मम्मी के प्यार से चूत चुदाई तक

By | September 27, 2026

Maa ki chut chudai ki hindi kahani:- दोस्तो, मेरा नाम सिमरनजीत सिंह है और मैं पंजाब का रहने वाला हूँ। दोस्तो वैसे तो मैं पंजाबी हूँ पर फिर भी आप सबके लिए अपनी ये पहली सच्ची इंडियन माँ-बेटा सेक्स स्टोरी हिंदी में लिख रहा हूँ ताकि मेरी जिंदगी की ये कहानी आप सब आराम से पढ़ सकें और जान सकें कि किसी के साथ ऐसा भी हो सकता है।

दोस्तो ये कहानी मेरे जिंदगी का एक ऐसा सच है जिसे मैं रोज याद करके रोज पल-पल मरता हूँ। भगवान करे ऐसा कभी किसी के साथ न हो जैसा कि मेरे साथ हुआ है। दोस्तो मैं आपको एक बार और कह दूँ कि ये कहानी कोई किसी के मन की सोची कहानी नहीं है। ये मेरे यानी सिमरनजीत सिंह की जिंदगी से जुड़ा एक ऐसा सच है जो कि आप भी पढ़कर शायद कहें कि मैंने ठीक किया या नहीं या ये सब कुछ मेरे साथ हालात ने किया।

Maa ki chut chudai ki hindi sex kahani

तो चलिए मैं आप सब का ज्यादा समय न लेते हुए सीधा अपनी कहानी पर आता हूँ।

मेरे घर में मैं, मेरी मम्मी रविंदर कौर और मेरी बहन मनप्रीत कौर और मेरा बड़ा भाई जो कि अठारह साल की उम्र से ही यूएसए में रह रहा है, उसका नाम जसबीर सिंह है। और मेरे फादर साहब जो कि आर्मी में थे मेजर वीरेंद्र सिंह। उनकी बहुत पहले ही डेथ हो गई थी जब हम सब छोटे-छोटे थे। वो तो शुक्र है पापा की पेंशन टाइम टू टाइम आ जाती है इसलिए मम्मी को कहीं बाहर काम नहीं करना पड़ा।

पापा के मरने के बाद मेरे बड़े भाई को आर्मी ने जॉब ऑफर की थी पर मम्मी ने उसे आर्मी में जाने से इनकार दिया था क्योंकि वो अपनी पति को तो खो चुकी थीं और अब वो अपने बेटे को खोना नहीं चाहती थीं। पर मेरे बड़े भाई का इरादा कुछ और ही था और जैसे ही अठारह साल का हुआ तो उसने मम्मी से जिद करके बाहर यूएसए जहाँ मेरे मामा जी रहते हैं उनके पास रहने के लिए चला गया और वहीं अपनी आगे की स्टडी करके वहीं जॉब करने लग गया।

अब घर में मैं, मम्मी और मेरी छोटी बहन रहते थे। मैं शुरू से ही बहुत शर्मीला और भोला सा था और अब भी थोड़ा-बहुत हूँ। मुझे जल्दी से कोई बात या किसी का इशारा समझ नहीं आता और इसलिए आज तक मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं बनी। मेरी मम्मी शुरू से ही काफी जवान और काफी सुंदर हैं। वो पापा के मरने के बाद भी थोड़ा-बहुत मेकअप करती रहती हैं। अगर मैं उनके जिस्म की बात करूँ तो शायद कुछ ऐसा है ३४-३५-३८। इस साइज को जरा अपने माइंड में सोचो और मेरी माँ की तस्वीर बनाइए।

मेरी माँ का रंग एकदम गोरा-चिट्टा है और उनके बूब्स काफी बाहर आए हुए हैं। उनकी गाँड भी काफी मोटी है पर बहुत ही सॉफ्ट है क्योंकि जब वो चलती हैं तो उनकी पूरी गाँड बहुत ही मस्त तरीके से हिलती थी। पहले तो वो पतियाला सलवार सूट पहनती थीं पर जैसे-जैसे टाइट पजामे का फैशन आया तो मम्मी ने फुल्ली टाइट पजामा डालना शुरू कर दिया और अब उनके मोटे-मोटे चुत्तर और पट्ट साफ-साफ दिखते थे।

