गलत समझ रहा है। वो अपनी बेगुनाही साबित करना चाहती हैं।
मम्मी: अरे नहीं मैंने किसी दूसरे सब्जीवाले को नहीं अपनाया है। केवल आप ही मेरे सब्जीवाले हो। केवल आपकी ही सब्जी मैं मुँह में डालती हूँ। किसी दूसरे की सब्जी तो मैं देखती भी नहीं।
सब्जीवाला: ठीक है मैडम आप कहती हो तो मैं मान लेता हूँ। पर आप मुझे प्रॉमिस कीजिए कि आज से आप केवल मेरी ही सब्जी और फल अपने मुँह में डालेंगी। केवल मेरा ही केला, मूली, बैंगन आपके होठों को छुएगा।
मम्मी (शुक्र करते हुए कि सब्जीवाला अब उनसे नाराज नहीं और मान रहा है): हाँ जी मैं प्रॉमिस करती हूँ कि आज के बाद केवल और केवल आपकी ही सब्जियाँ और फल मैं अपने मुँह में डालूँगी। केवल आपका ही केला, मूली और बैंगन खाऊँगी। अब तो खुश?
सब्जीवाला (स्माइल करते हुए): जी। पर ये तो बताइए कि आप इतने दिन आईं क्यों नहीं।
मम्मी (ग्लैड कि सब्जीवाला अब उनसे थोड़ा खुश है): वो हम लोग एक रिश्तेदार के यहाँ शादी में गए थे कुछ दिन के लिए।
सब्जीवाला: मैडम अगर आप यूँ ही शादियों और पार्टियों में जाती रहेंगी तो हमारा धंधा कैसे चलेगा?
मम्मी (सर झुकाते हुए): सॉरी।
मम्मी को सब्जीवाले की बात सही लग रही थी कि अगर सब शादी-पार्टियों में खाने लगें तो इनकी दुकान कैसे चलेगी।
सब्जीवाला: चलिए कोई बात नहीं। ये बताइए आज क्या लेंगी?
मम्मी: वही सोच रही हूँ। अब शादी से आए हैं तो कुछ दिन अच्छा ही खाने का मन करेगा।
सब्जीवाला: शादियों में तो खाने के बहुत सारे आइटम होते हैं। आप ऐसा कीजिए कई सारी सब्जियाँ और फल ले जाइए। फिर जो मन करे वो खा लेना।
मम्मी को उसकी बात ठीक लगती है। और सब्जीवाला कई सारी सब्जियाँ और फल पैक कर देता है, जिससे दो पूरे बड़े पॉलीथीन बैग्स भर जाते हैं। एक लौकी/घिया था बड़ा सा जो पैक में नहीं आ रहा था। मम्मी उसे पैसे देती हैं और दोनों बैग अपने दोनों हाथों में उठा लेती हैं। काफी भारी थे। मम्मी घिया को देखती हैं और पूछती हैं अब ये कैसे ले जाऊँ मेरे दोनों हाथ तो भर गए और और वजन मुझसे नहीं उठेगा।
सब्जीवाला घिया हाथ में लेकर उठता है। मम्मी के सामने जाता है। मम्मी ने रेड कलर की साड़ी पहनी हुई थी। सब्जीवाला बिना कुछ बोले साड़ी का पल्लू हटा देता है। मम्मी का ब्लाउज और उसमें 4 इंच की क्लीवेज सब्जीवाले के सामने आ जाती है। मम्मी को कुछ समझ नहीं आता ये क्या कर रहा है, उनके हाथ भी फुल थे। सब्जीवाला घिया का पीछे वाला हिस्सा क्लीवेज से सटा देता है और धीरे-धीरे ऊपर से प्रेशर लगाते हुए घिया को अंदर डाल देता है। घिया बड़े स्मूथली अंदर चला जाता है। मम्मी के बड़े-बड़े बूब्स में घिया इतना अंदर चला जाता है कि उसका ऊपर का 1/4 हिस्सा ही बाहर दिख रहा था। हालाँकि इससे मम्मी का ब्लाउज जरूर फुल टाइट हो गया। सब्जीवाला वापस पल्लू ब्लाउज पर सेट कर देता है जिससे घिया का बाहर निकला भाग ढक जाता है और मम्मी से कहता है,
सब्जीवाला: लीजिए, हो गया प्रॉब्लम का सॉल्यूशन। अब आप आराम से सारा सामान घर ले जा सकती हैं।
मम्मी मुड़कर घर चलने लगती हैं। घर ज्यादा दूर नहीं था मार्केट से इसलिए मम्मी पैदल ही आती-जाती थीं। रास्ते में मम्मी सोच रही थीं कि ये काफी अजीब सा सॉल्यूशन निकाला सब्जीवाले ने लौकी ले जाने का। पर शायद और कोई रास्ता भी नहीं था। लौकी काफी बड़ी थी और पैकेट में आ नहीं रही थी और मेरे दोनों हाथ भी भर गए थे। तो इसके अलावा क्या भी क्या जा सकता था। ये सोचते हुए मम्मी लौकी को बूब्स में दबाए घर आ जाती हैं।
दूधवाला तो डेली सुबह आता था तो उसको अब तक पता चल चुका था कि मम्मी भोली हैं। वो भी अक्सर यूँ ही मम्मी के मजे ले जाता था और मम्मी को पता भी नहीं चलता था। एक दिन वो रोज की तरह सुबह 6 बजे आता है और बेल बजाता है। आमतौर पर मम्मी की नींद हल्की होती है और वो एक बार की आवाज सुनते ही उठ जाती हैं पर पिछली रात वो शायद देर से सोई थीं तो आज आँख नहीं खुली। दूधवाला 3-4 बार बेल बजाता है और आखिरी बार जोर से लंबी बजाता है तब जाकर मम्मी की आँख खुलती है। मम्मी को एहसास होता है कि आज उनको लेट हो गया गेट खोलने में और वो फटाफट उठती हैं और बर्तन लेकर गेट पर दौड़कर जाती हैं। मम्मी ने शर्ट और पजामे वाला लेडीज नाइटसूट पहना था जिसमें शर्ट का ऊपर का बटन रात में खुल गया था। इस जल्दबाजी में उनको ध्यान नहीं रहता और वो बटन खुला ही रह जाता है जिससे उनकी काफी क्लीवेज नजर आ रही थी। बाल भी बिखरे हुए थे। और पजामे का नाड़ा भी बाहर निकला हुआ था। इसी हालत में वो गेट खोलती हैं।
दूधवाला: क्या मेमसाब कितना टाइम लगा दिए। कब से मैं आपकी बजा रहा हूँ।
मम्मी: मेरी क्या बजा रहे हो?
दूधवाला: बेल मेमसाब। इतना बजाने पर भी आप नहीं उठीं।
मम्मी: हाँ पता नहीं कैसी आँख लग गई थी। तुम्हारे इतना बजाने पर भी नहीं उठ पाई।
दूधवाला: पर मेरा टाइम तो खोटा हुआ ना मेमसाब। मुझे और जगह भी दूध देना होता है।
मम्मी को पछतावा होता है कि उनकी वजह से दूधवाले का कुछ नुकसान हो गया।
मम्मी: मुझे माफ कर दो। आगे से मैं जल्दी आया करूँगी।
दूधवाला: मुझे मालूम है आप औरतों का। पहले आप लोग अपना श्रृंगार करती हो, बाल वगैरह सवारती हो, तब जाके कुछ और करती हो। चाहे दूसरे का कितना भी टाइम वेस्ट क्यों न हो।
मम्मी: ऐसी बात नहीं है। मैं तो घंटी की आवाज सुनते ही दौड़ते हुए तुम्हारे पास आई। देखो मैंने बाल भी नहीं सँवारे।
दूधवाला अब मम्मी को ऊपर से नीचे तक देखता है। मम्मी उसे ऐसा करते देखती हैं। वो सोचती हैं कि ये मुझे एनालाइज और जज कर रहा है कि मैं सच बोल रही हूँ या नहीं। वो उम्मीद करती हैं कि ये मेरी बात का विश्वास कर ले कि मैंने सच में खुद को सँवारने में टाइम वेस्ट नहीं किया। और बस खड़े हुए उसको खुद को देखने देती हैं।
फाइनली दूधवाला बोलता है,
दूधवाला: ठीक है मेमसाब आपकी हालत देखकर लग तो रहा है कि आपने सँवारने में टाइम वेस्ट नहीं किया। जैसे कि आपका नाड़ा बाहर आया है और शर्ट का बटन खुला हुआ है।
उसके ऐसा कहने पर मम्मी नीचे देखती हैं तो पाती हैं कि सच में उनके पजामे का नाड़ा बाहर है और शर्ट में से क्लीवेज दिख रही है। मम्मी उनको ठीक करना चाहती थीं पर फिर उनको लगता है कि यही तो उनका पॉइंट प्रूव कर रहे हैं। वे इन्हें ठीक करेंगी तो उनका आर्गुमेंट कमजोर हो जाएगा। और मम्मी कहती हैं,
मम्मी: हाँ देख लो। मेरा नाड़ा भी बाहर निकला हुआ है और शर्ट का बटन भी देख लो खुला है। (ऐसा कहते हुए मम्मी पहले अपने नाड़े को और फिर अपनी शर्ट को खुले बटन एरिया पर से पकड़कर हिलाकर दिखाती हैं जिससे उनका क्लीवेज थोड़ा और दिख जाता है)। तो तुम कैसे कह सकते हो कि मैंने सँवारने में टाइम लगाया?