अब रही बात मेरी बहन रविंदर की, वो अभी उन्नीस साल की है और वो बहुत ही क्यूट है और बहुत ही शरारती है। रविंदर सारा दिन मुझसे बहुत पंगे लेती है और अगर मैं उसे जरा सा भी गुस्सा करके डाँट दूँ तो मम्मी तभी मेरी पिटाई कर देती थीं। क्योंकि एक वो ही हमारे छोटे से घर की सबसे प्यारी और लाडली बच्ची थी। मैं उससे बहुत प्यार करता हूँ।

मैंने पैसे कमाने के लिए अब अपना एक नया काम शुरू किया था जिससे मैं घर से सारा दिन बाहर ही रहने लग गया। जब मैं बाहर अपने दोस्तों और दूसरे लड़कों को देखता था कि वो सब अपनी एक नहीं चार-चार गर्लफ्रेंड्स के साथ घूमते थे तो मुझे अपने आप बहुत गुस्सा आता था। जिसकी वजह से अपने काम पर जरा भी ध्यान नहीं लगा पाता था और घर जाकर अपना सारा गुस्सा अपनी मम्मी पर निकाल देता था।

मैं और मेरा दिमाग हर वक्त लड़कियों के बारे में ही सोचते रहते थे। इसलिए मैं अपने माइंड को शांत करने के लिए नेट पर ब्लू मूवीज देखता था और मुठ मारकर अपने आप को और अपने लंड दोनों को शांत करता था। मैं अब बाहर रहकर एक बिगड़ा हुआ लड़का बन चुका था जिसे कोई पसंद नहीं करता था। अब मैं अपनी मम्मी से काफी गुस्से में बात करता था जिससे उनका दिल बहुत दुखता था।

एक दिन की बात है अपने रूम में बैठा ब्लू मूवीज देख रहा था जिसकी वजह से मेरा लंड पूरा खड़ा था तभी मम्मी ने मुझे आवाज मारी पर मैंने उन्हें इग्नोर कर दिया। पर जब मम्मी मुझे गुस्से में बुलाने लगीं तो मुझे न चाहते हुए भी उनके पास जाना पड़ा। मैंने अपने दोनों हाथ अपने पजामे पर रखे हुए ताकि मैं अपनी मम्मी से अपना खड़ा लंड छुपा सकूँ।

जब मैं मम्मी के पास गया तो मम्मी गुस्से में बोलीं—

मम्मी: कहाँ रह गया था? सुनता नहीं? तुझे कब से बुला रही हूँ।

मै: हाँ क्या हो गया है? कौन सा आसमान टूट गया है? बोलो अब मुझे और भी काम है।

मम्मी: जा किचन में से पानी की बोतल लेकर आ और ठंडी लेकर आइयो, समझा।

मैं उनकी बात सुनकर अंदर से पानी की बोतल ले आया और जब मैंने अपने एक हाथ में पानी की बोतल पकड़ी हुई थी तब मम्मी की नजर मेरे पजामे पर थी जिससे मेरे लंड ने तंबू बनाया हुआ था। मैं समझ गया कि मम्मी ने मेरा लंड देख लिया है। फिर मैं शर्मिंदा होकर अपने रूम में चला गया।

अगले दिन मैं और मम्मी सोफे पर बैठे एक साथ टीवी देख रहे थे तभी टीवी में एक सेक्सी सा सीन आ गया जिसकी वजह से मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया। मैं अपने लंड पर कंट्रोल नहीं कर पा रहा था इसलिए मैं लंड को अपने हाथों से ढककर रखा। पर जैसे ही मम्मी की नजर मेरे लंड पर पड़ी तो वो उठकर तभी वहाँ से चली गईं। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर मेरे साथ ये सब क्यों हो रहा है। इसमें मेरी क्या गलती है कि मेरा लंड अचानक से खड़ा हो गया था।

अगले दिन मैं और मेरी बहन आपस में मस्ती कर रहे थे कि तभी खेलते-खेलते मेरा एक हाथ दीदी के पेट पर लग गया और मैंने अपना हाथ वहाँ करीब पाँच सेकंड रखा और तभी मेरे अंदर कुछ अजीब सी फीलिंग आने लगी और मेरा लंड खड़ा हो गया। तभी मैं अपनी बहन से दूर हो गया और अपने कमरे में बैठकर बहुत ज्यादा शर्मिंदा होने लगा कि आखिर वो मेरी बहन है और उसके साथ ऐसा कैसे सोच सकता हूँ।