दूधवाला: ठीक है मैडम मैं मान लेता हूँ कि आज आपने सँवारने में टाइम नहीं लगाया, पर कल तो लगाएँगी और मेरा टाइम वेस्ट करेंगी।
मम्मी अब अपने आर्गुमेंट्स में बह चुकी थीं और अपनी बात पूरी तरह से साबित कर देना चाहती थीं।
मम्मी: नहीं मैं कल भी नहीं लगाऊँगी। देखना आगे से मैं तुम्हारी घंटी सुनते ही जैसी जिस हालत में बिस्तर से उठूँगी वैसी ही दौड़ी-दौड़ी तुम्हारे पास आऊँगी। तुम्हारा बिल्कुल टाइम वेस्ट नहीं करूँगी।
दूधवाला (मन ही मन खुश होते हुए): ओके मेमसाब देखते हैं। आज इतना टाइम तो निकल गया अब दूध ले लो।
दूधवाला हमेशा अपना दूध का डब्बा अपने घुटनों तक ही उठाता था जिससे मम्मी को काफी झुकना पड़ता था बर्तन में दूध लेने के लिए। मम्मी ने एक बार इस पर पूछा भी तो वो कहता मैडम इस उम्र में इतना ही उठ पाता है मुझसे, भारी है डब्बा। मम्मी को उस पर दया आ जाती है और वो फिर कभी क्वेश्चन नहीं करतीं इस चीज पर। आज भी मम्मी को बर्तन लेकर काफी झुकना पड़ा और आज तो उनका एक बटन भी खुला था तो दूधवाले को खूब मस्त दर्शन हुए मम्मी के बूब्स के।
एक दिन मम्मी को मॉल जाना था कपड़ों की शॉपिंग के लिए। वो नहा-धोकर सज-धजकर तैयार हो जाती हैं जाने के लिए। वो एक मस्त क्रीम कलर की साड़ी पहनती हैं विद टाइट लो कट ब्लाउज। साड़ी थोड़ी ट्रांसपेरेंट थी, कोई ध्यान से देखे तो उसको पल्लू में से काफी क्लीवेज दिख सकती थी। साड़ी नेवल से नीचे बँधी होने के कारण पेट और कमर फुल दिख रहे थे। होठों पर रेड लिपस्टिक। मम्मी के होठ बड़े-बड़े और फुल थे जिन पर लिपस्टिक लगाकर उनका फेस बहुत कामुक लगता था। वो अगर होठ थोड़े खोलकर स्लो मोशन में किसी मर्द की आँखों में देख लें तो उसका वहीं निकल जाए।
ऐसे तैयार होकर मम्मी घर से बाहर मेन रोड पर आती हैं और ऑटो देखने लगती हैं। काफी वेट करने पर भी कोई खाली ऑटो नहीं आता। मम्मी थोड़ा परेशान हो जाती हैं। फाइनली एक ऑटो आता है और मम्मी उसको काफी हाथ देकर रोकती हैं।
मम्मी: अरे ऑटो वाले भैया, रुको!
ऑटो वाला मम्मी को देखकर फट से ऑटो उनके पास रोकता है, पर उसको मम्मी जैसी औरत के मुँह से भैया सुनकर अच्छा नहीं लगा। वो मम्मी से कहता है,
ऑटो वाला: मैं आपका भैया नहीं हूँ। मैं आप जैसी मॉडर्न औरत को बहनजी कहने लगूँ तो आपको कैसा लगेगा?