उस दिन के बाद मम्मी मेरे ऊपर अपनी पूरी नजर रखती थीं कि मैं अपने रूम में अकेला बैठा क्या कर रहा हूँ और टीवी में भी क्या देख रहा हूँ और अपनी बहन के साथ कैसे खेल रहा हूँ। अब मुझे घर में कुछ भी अच्छा नहीं लगता था। वैसे ही गर्मियों का मौसम था। गर्मी अपने पूरे जोर पर थी। एक दिन मम्मी किचन में दोपहर का खाना बना रही थीं।

मैं किचन में पानी पीने के लिए जा रहा था कि मैं जैसे ही किचन की तरफ गया तो मैं वहीं रुक गया और पीछे से ही अंदर देखने लग गया। मैंने देखा कि मम्मी पूरी पसीने से नहाई हुई हैं। उनके पूरे टाइट कपड़े पसीने से भीग चुके हैं जिसकी वजह से उनका पूरा जिस्म साफ-साफ दिख रहा था।

मुझे उनके बूब्स, पेट और वहाँ तक की पट्ट और चुत्तर भी साफ-साफ दिख रहे थे। मैं वापस अपने कमरे में आया और बैठकर सोचने लगा कि मैं ये ऐसा कैसे सोच सकता हूँ। वो मेरी माँ हैं। उन दिनों गर्मियाँ तो हैं ही थीं इसलिए हम तीनों दोपहर को लंच करके सो जाते थे। एक दिन हम सब ऐसे ही सो रहे थे। अचानक लाइट चली गई और करीब दस मिनट में ही मम्मी पूरी पसीने से गीली हो गईं और मुझसे बोलीं—

मम्मी: बेटा कम से कम तुम तो शर्ट उतार दो। इतनी गर्मी है।

मैं उनके कहने पर अपनी शर्ट निकाल दिया और मम्मी खुद बाथरूम में नहाने चली गईं। जब मम्मी नहा चुकीं तो उन्होंने मुझे आवाज मारी—

मम्मी: बेटा टॉवल देकर जा। मुझे भूल गई लाना।

फिर मैंने टॉवल दिया तो दरवाजे की साइड में से मुझे उनके नंगे गोरे जिस्म के दर्शन हो गए। क्या कमाल का जिस्म था मेरी माँ का। पर मैंने उनके बारे में कभी गलत नहीं सोचा।

उसी रात मम्मी ने मुझे अपने रूम में बुलाया। मुझे बहुत गुस्सा आता था जब मुझे मम्मी बार-बार बुलाती थीं। जब मैं उनके पास गया तो उन्होंने मुझसे कहा—

मम्मी: बेटा चलो मेरी टाँगें दबा दो। आज मैं बहुत थक चुकी हूँ।

मै: क्या मम्मी आप रविंदर को भी तो बोल सकती हो। हर टाइम आपको सिर्फ मैं ही दिखता हूँ।

मम्मी: क्या तुम हर वक्त काम चोरी करते रहते हो? कभी अपनी मम्मी की बात भी सुन लिया करो। एक तो तुम्हारे पापा नहीं रहे ऊपर से तुम्हारा बड़ा भाई मुझे छोड़कर बाहर चला गया है और बेटा अब सिर्फ तुम ही हो मेरे पास और तुम भी मुझसे दुखी हो। मेरी तो किस्मत ही बहुत खराब है।

ये कहते ही मेरी माँ रोने लग गईं। मुझसे ये सब देखा न गया इसलिए मैं बोला—

मै: मम्मी प्लीज अब आप रो मत। प्लीज बोलो क्या काम है जल्दी बोलो प्लीज।

मम्मी: कुछ नहीं बेटा। बस तू रहने दे। जा अपना काम कर जो कर रहा था तू।

मै: प्लीज मम्मी अब बोलो भी क्या बात है। अब आप ज्यादा नाटक मत करो।

मम्मी: बेटा बस मेरी टाँगें बहुत दर्द कर रही थीं और रविंदर ने सुबह स्कूल जाना था इसलिए वो सो रही है वरना मैं तो उसे ही कह देती। अब तूने मेरी टाँगें दबानी हैं दबा दे वरना रहने दे। कोई जरूरत नहीं है।

मैंने मम्मी को बिना कोई जवाब दिए उनकी टाँगें दबानी शुरू कर दीं और उन्होंने अपनी सलवार ऊपर कर ली। मैंने बिना कुछ गलत सोचे उनकी टाँगें दबानी शुरू कर दीं।