मम्मी को थोड़ी शर्मिंदगी होती है।
मम्मी: आई ऐम सॉरी ऑटो वाले जी। पर मुझे समझ नहीं आया मैं और क्या कहूँ। मुझे डेरोगेटरी वर्ड्स जैसे “ए ड्राइवर, ए ऑटो” कहना अच्छा नहीं लगता आप लोगों के लिए।
ऑटो वाला समझ जाता है कि मम्मी काफी काइंड और कोमल हृदय हैं।
ऑटो वाला: मुझे ये देखकर अच्छा लगा कि आप हम जैसे लोगों की रिस्पेक्ट करती हो। मैडम मैं अमिताभ बच्चन का फैन हूँ और मर्द मूवी मेरी फेवरेट है। जैसे उसमें अमिताभ अपने को “मर्द टांगे वाला” बुलाते हैं मैं भी अपने आपको “मर्द ऑटो वाला” बुलाता हूँ। आप भी मुझे यही बुला सकती हैं।
मम्मी उसकी बात पर स्माइल करती हैं। मम्मी को ये इंटरेस्टिंग लगता है कि ये ऑटो वाला अपना टाइटल एक मूवी से ले रहा है और गरीब होते हुए भी खुद को अमिताभ बच्चन से कंपेयर कर रहा है।
मम्मी: ठीक है मर्द ऑटो वाले जी, मैं भी आपको यही बुलाऊँगी।
ऑटो वाला: आपने मेरा टाइटल तो पूछ लिया पर अपना नहीं बताया।
मम्मी: जी मेरा नाम शीतल है।
ऑटो वाला: शीतल जी मैंने आपका नाम नहीं टाइटल पूछा है। जैसे मेरा मर्द ऑटो वाला है, वैसे।
मम्मी: मेरा तो ऐसे कोई टाइटल नहीं। मुझे तो कोई गाड़ी भी चलानी नहीं आती।
ऑटो वाला: कोई बात नहीं मैडम, मैं आपको टाइटल दे देता हूँ – “औरत प्रिटी लिप्स वाली”।
मम्मी: अच्छा ठीक है। मेरा टाइटलकरण तो आपने कर दिया अब ये बताओ क्या मुझे बिठाकर ले चलोगे?
ऑटो वाला: बिल्कुल मैडम आपको बिठाकर ले चलेंगे। आपको बिठाने के लिए तो हर कोई हमेशा तैयार रहेगा।
मम्मी: रहने दो। कब से खड़ी वेट कर रही थी, किसी ने मुझे नहीं बिठाया।
ऑटो वाला: ये उनकी बदकिस्मती थी। शायद आपके भाग्य में मेरे साथ बैठना ही लिखा है। मैं आपको हमेशा बिठाकर रखूँगा मैडम, कभी आपको खड़ा नहीं रहने दूँगा।
मम्मी: मैं भी तैयार हूँ मर्द जी हमेशा आपके साथ बैठने के लिए। लेकिन ऐसा कैसे होगा?
ऑटो वाला: मैडम आप मुझे अपना नंबर दे दीजिए। मैं आपको मिस कॉल करता हूँ और आप मेरा नंबर सेव कर लीजिए। मेरा घर पास ही में है। जब भी आपका बैठने का मन करे आप मुझे कॉल कर देना मैं आ जाऊँगा आपको बिठाने के लिए।
मम्मी उसको अपना नंबर दे देती हैं और वो उनको मिस कॉल मारता है। मम्मी उसका नंबर सेव कर लेती हैं “मर्द ऑटो वाला” के नाम से। ऑटो वाला भी मम्मी का नंबर उनको दिए टाइटल से सेव करता है बट चेंज के साथ। उसने मम्मी का नाम सेव किया “शीतल सेक्सी लिप्स वाली”। फिर वो मम्मी को ऑटो में बैठने को कहता है, मम्मी पीछे बैठ जाती हैं और वो दोनों चल पड़ते हैं। चलते हुए ऑटो वाला पूछता है,
ऑटो वाला: कहाँ चलना चाहती हो मैडम?
मम्मी: कुछ कपड़े लेने थे तो सोच रही हूँ मॉल चलती हूँ।
ऑटो वाला: अपने लिए कपड़े लेने हैं?
मम्मी: हाँ अपने लिए लेने हैं।
ऑटो वाला: वैसे अगर आप बुरा न मानें तो मॉल में कपड़े उतने खास नहीं मिलते। उनकी फिटिंग ही नहीं आती, खासकर आप जैसी फिगर की औरत के लिए जो नॉर्मली साड़ी पहनती हैं। मॉल में चीजें महँगी मिलती हैं और सही भी नहीं आतीं।
मम्मी को पता थी ये बात। वो जब भी मॉल से साड़ी ब्लाउज या सूट सलवार या कभी-कभार लहंगा चोली लाती थीं तो वो कभी फिट नहीं आते थे और उनको फिर टेलर के चक्कर काटने पड़ते थे उसका खर्च और झंझट अलग।
मम्मी: बात तो आपकी सही लेकिन कर भी क्या सकते हैं। सब मॉल्स में ऐसा ही होता है।
ऑटो वाला: मैडम मैं एक दुकान जानता हूँ। मेरे जानने वाले की है। लेडीज गारमेंट्स की ही है। वहाँ आपको काफी सस्ती साड़ियाँ मिल जाएँगी। वो खुद ही टेलर भी है सो कोई भी फिटिंग इश्यू हो फ्री में फिक्स हो जाता है। आप कहें तो वहाँ चल सकते हैं।
मम्मी को उसका प्रपोजल अच्छा लगा। लेकिन जब वो ऑटो वाले से उस दुकान की लोकेशन पूछती हैं तो उन्हें पता चलता है कि ये दुकान तो एक स्लम एरिया में है जो उनकी कॉलोनी के बगल में ही है। वहाँ से कॉलोनी का नाला भी गुजरता है। मम्मी सोचती हैं कि वहाँ कैसी ही साड़ी मिलती होगी। अब मम्मी का मन नहीं था वहाँ जाने का लेकिन वो ये ऑटो वाले को बोलकर उसका दिल नहीं दुखाना चाहती थीं, सो वो बोलती हैं,
मम्मी: जी आपका प्रपोजल बहुत अच्छा है लेकिन मुझे मॉल से कुछ दूसरी चीजें भी लेनी हैं तो आज आप मुझे मॉल ही ले चलिए। आपकी दुकान पर मैं फिर कभी जरूर आऊँगी।
ये बात सच भी थी, मम्मी को और भी चीजें लेनी थीं मॉल से।
वो लोग मॉल पहुँच जाते हैं। जाते हुए ऑटो वाला बोलता है,
ऑटो वाला: मैडम अपने इस ऑटो वाले को याद रखिएगा। जब भी आपको बैठकर जाना हो मुझे कॉल कर दीजिएगा।
मम्मी: डोंट वरी, मैं आपको याद रखूँगी मर्द ऑटो वाले जी।
और स्माइल देकर चली जाती हैं।
उसी शाम मम्मी के व्हाट्सएप पर एक मैसेज आता है। मम्मी वैसे ज्यादा फोन वगैरह यूज नहीं करती थीं बस व्हाट्सएप फेसबुक चला लेती थीं। उनका नंबर सब्जीवाले और दूधवाले ने भी ले रखा था (आपको तो पता है मम्मी कितनी भोली हैं) और वो अक्सर उनको डबल मीनिंग मैसेज भेजते रहते थे जो मम्मी को समझ में नहीं आते थे। लेकिन आज किसी और का मैसेज आया।
“हाय प्रिटी लिप्स वाली औरत”
मम्मी देखती हैं आज जिस ऑटो वाले से वो मिलीं उसका मैसेज आया है। मैसेज पढ़कर उनके चेहरे पर स्माइल आ जाती है क्योंकि ये उनको न्यूली दिया गया टाइटल था। वो रिप्लाई करती हैं,
मम्मी: हाय मर्द ऑटो वाले जी।
ऑटो वाला: मैडम, मुझे खुशी है आप अपने इस ऑटो वाले को भूली नहीं।
मम्मी: मैं भला आपको कैसे भुला सकती हूँ। आपकी वजह से ही तो मैं आज मॉल जा पाई और अपने लिए कपड़े खरीद पाई।
ऑटो वाला: वैसे क्या-क्या खरीदा शीतल जी आज आपने?
मम्मी: जी बस एक-दो साड़ी और ब्लाउज।
ऑटो वाला: नहीं शीतल जी आपने कुछ और भी खरीदा है जो आप मुझसे छुपा रही हो।
मम्मी को अचंभा होता है कि इसको कैसे पता।
मम्मी: ऐसा क्यों लगता है आपको कि मैंने कुछ और भी खरीदा जो मैं नहीं बता रही?