मैंने करीब उनकी टाँगें पंद्रह मिनट तक दबाईं और फिर मम्मी बोलीं—

मम्मी: बस बेटा जीता रह। अब ऐसा कर रात बहुत हो गई। आज तू मेरे पास ही सो जा।

मैं फिर से गुस्से में बोला—

मै: मैंने आपके पास नहीं सोना। मैं अपने कमरे में जा रहा हूँ।

मम्मी: देखा बेटा तू मेरी बात कभी नहीं मानता। कभी तो अपनी माँ के दिल की तमन्ना पूरी कर दिया कर तू। वैसे तू आजकल अपनी माँ से एक मिनट भी बात नहीं करता। आज तू मेरे पास सो जा। इस बहाने मैं तुझसे दो-चार बातें भी कर लूँगी।

मै: ठीक है माँ। सोता हूँ। आज मैं आपके साथ ही सोता हूँ। बस खुश हो अब।

और ये कहते ही मैं अपनी माँ के पास लेट गया। कुछ ही देर में मम्मी बोलीं—

मम्मी: बेटा मुझे लगता है अब तेरी शादी कर देनी चाहिए।

मै: आज आपके दिमाग में मेरी शादी का ख्याल कहाँ से आ गया?

मम्मी: मैं तेरी माँ हूँ और मुझे एक बहू चाहिए। क्यों तूने शादी नहीं करनी क्या?

मै: नहीं मम्मी ऐसी बात नहीं है। करनी तो है मैंने पर इतनी जल्दी नहीं।

मम्मी: जल्दी कहाँ है? उन्नीस साल का तो हो गया है अब तू। और वैसे भी आजकल तेरी हरकतें देखकर मुझे लगता है कि तेरी शादी अब मुझे करनी ही पड़ेगी।

मैं उनकी ये बात सुनकर शर्म से पानी-पानी हो गया और एकदम गुस्से में बोला—

मै: अब आप अपना ये लेक्चर बंद करो और मुझे सो जाने दो।

ये कहते ही मैंने दूसरी साइड करवट ली और चुपचाप सो गया। अगले दिन जब मेरी बहन अपने स्कूल से घर वापस आई तो उसने मुझे बताया—

रविंदर: भाई मुझे स्कूल की तरफ से दो दिन के लिए ट्रिप पर जाना है पर मुझे मम्मी जाने नहीं देगी। प्लीज आप कुछ कीजिए और मम्मी को जैसे-तैसे करके मनवाइए ना।

मैंने उससे कहा—

मै: चल देखता हूँ। अगर मम्मी मान गईं तो तू पक्का जाएगी।

मैं मम्मी के पास गया और उनसे इस बारे में बात करी तो मम्मी मुझसे बोलीं—

मम्मी: बेटा तू तो मेरी कोई बात मानता नहीं तो मैं तेरी बात कैसे मान लूँ।

मै: मम्मी प्लीज मान जाओ। मैं आगे से आपकी हर बात चुपचाप मान लूँगा।

मम्मी: मुझे अच्छे से पता है कि तू झूठ बोल रहा है।

मै: नहीं मम्मी। चाहे तो आप मुझे इस बार आजमा कर देख लेना कि मैं झूठ बोल रहा हूँ या सच।

मम्मी: ठीक है मेरी तरफ से हाँ है। और हाँ अब अपना वादा जरा याद रखना।

मै: ठीक है मम्मी आप टेंशन न लो प्लीज।

ये कहकर मैं अपनी बहन के पास गया और उसे एक सरप्राइज देते हुए कहा—

मै: मेरी बहन चल तू अपना सामान पैक कर। कल तू अपनी ट्रिप पर जा रही है।

और फिर हम दोनों फिर से आपस में मस्ती करने लग गए।

अगले दिन सुबह ही रविंदर अपने दो दिन के स्कूल के ट्रिप के लिए चली गई। मम्मी मेरे पास आईं और बोलीं—

मम्मी: बेटा अब अगले दो दिन तुम घर पर रहना क्योंकि अब मैं घर में अकेली हूँ।

मैं फिर से गुस्से में बोला—

मै: क्या है मम्मी ये? अब दो दिन के लिए मैं आपका सिक्योरिटी गार्ड बनकर रहूँ घर में? मुझे कोई और काम नहीं है क्या?

मम्मी फिर थोड़ा उदास मूड में बोलीं—

मम्मी: बेटा मैं तुम्हारी माँ हूँ। कभी तो मुझसे प्यार से बात कर लिया करो।

मैं खुद को संभालते हुए बोला—

मै: हाँ माँ ठीक है। सॉरी।

फिर मम्मी ने मेरे लिए आज मेरी पसंद की सारी डिशेस बनाईं और मैंने और मेरी माँ ने बड़े प्यार से एक प्लेट में एक-दूसरे को अपने हाथ से खाना खिलाया। मेरी माँ मेरे इस अंदाज से बहुत ही खुश थीं। फिर शाम को जब हम दोनों उठे तो मम्मी मेरे लिए टी बनाकर लाईं और मुझे मेरा कप दे दिया। पर जैसे ही मैं टी पीने लगा तभी उन्होंने मेरे हाथ से मेरा कप ले लिया और मेरे कप से थोड़ी सी चाय खुद पी ली और मेरा कप लेकर बाथरूम में चली गईं। वहाँ से माँ थोड़ी देर में आईं और मुझे मेरा कप देते हुए बोलीं—

मम्मी: लो बेटा अब पियो और मुझे इसका टेस्ट बताओ कैसा है।

मैंने टी पी और बोला—

मै: हाँ ये बहुत टेस्टी है और इसका टेस्ट पहले वाली टी से बहुत ही अलग है। क्या आपने इसमें कुछ अलग डाला है?

मम्मी: हाँ डाला है।

और मेरी आँखों में एक बार देखकर मम्मी मुस्कुरा दीं।

मम्मी: बेटा तुम्हें याद है मैंने कुछ दिन पहले तुमसे तुम्हारी शादी की बात की थी।

मै: हाँ जी मम्मी मुझे अच्छे से याद है।

मम्मी: हाँ तो अब तुम अपनी शादी के लिए तैयार हो जाओ क्योंकि अब जल्दी ही शादी हो जाएगी।

मैं झट से बोला—

मै: मेरी शादी पर किससे? और मम्मी अभी मेरी उम्र ही क्या है जो आप मेरी शादी करने लगे हो।

मम्मी: अच्छा बाबा नहीं करती शादी पर?

मै: अब पर क्या आगे?

मम्मी: कुछ नहीं। बस तुम शादी की बात छोड़ो।

मै: ठीक है। मुझे तो आपका कुछ समझ ही नहीं आता।

उसके कुछ देर बाद मम्मी पूरे घर में इधर-उधर परेशान होते हुए घूमती रहीं। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर अब इन्हें क्या हुआ है। मैंने आखिर उनसे पूछ ही लिया—

मै: मम्मी अब आपको क्या हो गया है?

तो मम्मी बोलीं—

मम्मी: बेटा कुछ नहीं। रविंदर है नहीं और मेरी कमर और कुहनी बहुत दर्द कर रहे हैं। अगर वो होती तो मेरी कमर की मालिश कर देती और मुझे थोड़ा आराम मिल जाता। अगर मैं तुम्हें कहूँ तो मुझे पता है तुम तो मुझे गुस्से में जवाब दे दोगे।

मै: ओह हो मम्मी आप भी ना। मैं हर टाइम भी गुस्से में नहीं रहता। चलो अंदर मैं कर देता हूँ। मालिश ही तो करनी है। मैं कर देता हूँ।

फिर मम्मी अंदर चली गईं और मैं गैस पर थोड़ा सरसों का ऑयल गरम करके उनके रूम में आ गया। मैंने देखा कि बेड पर मम्मी उलटी लेटी हुई हैं। उन्होंने अपनी सलवार का नाड़ा ढीला किया हुआ है और अपनी गाँड थोड़ी-थोड़ी नंगी की हुई है और उन्होंने अपना कुर्ता अपने बूब्स के ऊपर किया हुआ है जिससे उनकी व्हाइट कलर की ब्रा की स्ट्रिप्स साफ दिख रही हैं। मैं उनके पास जाकर बैठ गया। मैंने आज पहली बार अपनी माँ को नंगा इतने करीब से देखा था।

उन्हें इतनी पास से देखकर मुझे कुछ-कुछ होने लग गया। मैंने ऑयल उनकी कमर पर गिराया और धीरे-धीरे उनकी मालिश शुरू करी। कुछ ही देर में मम्मी अपने हाथों से अपनी सलवार पूरी नीचे कर दी जिससे उनके गोरे मोटे-मोटे चुत्तर मेरे सामने आ गए। जिन्हें देखकर मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया।