ऑटो वाला: अरे शीतल जी आपने ही तो कहा था आपको मॉल से साड़ियों के अलावा कुछ और भी लेना है जिसकी वजह से आप मेरी बताई दुकान पर भी नहीं चलीं।
मम्मी को याद आता है और वो अपने सर पर थपकी मारती हैं।
मम्मी: ओह हाँ! मैंने ही तो कहा था। मैं भी बुद्धू हूँ।
ऑटो वाला: तो बताइए आपने और क्या लिया मॉल से।
मम्मी: जी वो… वो…
असल में मम्मी को मॉल से कुछ अपने लिए ब्रा और पैंटीज भी लेनी थीं जो कि एक और कारण था उनका ऑटो वाले की दुकान पर न जाने का क्योंकि वो उसके सामने ये चीजें नहीं लेना चाहती थीं।
ऑटो वाला: हाँ बताइए ना शीतल जी।
अब मम्मी फँस चुकी थीं। झूठ उनसे बोला नहीं जाता था और ऑटो वाला बार-बार पूछ रहा था।
मम्मी: जी कुछ इनरवेयर्स ली थीं (और शरमाने वाला इमोजी भी भेज देती हैं)।
ऑटो वाला: तो इसमें शरमाने वाली बात क्या है शीतल जी। ये तो औरतें लेती ही हैं। और आप तो मेरी औरत प्रिटी लिप्स वाली हो।
मम्मी: जी।
ऑटो वाला: पर मैं आपसे नाराज हूँ शीतल जी।
मम्मी: अरे मैंने आपसे बस अपना इनरवेयर लेना ही तो छुपाया। वो भी छुपाया नहीं बस बताने में हिचक रही थी। इतनी सी बात में क्यों नाराज हो गए??
ऑटो वाला मम्मी के भोलेपन पर मुस्कुरा देता है।
ऑटो वाला: मैं इस बात से नाराज नहीं हूँ शीतल जी।
मम्मी: तो?
ऑटो वाला: मैं इसलिए नाराज हूँ कि मैंने आपको बताया था कि मेरे जानने वाले की दुकान लेडीज गारमेंट है। तो जाहिर है वहाँ आपको अपने इनरवेयर भी मिल जाते। फिर भी आपने आने से मना कर दिया। आपने ऐसा क्यों किया शीतल जी?
मम्मी: जी वो बस मैं…
ऑटो वाला: मुझे लगता है आपने ऐसा इसलिए किया कि वो दुकान झुग्गी एरिया में है तो वहाँ तो केवल गरीब झुग्गी-झोपड़ी वाली औरतों के स्टैंडर्ड का ही सामान मिलता होगा। आपके लेवल का नहीं। आप भी बाकी हाई क्लास औरतों की तरह ही निकलीं शीतल जी।
मम्मी को उसकी ये बात बहुत चुभती है।
मम्मी: ऐसा बिल्कुल भी नहीं है मर्द जी। आपको गलतफहमी हो रही है। आप मेरी बात का विश्वास कीजिए। मैं बाकी औरतों की तरह नहीं हूँ। मैं तो आपकी प्रिटी लिप्स वाली औरत हूँ ना। क्या आप सब औरतों को यही टाइटल देते हैं?
ऑटो वाला: नहीं ये तो केवल आपके लिए था। मुझे लगा था मेरी ये टाइटल वाली औरत डिफरेंट है।
मम्मी: आपको सही लगा था मर्द जी। आपकी ये टाइटल वाली डिफरेंट है। वो डिस्क्रिमिनेट नहीं करती अमीर और गरीब में। अपनी इस औरत का विश्वास कीजिए।
ऑटो वाला: ठीक है शीतल जी। लेकिन आपको एक टेस्ट देना होगा। कल मैं आपके लिए उसी दुकान से कुछ कपड़े लाऊँगा। आपको वो मुझे पहनकर दिखाने होंगे। तभी मुझे विश्वास आएगा कि आपको उस एरिया की दुकानों से और वहाँ की औरतों के पहनावे से कोई दिक्कत नहीं। और चिंता न करें, मैं कोई गलत कपड़े नहीं दूँगा, मैं वही दूँगा जो वहाँ की औरतें आमतौर पर पहनती हैं।
मम्मी: ठीक है मर्द ऑटो वाले जी। मैं भी आपकी प्रिटी लिप्स वाली औरत हूँ। मैं ये टेस्ट जरूर पास करके दिखाऊँगी।
अब देखना है कि ऑटो वाला मम्मी को कैसे कपड़े पहनवाता है और क्या मम्मी खुद को अनबायस्ड और डिफरेंट साबित करने के चक्कर में वो कपड़े पहनेंगी?
क्या होगा आगे, पढिए अगले पार्ट मे ।