मुझे अब पसीने आने शुरू हो गए क्योंकि वो मेरी माँ थीं और मैं उनके बारे में गलत नहीं सोच सकता था। तभी मम्मी बोलीं—

मम्मी: बेटा जरा थोड़ा नीचे भी जाओ और दोनों को अच्छे से मालिश कर दो।

मैंने अपनी पूरी हिम्मत करके उनके दोनों चुत्तरों को मालिश करना शुरू कर दिया। उस वक्त मेरी हालत बहुत ही खराब थी। मुझे बहुत ही पसीना आ रहा था। मेरे माथे का पसीना अब मम्मी के नंगे जिस्म पर गिर रहा था। तभी मम्मी खड़ी हुईं और बोलीं—

मम्मी: बेटा अगर तुम गुस्सा न करो तो एक बात कहूँ।

मै: हाँ जी बोलिए।

मम्मी: बेटा तुम अब शादी कर ही लो।

मै: मम्मी आप फिर से शुरू हो गईं और फिर कहोगी कि मैं गुस्सा करता हूँ।

मम्मी: बेटा मैं तो तुम्हारी हालत देखकर बोल रही थी तुम्हें। बेटा मैं तुम्हारी माँ हूँ। मुझे सब पता है कि मेरे बच्चे को किस टाइम क्या चाहिए।

उनकी बात सुनकर मुझे और भी शर्म आने लग गई और उसके बाद मैं वहाँ से खड़ा हुआ और सीधा अपने रूम में चला गया। उस दिन मैं सारा दिन अपने रूम में रहा। एक भी बार मैं अपने कमरे से बाहर नहीं गया और सारा दिन मैं मम्मी की बातों का मतलब सोचने लगा रहा कि आखिर मम्मी ने मुझसे क्या कहा था।

शाम को मम्मी मेरे रूम में आईं और बोलीं—

मम्मी: बेटा क्या हुआ है तुम्हें? आज तुम सुबह से अपने कमरे से बाहर नहीं आए।

मै: प्लीज मम्मी जी मुझे अकेला छोड़ दो प्लीज।

मम्मी: अच्छा चलो मेरे साथ बाहर एक साथ बैठकर हम दोनों डिनर करते हैं। प्लीज चलो।

फिर मैं मम्मी के साथ डिनर करने के लिए बैठ गया। जब मैं डिनर कर रहा था तब मम्मी मुझे घूर-घूर कर देख रही थीं। तब मैं बोला—

मै: क्या हुआ? क्या चाहिए अब आपको?

मम्मी: तुम्हारा गुस्सा तो कभी ठीक हो ही नहीं सकता। अच्छा मैं सोच रही थी कि तुम्हें पैसे चाहिए क्या?

मै: हाँ चाहिए। आज के टाइम में पैसे किसे नहीं चाहिए। बोलो।

मम्मी: ठीक है एक मिनट रुको। मैं लाती हूँ।

मम्मी करीब दो मिनट बाद आईं और मुझे पाँच हजार रुपये देते हुए बोलीं—

मम्मी: ये लो पूरे पाँच हजार और जाओ ऐश करो। और हाँ एक घंटे में वापस आ जाना। मैं घर पर अकेली हूँ ये मत भूलना।

मै: ठीक है मम्मी। आई लव यू।

उसके बाद मैं मार्केट में चला गया और उन पैसों से मैंने खूब ऐश करी। रात को मैं बहुत लेट आया। करीब ग्यारह बजे चुके थे। घर आते ही मम्मी ने मुझे बहुत डाँटा और कहा—

मम्मी: ये सब क्या? तुम्हें प्यार से कुछ समझ नहीं आता क्या? मैंने तुम्हें पहले ही कहा था कि मैं आज घर में अकेली हूँ पर तुम्हें तो मेरी कोई फिक्र ही नहीं है।

फिर मैंने भी उनसे काफी गुस्से में बात करी और अपने रूम में सोने के लिए चला गया। अगले दिन सुबह मेरी बहन अपने स्कूल के ट्रिप से वापस आकर फिर से स्कूल में चली गईं और फिर दोपहर को जब वो वापस आईं तो हम दोनों फिर से आपस में शरारत करने लग गए।

मैं उस दिन मम्मी से बोला तक नहीं। अगले दिन मेरी मम्मी और मेरी बहन हमारे दूर के किसी रिश्तेदार की शादी में चली गईं। वो दोनों पाँच दिन बाद घर आईं और जब मम्मी घर आईं तो उनका मूड काफी अच्छा था। पर वो ठीक से चल नहीं पा रही थीं।

मम्मी मुझसे बहुत प्यार से बात कर रही थीं और मेरे लिए बहुत अच्छा खाना बना रही थीं। मैं चाहे जहाँ मर्जी जाऊँ और जो मर्जी करूँ मम्मी मुझे कुछ नहीं कहती थीं।

ऐसे ही दो दिन निकल गए और दो दिन बाद जब मेरी बहन स्कूल में चली गईं तो मेरी माँ मेरे कमरे में आईं। मैं अपने बेड पर बैठा था और मम्मी मेरे पास बैठकर बोलीं—

मम्मी: बेटा मैंने तुमसे एक बात करनी है।

मै: हाँ मम्मी बोलो क्या बात है।

मम्मी: देखो बेटा अब तुम प्लीज गलत मत समझना प्लीज। क्यों मैंने तुम्हें इशारों में बहुत बार समझाने की कोशिश करी पर तुम्हारी समझ में कुछ नहीं आया कि तुम्हारी माँ तुमसे अब क्या चाहती है। पर अब मुझसे और कंट्रोल नहीं होता।

मै: मम्मी आप कैसी बातें कर रही हो? मुझे कुछ समझ नहीं आता। प्लीज आप साफ-साफ बात करो मुझसे।

इतने में ही मम्मी ने मेरे लंड पर अपना हाथ रख दिया और उसे जोर-जोर से मसलने लग गईं। मेरी साँस वहीं की वहीं रुक गई और जैसे ही मैं कुछ बोलने वाला था तभी मम्मी ने अपने होठ मेरे होठों पर रख दिए और जोर-जोर से मेरे होठों को चूसने लग गईं।

करीब पाँच मिनट तक मेरे होठ चूसने के बाद मम्मी बोलीं—

मम्मी: बेटा अब तुम चुप रहना प्लीज। आज मुझे अपनी प्यास बुझाने दो प्लीज।

फिर मम्मी ने पहले अपने सारे कपड़े उतार दिए और फिर मुझे नंगा कर दिया और मम्मी पूरी नंगी हो चुकी थीं। उसके बाद मम्मी मेरे ऊपर ६९ की पोजीशन में आईं और वो मेरे लंड को अपने मुँह में डालकर चूसने लग गईं और अपनी चूत मेरे मुँह के ऊपर रखकर मेरी कमर को जोर-जोर से हिलाकर अपनी चूत चटवाने लग गईं।

करीब दस मिनट तक हम दोनों ऐसे ही एक-दूसरे को चूसते रहे और फिर पहले मम्मी ने अपनी चूत का सारा पानी मेरे मुँह पर निकाला और फिर मैंने अपने लंड का सारा पानी उनके मुँह के अंदर निकाल दिया।

उसके बाद मम्मी ने मेरे लंड को अच्छे से चाट-चाट कर अच्छे से साफ किया और फिर मेरे फेस को अपनी जीभ से चाटकर साफ किया। उसके बाद मैंने अपनी माँ के दोनों बूब्स पर हनी लगाकर अच्छे से चूसे और उसके बाद हम दोनों एक बजे तक जमकर चुदाई करी। क्योंकि एक बजे मेरी बहन स्कूल से आ जाती है।

उस दिन के बाद मम्मी और मेरा चुदाई का प्रोग्राम डेली चलने लग गया। उस दिन के बाद मेरे और मम्मी की सारी लड़ाई खत्म हो गई और इसको देखकर मेरी बहन भी काफी हैरान थी। वो मुझसे पूछती थी कि क्या हो गया है पर मैं उसे क्या बताऊँ कि अब मम्मी मुझसे डेली चुदती हैं इसलिए वो ठीक है अब मेरे साथ।

दोस्तो, आज की डेट में मम्मी को मारे दो साल हो चुके हैं और मुझे लगता है कि मैंने जो अपनी मम्मी के साथ किया है वो एक पाप है।

प्लीज दोस्तो आपको क्या लगता है कि मैंने जो किया है वो गलत है या ठीक है। प्लीज मुझे नीचे कमेंट्स लिखके जरूर बताना।

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